टेंडर खुला, फिर भी पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को बढ़ाने की तैयारी, CGMSCL की आयुर्वेदिक दवा खरीदी पर उठे सवाल..

17 महीने बाद पुराने टेंडर रद्द, 22 जून को नए टेंडर जारी; 14 जुलाई को बिड की समय-सीमा खत्म होने के बाद Cover-A खुला, फिर 2022 के रेट कॉन्ट्रैक्ट के विस्तार के लिए फर्मों से मांगी गई सहमति..

रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) में आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी के लिए चल रही टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामला पुराने टेंडर के लंबे समय तक लंबित रहने, करीब 17 महीने बाद उसे निरस्त किए जाने और नए टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट (RC) को फिर से छह महीने बढ़ाने की कवायद से जुड़ा है।

इस संबंध में गिरीश अग्रवाल ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को शिकायत देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत में टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने, प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ने और शासन को संभावित आर्थिक नुकसान की आशंका जताई गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।

20 जनवरी 2025 को जारी टेंडर, 22 जून 2026 को निरस्त..

दस्तावेजों के अनुसार CGMSCL ने आयुष की दवाओं के रेट कॉन्ट्रैक्ट के लिए Tender Ref. No. 10/Ayur-Classical/CGMSCL/Drugs/2024-25 और 11/Ayur-Classical/CGMSCL/Drugs/2024-25 जारी किए थे। उपलब्ध टेंडर दस्तावेजों में इनकी अपलोड तारीख 20 जनवरी 2025 दर्ज है।

इसके बाद CGMSCL ने 22 जून 2026 को अलग-अलग नोटिस जारी कर दोनों टेंडर को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। निरस्तीकरण का कारण केवल ‘technical reasons’ बताया गया है। दस्तावेजों में किसी विस्तृत तकनीकी कारण का उल्लेख नहीं है। यही बिंदु अब जांच की मांग का प्रमुख आधार बन गया है।

पुराने RC की अवधि बढ़ाने पर भी सवाल..

शिकायत के मुताबिक संबंधित पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट की मूल अवधि 18 महीने थी। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने के दौरान पुराने RC को पहले छह महीने के लिए बढ़ाया गया और इस अवधि में दवाओं की आपूर्ति जारी रही।

अब नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद एक बार फिर पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को छह महीने बढ़ाने की प्रक्रिया सामने आई है। यही वह बिंदु है जहां सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि जब नई निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, तो पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट के विस्तार की जरूरत क्यों पड़ी?

22 जून को नए टेंडर, 14 जुलाई को बिड की अंतिम तारीख..

पुराने टेंडर निरस्त किए जाने के दिन यानी 22 जून 2026 को CGMSCL ने आयुर्वेदिक दवाओं के लिए Tender No. 10, 11, 12 और 13/Ayur-Classical दोबारा जारी किए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन टेंडरों में बिड जमा करने की अंतिम तारीख 14 जुलाई 2026 थी।

शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्धारित तारीख बीतने के बाद टेंडर की Cover-A प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है और दावा-आपत्ति से संबंधित प्रक्रिया भी हो चुकी है। ऐसे में पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा छह महीने बढ़ाने का औचित्य जांच का विषय बन गया है।

7 अगस्त के पत्र ने बढ़ाई हलचल..

मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज CGMSCL के तकनीकी शाखा का 7 अगस्त 2026 का पत्र है। पत्र क्रमांक 4483/CGMSCL/तकनीकी/2026 में पूर्व के आयुर्वेदिक दवा रेट कॉन्ट्रैक्ट का उल्लेख करते हुए संबंधित फर्म से पूछा गया है कि यदि कॉर्पोरेशन आवश्यकता के आधार पर दर अनुबंध का विस्तार करता है तो क्या फर्म पूर्व में प्रदाय की गई दर पर ही आगे आपूर्ति करने के लिए सहमत है।

पत्र में दो दिन के भीतर सहमति पत्र देने को कहा गया है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। पत्र में यह भी उल्लेख है कि कार्रवाई प्रबंध संचालक के निर्देश पर की जा रही है।

यहीं से पूरा मामला और गंभीर हो जाता है। एक ओर नए टेंडर की बिड प्रक्रिया पूरी होकर Cover-A खुल चुका है, दूसरी ओर पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित फर्म से सहमति मांगी जा रही है। सवाल यह है कि नए टेंडर का परिणाम आने से पहले पुराने अनुबंध को बढ़ाने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?

