लोखंडी घाट पर कथित अवैध उत्खनन का आरोप, रोज दौड़ रहे रेत से भरे ट्रैक्टर ; ग्रामीण बोले – खुलेआम चल रहा कारोबार..

बिलासपुर। जिले के लोखंडी क्षेत्र में अरपा नदी से कथित अवैध रेत उत्खनन का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी में पानी कम होते ही रेत उत्खनन और परिवहन का काम तेजी से बढ़ गया है। स्थिति यह है कि रेत परिवहन के लिए नदी के भीतर ही अस्थायी रास्ता यानी रपटा तैयार किए जाने की बात सामने आ रही है। इसी रास्ते से ट्रैक्टर नदी तक पहुंचकर रेत लेकर लोखंडी, धुरीपारा और मंगला मार्ग से शहर की ओर निकल रहे हैं।
नदी के भीतर तैयार किया अस्थायी रास्ता..
ग्रामीणों के मुताबिक लोखंडी घाट का कुछ हिस्सा ऊंचा है, जबकि बारिश और बाढ़ के दौरान नदी के बहाव से किनारे पर कटाव भी हुआ है। इसके बाद कथित तौर पर रेत परिवहन के लिए नदी के भीतर अस्थायी रास्ता तैयार किया गया। आरोप है कि इसी रास्ते का इस्तेमाल रेत से भरे ट्रैक्टरों को नदी से बाहर निकालने के लिए किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह से लेकर दिनभर इस क्षेत्र में ट्रैक्टरों की आवाजाही देखी जा सकती है। इससे न केवल नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर असर पड़ने की आशंका है, बल्कि गांव की सड़कों पर भी भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है।
पानी घटा तो बढ़ गया रेत का कारोबार?
ग्रामीणों का दावा है कि अरपा नदी में जलस्तर कम होने के बाद रेत निकालने का काम तेजी से बढ़ा है। उनका आरोप है कि नदी के जिन हिस्सों से रेत निकाली जा रही है, वहां लगातार खुदाई की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में वैध खनन हो रहा है तो संबंधित विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किस स्थान से कितनी मात्रा में रेत निकालने की अनुमति है और परिवहन के लिए किन रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं यदि बिना अनुमति रेत निकाली जा रही है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, यह बड़ा सवाल है।
कार्रवाई नहीं होने पर उठ रहे सवाल..
सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक निगरानी को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब नदी घाट क्षेत्र से लगातार ट्रैक्टरों की आवाजाही हो रही है तो संबंधित विभाग की नजर इस गतिविधि पर क्यों नहीं पड़ रही? क्या क्षेत्र में नियमित जांच और निगरानी की व्यवस्था है? यदि जांच की जा रही है तो अब तक कितने वाहनों और कितने मामलों में कार्रवाई हुई है?
कुछ ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर भी मामले की जानकारी होने का दावा करते हुए संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की जांच की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पंचायत प्रतिनिधियों तथा खनिज विभाग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रपटा बना तो पर्यावरण का भी सवाल..
अरपा नदी में अस्थायी रास्ता बनाए जाने की बात सामने आने के बाद मामला केवल अवैध रेत उत्खनन तक सीमित नहीं रह जाता। नदी के बहाव क्षेत्र में इस तरह का निर्माण और लगातार भारी वाहनों की आवाजाही नदी के प्राकृतिक प्रवाह, तटों और पर्यावरण पर कितना असर डाल रही है, इसकी भी जांच जरूरी है।
ग्रामीणों का कहना है कि रेत का अनियंत्रित उत्खनन लंबे समय में नदी के स्वरूप को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में केवल ट्रैक्टर पकड़ने के बजाय नदी घाट की स्थिति, उत्खनन की मात्रा और अस्थायी रास्ते के निर्माण की भी जांच की जानी चाहिए।
प्रशासन और खनिज विभाग से जांच की मांग..
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग से लोखंडी घाट का मौके पर निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नदी में बनाए गए कथित रपटा, रेत उत्खनन के स्थान और ट्रैक्टरों की आवाजाही की जांच की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि वहां रेत उत्खनन के लिए किसी तरह की अनुमति जारी की गई है या नहीं। यदि उत्खनन अवैध पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

फिलहाल लोखंडी घाट पर कथित अवैध रेत उत्खनन के आरोपों ने प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि खनिज विभाग मौके पर जांच करता है या नहीं और जांच के बाद अरपा नदी में चल रहे इस कथित रेत कारोबार की वास्तविक तस्वीर सामने आती है।
इस खबर के संबंध में खनिज विभाग एवं जिला प्रशासन का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया। विभाग की ओर से जवाब मिलने के बाद उसे खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।







