झीरम पर कांग्रेस के सवालों का सीएम साय ने दिया जवाब..

बोले – सबूत थे तो एनआईए को क्यों नहीं दिए, 13 साल चली जांच के बाद आया फैसला ; राजनीतिक बयानबाजी से सच नहीं बदलता..

रायपुर, 6 सितंबर। झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस द्वारा जांच पर उठाए जा रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पलटवार किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झीरम मामले की जांच एनआईए को उस समय सौंपी गई थी, जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी। करीब 13 वर्षों तक जांच और न्यायिक प्रक्रिया चली। इस दौरान 100 से अधिक गवाहों के बयान हुए और उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों की न्यायालय में जांच हुई। इसके बाद अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है, जबकि 16 सितंबर को उनकी सजा का निर्धारण होना है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को अब अदालत के फैसले के बाद एनआईए की जांच पर सवाल उठाने के बजाय यह बताना चाहिए कि उनके पास यदि कोई महत्वपूर्ण तथ्य या प्रमाण था तो उन्होंने जांच एजेंसी के सामने उसे क्यों नहीं रखा। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक मामले की जांच चली और कांग्रेस के पास तथ्य रखने के लिए पर्याप्त अवसर था।

सबूत जेब में थे तो जांच एजेंसी को क्यों नहीं दिए ?

मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए वे कहा करते थे कि झीरम मामले के सबूत उनकी जेब में हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि यदि वास्तव में उनके पास कोई सबूत था तो उसे एनआईए को क्यों नहीं सौंपा गया?

उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाने से किसी मामले की सच्चाई साबित नहीं होती। जांच और न्यायिक प्रक्रिया तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब फैसला आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी करना उन सवालों से बचने की कोशिश है, जिनका जवाब जांच के दौरान दिया जाना चाहिए था।

एनआईए देश की प्रमुख जांच एजेंसी..

सीएम साय ने कहा कि एनआईए किसी राज्य सरकार की जांच एजेंसी नहीं, बल्कि देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में से एक है। जब झीरम मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई थी, उस समय केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार थी। ऐसे में कांग्रेस नेताओं को यह भी बताना चाहिए कि उस समय जांच एजेंसी के सामने उन्होंने कौन-कौन से तथ्य रखे थे।

उन्होंने कहा कि करीब 13 वर्षों तक मामले की जांच चली। गवाहों के बयान दर्ज किए गए और न्यायालय ने पूरे मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपना फैसला सुनाया है। इसलिए न्यायालय के निर्णय पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को सामने रखना जरूरी है।

कांग्रेस पर ‘फूट डालो और राज करो’ की राजनीति का आरोप..

मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस के संगठन में प्रभारियों के बदलाव को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति आज भी अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति से प्रभावित है। जहां कांग्रेस जाती है, वहां गुटबाजी और आपसी खींचतान शुरू हो जाती है।

उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों पर ध्यान देने और संगठन को मजबूत करने के बजाय कांग्रेस के नेता आपसी राजनीतिक खींचतान में उलझे रहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने संगठन के भीतर चल रहे विवादों पर ध्यान देना चाहिए।

भूपेश बघेल के प्रभार परिवर्तन पर भी कटाक्ष..

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के संगठनात्मक प्रभार में बदलाव को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया गया था, तब वहां भी उनका विरोध सामने आया था। संभवत: इसी का परिणाम है कि अब उनका प्रभार दूसरे प्रदेश में कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के संगठन में लगातार सामने आ रहे विरोध और आपसी खींचतान से उसकी राजनीतिक कार्यसंस्कृति स्पष्ट होती है। हालांकि उन्होंने इसे कांग्रेस का आंतरिक मामला बताया, लेकिन कहा कि जनता सब कुछ देख रही है।

जनता को बयानबाजी नहीं, तथ्य चाहिए..

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि झीरम जैसे गंभीर मामले में राजनीति करने के बजाय सभी पक्षों को तथ्यों और प्रमाणों के साथ बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया राजनीतिक आरोपों से नहीं, बल्कि साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर चलती है।

उन्होंने कांग्रेस पर भ्रम की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को अच्छी तरह समझती है। जनता को केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि तथ्य और प्रमाण चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत का फैसला सामने आने के बाद अब राजनीतिक बयान देने के बजाय यह बताना चाहिए कि जिन सबूतों का दावा किया गया था, वे जांच एजेंसी के सामने क्यों नहीं रखे गए।