13 साल बाद अदालत का फैसला आया, लेकिन पीड़ित पक्ष के सवाल कायम ; विवेक वाजपेयी ने NIA जांच पर उठाए गंभीर सवाल..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे दर्दनाक राजनीतिक हत्याकांडों में शामिल झीरम घाटी मामले में 13 साल बाद अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। जगदलपुर स्थित विशेष NIA अदालत ने शनिवार को दो महिलाओं समेत सभी 10 आरोपियों को दोषी माना। अदालत अब 16 सितंबर को दोषियों की सजा की अवधि पर फैसला सुनाएगी।


अदालत के इस फैसले को झीरम मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव माना जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर पीड़ित पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया है कि क्या केवल 10 लोगों की दोषसिद्धि से झीरम की पूरी सच्चाई सामने आ गई है? कांग्रेस नेता और झीरम हमले के पीड़ित विवेक वाजपेयी ने NIA की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि अदालत में दोषसिद्धि हुई है, लेकिन असली साजिश तक पहुंचने की लड़ाई अभी बाकी है।
दोषी कौन हैं के साथ साजिश के पीछे कौन था का सवाल..
वाजपेयी का कहना है कि झीरम केवल एक नक्सली हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे बड़ी साजिश की आशंका को भी जांच के दायरे में रखा जाना चाहिए था। उनका आरोप है कि NIA की जांच उस व्यापक साजिश तक नहीं पहुंच सकी, जिसके बारे में पीड़ित लंबे समय से सवाल उठाते रहे हैं।
बाइट – विवेक बाजपेयी
उन्होंने जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोगों को आरोपी बनाया गया, जबकि कई अन्य संदिग्ध भूमिकाओं और संभावित साजिशकर्ताओं को जांच में पर्याप्त महत्व नहीं मिला। हालांकि ये आरोप वाजपेयी के हैं और अदालत के विस्तृत फैसले में जांच तथा साक्ष्यों को लेकर क्या निष्कर्ष निकाला गया है, यह उसके विस्तृत आदेश से ही स्पष्ट होगा।
पीड़ित बोले – हमारी बात जांच में नहीं सुनी गई..
विवेक वाजपेयी का दावा है कि उन्होंने झीरम घटना को लेकर अपनी जानकारी विशेष न्यायिक जांच आयोग के समक्ष दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि NIA की जांच के दौरान उन्हें अपेक्षित तरीके से शामिल नहीं किया गया और उनका बयान भी दर्ज नहीं किया गया।
उनका कहना है कि वह स्वयं झीरम हमले में घायल हुए पीड़ितों में शामिल हैं और घटना के संबंध में उनके पास महत्वपूर्ण जानकारी थी। ऐसे में उनका सवाल है कि यदि पीड़ितों के बयान और उनके अनुभव को जांच का हिस्सा बनाया जाता तो क्या मामले की तस्वीर कुछ और होती?
101 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला..
झीरम मामले की सुनवाई लंबी चली और अदालत में कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित करने की कोशिश की। अंततः अदालत ने चार्जशीट में आरोपी बनाए गए सभी 10 लोगों को दोषी माना। बचाव पक्ष ने फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही है। यानी न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो चुका है, लेकिन मामले की कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
13 साल बाद भी झीरम का सवाल राजनीतिक स्मृति में जिंदा..
25 मई 2013 को दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कांग्रेस नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों सहित 29 लोगों की मौत हुई थी।
बाइट – दीपक बैज, प्रदेश अध्यक्ष – छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी
हमले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया था। कांग्रेस नेतृत्व की पूरी एक पीढ़ी इस हमले में खत्म हो गई। इसलिए झीरम केवल एक आपराधिक या नक्सली हिंसा का मामला नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसकी पूरी सच्चाई सामने आने की मांग लगातार उठती रही है।
फैसले के बाद अब असली सवालों पर नजर..
अदालत के फैसले के बाद अब तीन महत्वपूर्ण सवाल राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में हैं – क्या दोषी ठहराए गए 10 लोगों की भूमिका से झीरम की पूरी साजिश स्पष्ट होती है? क्या जांच में सामने आए सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की पर्याप्त पड़ताल हुई? और क्या पीड़ित परिवारों को इस फैसले से वह संतोष मिलेगा जिसका वे 13 साल से इंतजार कर रहे हैं?
इन सवालों के जवाब अदालत के विस्तृत फैसले, आगे की न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध जांच रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होंगे।
विवेक वाजपेयी का कहना है कि वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुके हैं और उनकी न्याय की लड़ाई जारी रहेगी। इस तरह 10 आरोपियों की दोषसिद्धि के बावजूद झीरम की बहस खत्म नहीं हुई है, बल्कि अब उसका केंद्र ‘दोषियों को सजा’ से आगे बढ़कर ‘क्या पूरी साजिश सामने आई?’ पर आ गया है।

13 साल बाद आया फैसला पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम जरूर है, लेकिन झीरम के पीड़ितों के मन में उठ रहे बड़े सवालों का अंतिम जवाब तभी माना जाएगा, जब घटना से जुड़े सभी अनुत्तरित पहलुओं पर भी स्पष्टता सामने आए।