क्या नई प्रतिस्पर्धा पर पड़ेगा असर?

शिकायत में आशंका जताई गई है कि यदि पुराना रेट कॉन्ट्रैक्ट आगे बढ़ाया जाता है तो नई निविदा में भाग लेने वाली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, यदि पुरानी दरें बाजार की मौजूदा दरों की तुलना में अधिक हैं तो शासन पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।हालांकि, वास्तविक आर्थिक नुकसान हुआ है या नहीं, यह संबंधित दस्तावेजों, पुराने और नए रेट, खरीदी की मात्रा तथा टेंडर मूल्यांकन की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

‘टेंडर एक सप्ताह में पूरा हो सकता है तो RC विस्तार क्यों?’

शिकायतकर्ता का तर्क है कि नए टेंडर की प्रक्रिया पहले ही काफी आगे बढ़ चुकी है। ऐसे में यदि तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन नियमानुसार शीघ्र पूरा किया जा सकता है, तो पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को छह महीने बढ़ाने का निर्णय सवालों के घेरे में आता है।

इसी आधार पर स्वास्थ्य मंत्री से मांग की गई है कि यह जांच की जाए कि पुराने RC के विस्तार की वास्तविक आवश्यकता क्या थी, क्या नई निविदा प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचा गया और क्या किसी फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए प्रक्रिया प्रभावित हुई।

मिलीभगत के आरोप, लेकिन जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी..

शिकायत में अधिकारियों और संबंधित फर्म के बीच कथित मिलीभगत तथा प्रभाव के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप हैं। इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।

मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि CGMSCL यह स्पष्ट करे कि पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट की मूल अवधि कब समाप्त हुई, अब तक कितनी बार और किन नियमों के तहत उसका विस्तार किया गया, उस दौरान कितनी दवाओं की खरीदी हुई और नए टेंडर के बावजूद फिर विस्तार की आवश्यकता क्यों पड़ी।

स्वास्थ्य विभाग और CGMSCL के सामने अब ये बड़े सवाल..

पुराने टेंडर करीब 17 महीने बाद निरस्त करने की वजह क्या थी?

दोनों टेंडर को सिर्फ ‘तकनीकी कारणों’ से निरस्त करने का विस्तृत आधार क्या था?

पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट का पहले विस्तार किन परिस्थितियों में किया गया?

नए टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद फिर छह महीने का विस्तार क्यों?

14 जुलाई को बिड की अंतिम तारीख समाप्त होने और Cover-A खुलने के बाद RC विस्तार का औचित्य क्या है?

क्या पुराने और नए रेट की तुलना की गई है?

क्या RC विस्तार से शासन को आर्थिक नुकसान की संभावना है?

क्या सभी पात्र फर्मों को समान अवसर मिल रहा है?

क्या टेंडर प्रक्रिया में किसी फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास हुआ?

जांच से ही सामने आएगा सच..

अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और CGMSCL की ओर हैं कि वह इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाती है। दस्तावेजों में सामने आया घटनाक्रम निश्चित रूप से यह सवाल खड़ा करता है कि जब नई निविदा प्रक्रिया चल रही हो, तब पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को फिर बढ़ाने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?

आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी सीधे तौर पर बड़ी सरकारी खरीद प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और वित्तीय अनुशासन बेहद महत्वपूर्ण है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जब तक पूरे मामले की जांच पूरी न हो, तब तक पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट के विस्तार पर रोक लगाई जाए और यदि किसी अधिकारी या संबंधित व्यक्ति की भूमिका नियमविरुद्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।