उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की त्वरित कार्रवाई से सफल रेस्क्यू, स्वास्थ्य परीक्षण के बाद प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा..

मैनपुर/गरियाबंद। वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां ग्रामीण युवाओं की सतर्कता और वन विभाग की तत्परता ने एक दुर्लभ पैंगोलिन की जान बचा ली। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के ग्राम नदीपारा (मैनपुर खुर्द) में दिखाई दिए इस दुर्लभ वन्यजीव को सुरक्षित रेस्क्यू कर वन विभाग की निगरानी में रखा गया है। स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक देखभाल के बाद इसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी की जा रही है।
जानकारी के अनुसार ग्राम नदीपारा में पुष्पराज पांडे, साधुराम पांडे, गेंदराज पांडे, नोहर पांडे और पूरन यादव के घर के समीप एक अनोखा जीव दिखाई दिया। ग्रामीणों ने पहचान की कोशिश की तो पता चला कि यह अत्यंत दुर्लभ पैंगोलिन है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए गांव के युवाओं ने बिना देर किए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों को सूचना दी।
सूचना मिलते ही कुल्हाड़ीघाट और तौरेंगा परिक्षेत्र की संयुक्त वन टीम मौके पर पहुंची। टीम ने बेहद सावधानी के साथ पैंगोलिन को सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसकी प्रारंभिक देखभाल शुरू की। वन अधिकारियों ने उसके लिए प्राकृतिक भोजन के रूप में दीमक और चींटियों की व्यवस्था भी की, क्योंकि पैंगोलिन मुख्य रूप से इन्हीं पर निर्भर रहता है।
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वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पैंगोलिन प्रकृति का एक अनोखा और बेहद संवेदनशील जीव है। इसकी संख्या लगातार घट रही है और यह दुनिया में सबसे ज्यादा तस्करी किए जाने वाले वन्यजीवों में शामिल है। इसके शल्कों (स्केल्स) की अवैध मांग के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी तस्करी की घटनाएं सामने आती रही हैं। यही वजह है कि इस प्रजाति का संरक्षण वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार पैंगोलिन जंगलों का प्राकृतिक सफाईकर्मी माना जाता है। यह बड़ी मात्रा में चींटियां और दीमक खाकर उनके अनियंत्रित प्रसार को रोकता है, जिससे वन पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित बना रहता है। एक स्वस्थ जंगल के लिए इसकी मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
वन विभाग ने इस घटना को ग्रामीण जागरूकता और वन्यजीव संरक्षण के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण बताया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि ग्रामीण समय पर सूचना नहीं देते तो यह दुर्लभ जीव किसी दुर्घटना, हमले या तस्करों के चंगुल का शिकार हो सकता था।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने ग्रामवासियों की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की सराहना करते हुए कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा केवल विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। स्थानीय समुदायों के सहयोग से ही दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण प्रभावी रूप से संभव है।
वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि जंगल या आबादी वाले क्षेत्रों में किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसे पकड़ने या परेशान करने का प्रयास न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम मौके पर पहुंचकर वन्यजीव की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।
इस सफल रेस्क्यू ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जागरूक नागरिक और सक्रिय वन अमला मिलकर जैव विविधता की अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।






