

914 वर्ग किमी क्षेत्र में व्यापक तैयारी, पहाड़ी जलविहीन इलाकों तक पहुंचाई जा रही पानी की सुविधा..


बिलासपुर।भीषण गर्मी के बढ़ते प्रभाव के बीच जंगलों में रहने वाले वन्यप्राणियों के लिए पानी सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इस वर्ष विशेष “जल प्रबंधन अभियान” शुरू किया है। इसके तहत न केवल पुराने जलस्रोतों को दुरुस्त किया जा रहा है, बल्कि जलविहीन और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में 132 नए सासरपीट (कृत्रिम जलस्रोत) का निर्माण भी कराया गया है।
पहाड़ी इलाकों में पहली बार मजबूत व्यवस्था..
अचानकमार टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा पहाड़ी और घने जंगलों से घिरा हुआ है, जहां गर्मी के दिनों में प्राकृतिक जलस्रोत तेजी से सूख जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में वन्यजीवों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे उनका जीवन जोखिम में पड़ जाता था। इसे ध्यान में रखते हुए इस बार विशेष रूप से उन स्थानों को चिन्हित किया गया जहां पानी की सबसे ज्यादा कमी रहती है, और वहीं सासरपीट बनाए गए हैं।
हर जलस्रोत पर प्रभारी, लगातार निगरानी..


रिजर्व प्रबंधन ने 132 सासरपीट की परिक्षेत्रवार कोडिंग कर प्रत्येक जलस्रोत के लिए अलग-अलग प्रभारी नियुक्त किए हैं। ये प्रभारी नियमित रूप से जलस्तर की जांच करते हैं, जरूरत पड़ने पर पानी भरवाते हैं और साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी इन सभी व्यवस्थाओं की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि कहीं भी पानी की कमी न हो।
400 से अधिक जलस्रोत पहले से सक्रिय..
रिजर्व के 914.017 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पहले से ही 400 से अधिक प्राकृतिक और कृत्रिम जलस्रोत मौजूद हैं। इन सभी का ग्रीष्मकाल से पहले ही सर्वेक्षण किया जा चुका है। जहां-जहां पानी कम पाया गया, वहां सुधार और अतिरिक्त जल आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है।
वन्यप्राणियों को उनके क्षेत्र में ही मिलेगा पानी..

प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य यह है कि वन्यजीवों को पानी के लिए जंगल से बाहर या लंबी दूरी तय न करनी पड़े। यदि उन्हें उनके प्राकृतिक आवास क्षेत्र में ही पानी मिल जाए, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना भी कम हो जाती है और जानवर सुरक्षित रहते हैं।
हर साल होता है वाटर बॉडी सर्वे..


गर्मी के चरम समय में हर वर्ष “वाटर बॉडी सर्वे” कराया जाता है। इस सर्वे के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी जलस्रोतों में पर्याप्त पानी बना रहे और जहां जरूरत हो, वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
मानसून तक की तैयारियों पर फोकस..
अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने वर्तमान जलस्थिति का आकलन करते हुए आगामी मानसून तक सभी जलस्रोतों में पानी बनाए रखने की विस्तृत योजना तैयार की है। इसमें टैंकर के माध्यम से पानी पहुंचाना, जलस्रोतों की गहराई बढ़ाना और नियमित रखरखाव जैसे उपाय शामिल हैं।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम..
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं न केवल वन्यजीवों के जीवन को सुरक्षित बनाती हैं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अचानकमार टाइगर रिजर्व का यह प्रयास वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल माना जा रहा है, जो आने वाले समय में अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।



