उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाने का आरोप..

गरियाबंद/धमतरी।उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में आरक्षित वनभूमि पर अवैध कब्जा कर खेती करने की कोशिश को वन विभाग ने समय रहते विफल कर दिया। रिसगांव परिक्षेत्र के गाताबाहरा परिसर स्थित कक्ष क्रमांक 158 में सात लोगों द्वारा सैकड़ों हरे-भरे वृक्षों को बधियाकर (गर्डलिंग) वनभूमि को कृषि भूमि में बदलने की कोशिश की जा रही थी। मामले का खुलासा होने के बाद वन विभाग ने सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण एवं भारतीय वन अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार, उपनिदेशक उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के 15 जुलाई 2026 के क्षेत्रीय निरीक्षण के दौरान सीतानदी अभयारण्य के रिसगांव परिक्षेत्र अंतर्गत गाताबाहरा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वनभूमि पर अतिक्रमण के संकेत मिले। जांच में पाया गया कि आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 158 में खड़े 132 नग साल, बीजा एवं अन्य प्रजातियों के जीवित वृक्षों को टंगिया से गर्डलिंग कर धीरे-धीरे सुखाने का प्रयास किया गया था। इसके बाद लगभग 4.129 हेक्टेयर वनभूमि को जोतकर वहां मक्का की बोआई भी कर दी गई थी।
वन अधिकारियों के अनुसार, गर्डलिंग ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पेड़ के तने की बाहरी परत काट दी जाती है, जिससे कुछ समय बाद पेड़ सूख जाता है। इस तरीके का उपयोग अक्सर वनभूमि को साफ कर खेती या कब्जे के लिए किया जाता है। मामले में यह भी पाया गया कि उक्त गतिविधियों से न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंचा, बल्कि टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और पर्यावरणीय संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका थी।
जांच के बाद ग्राम गाताबाहरा निवासी समारू कमार, मयाराम कमार, श्रवण गोंड़, डोमार गोंड़, राजेंद्र गोंड़, राजू गोंड़ और सरजू गोंड़ को आरोपी बनाया गया। सभी आरोपी धमतरी जिले के नगरी तहसील क्षेत्र के निवासी हैं।

वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 27, 29, 31, 50, 51 एवं 52 तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 के विभिन्न प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज किया। पीओआर क्रमांक 26/627 दिनांक 17 जुलाई 2026 के तहत दर्ज मामले में आरोपियों को 20 जुलाई को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, नगरी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के बाद सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल धमतरी भेज दिया गया।


वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, वृक्षों की अवैध कटाई या वनभूमि को खेती योग्य भूमि में परिवर्तित करने का प्रयास गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस कार्रवाई में रिसगांव परिक्षेत्र अधिकारी चन्द्रबली ध्रुव, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी बैकुण्ठ सिंह ठाकुर, वनपाल सोमनाथ पाड़े, वनरक्षक लिलेश्वर, गिरधर दीवान, भोजराज नेताम, पेवनलाल ध्रुव, वन चौकीदार दीनानाथ यादव तथा पेट्रोलिंग दल के श्रमिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विशेष : उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में हाल के वर्षों में अवैध अतिक्रमण और जंगल को कृषि भूमि में बदलने के प्रयासों पर वन विभाग लगातार निगरानी बढ़ा रहा है। इस ताजा कार्रवाई को टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।







