चिमनियों से धुआं, नालों में जहर : प्रदूषण ने बढ़ाई हजारों लोगों की चिंता..एनजीटी के नियम बेअसर ? सिलपहरी में प्रदूषण पर बढ़ता जनआक्रोश.. देखें वीडियो..

धुएं और राख के साए में सिलपहरी : औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण का बढ़ता संकट, ग्रामीणों ने की सख्त कार्रवाई की मांग..

बिलासपुर। जिले के सिलपहरी औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों की चिंता लगातार गहराती जा रही है। क्षेत्र में संचालित दो दर्जन के आसपास औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं, राख और प्रदूषित जल आसपास के गांवों के लिए गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का कारण बनता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाला काला धुआं दिन-रात वातावरण में फैल रहा है, जबकि राख के महीन कण घरों, खेतों और जलस्रोतों तक पहुंच रहे हैं। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

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ग्रामीणों का कहना है कि उद्योगों के विस्तार के साथ रोजगार तो बढ़ा, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। नतीजतन अब आसपास के गांवों में रहने वाले हजारों लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से शिकायत की, लेकिन स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ।

हवा में घुल रहा जहर, खेतों तक पहुंच रही राख..

ग्रामीणों के अनुसार फैक्ट्रियों से निकलने वाली राख और धूल हवा के साथ कई किलोमीटर दूर तक फैल जाती है। सुबह घरों की छतों, खिड़कियों और आंगनों पर राख की परत साफ दिखाई देती है। किसानों का कहना है कि यह राख फसलों की पत्तियों पर जमने लगी है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से श्वसन रोग, अस्थमा, एलर्जी और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर सबसे अधिक पड़ता है।

प्रदूषित पानी से बढ़ रही चिंता..

वायु प्रदूषण के साथ-साथ जल प्रदूषण भी क्षेत्र की बड़ी समस्या बनता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई उद्योगों से निकलने वाला अपशिष्ट जल नालों के माध्यम से बहकर गोकने क्षेत्र से होते हुए अरपा नदी में पहुंच रहा है। इस पानी में विभिन्न औद्योगिक रसायनों और अवशिष्ट पदार्थों के मिलने की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार गोकने नाला से बहने वाला यह दूषित पानी कोरमी, बसिया, बनाकडीह, नगपुरा, सिरगिट्टी और सिलपहरी सहित कई गांवों के आसपास के वातावरण को प्रभावित कर रहा है। नालों से उठने वाली दुर्गंध के कारण लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। पशुओं के स्वास्थ्य और भूजल की गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीणों में चिंता बढ़ रही है।

पर्यावरणीय नियमों के पालन पर उठ रहे सवाल..

पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत किसी भी उद्योग को स्थापना और संचालन से पहले आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करनी होती हैं। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए अत्याधुनिक उपकरण लगाना और निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन करना अनिवार्य है।

हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण संबंधी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं या उनका प्रभावी संचालन नहीं हो रहा है। इससे पर्यावरणीय मानकों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित और निष्पक्ष जांच हो तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

कागजों में निगरानी, जमीन पर असर नहीं..

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागों की निगरानी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित होकर रह गई है। समय-समय पर निरीक्षण और मॉनिटरिंग के दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को इसका असर दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और प्रदूषण मापदंडों की पारदर्शी जांच हो, तो कई समस्याओं का समाधान निकल सकता है।

सिलपहरी के अलावा जिले के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और राइस मिलों से भी समय-समय पर प्रदूषण संबंधी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में लोगों की अपेक्षा है कि प्रशासन प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अधिक सक्रिय भूमिका निभाए।

अरपा नदी पर भी मंडरा रहा खतरा..

पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि औद्योगिक अपशिष्ट जल का समुचित उपचार किए बिना उसे नालों और नदी में छोड़ा जाता है, तो इससे जल गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अरपा नदी पहले ही विभिन्न कारणों से प्रदूषण की चुनौती झेल रही है। ऐसे में औद्योगिक प्रदूषण की समस्या बढ़ने से नदी की पारिस्थितिकी और जलीय जैव विविधता पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में कृषि भूमि की उत्पादकता, भूजल की गुणवत्ता और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

ग्रामीणों की मांग : जांच और कठोर कार्रवाई..

क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित विभागों से सिलपहरी औद्योगिक क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि वायु और जल गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की जवाबदेही तय की जाए।

लोगों का कहना है कि विकास और उद्योग आवश्यक हैं, लेकिन पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की कीमत पर नहीं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सिलपहरी का बढ़ता प्रदूषण आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।