
कोरबा वनमंडल के अधिकारियों-कर्मचारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण; ग्रामीणों से नियमित संवाद, वन प्रबंधन समितियों की बैठक और वैज्ञानिक तरीके से वानिकी कार्य कराने पर जोर..

कोरबा। हाथियों की मौजूदगी वाले वन क्षेत्रों में मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं को कम करने और वन संरक्षण के कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित करने के उद्देश्य से कोरबा वनमंडल के क्षेत्रीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में हाथियों की गतिविधियों के दौरान सतर्कता बरतने, प्रभावित ग्रामीणों से नियमित संवाद बनाए रखने, फसल क्षति का मुआवजा समय पर दिलाने की प्रक्रिया तथा वन क्षेत्रों में कराए जाने वाले वानिकी कार्यों को निर्धारित कार्य आयोजना के अनुरूप संपन्न कराने की जानकारी दी गई।

वनमंडलाधिकारी जितेन्द्र कुमार उपाध्याय (भा.व.से.) के आदेशानुसार आयोजित इस प्रशिक्षण में उपवनमंडलाधिकारी उत्तर कोरबा रामसिंह राठिया और उपवनमंडलाधिकारी दक्षिण कोरबा मणीकांत वर्मा उपस्थित रहे। सेवानिवृत्त मुख्य वन संरक्षक बी.पी. सिंह ने प्रशिक्षक के रूप में अधिकारियों-कर्मचारियों को विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
ग्रामीणों से नियमित संवाद पर जोर..

प्रशिक्षण के दौरान हाथी-मानव द्वंद्व को रोकने के लिए वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। बी.पी. सिंह ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वन क्षेत्र में आने वाले गांवों और टोलों के साथ-साथ वन प्रबंधन समितियों की नियमित बैठकें आयोजित की जाएं।

बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों को शासन से समय-समय पर प्राप्त होने वाले दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जाए, ताकि हाथियों की मौजूदगी और उनसे जुड़ी परिस्थितियों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके। ग्रामीणों के साथ निरंतर संपर्क और सूचनाओं के आदान-प्रदान को हाथी-मानव द्वंद्व की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
फसल क्षति के मुआवजे की प्रक्रिया समझाई..
प्रशिक्षण में हाथियों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने की स्थिति में प्रभावित ग्रामीणों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया पर भी जानकारी दी गई। अधिकारियों-कर्मचारियों को बताया गया कि फसल क्षति से संबंधित आवश्यक पत्राचार और विभागीय प्रक्रिया समय पर पूरी की जानी चाहिए, ताकि प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा मिलने में अनावश्यक देरी न हो।
प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि हाथियों से होने वाली फसल क्षति के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई और ग्रामीणों के साथ संवाद बनाए रखने से प्रभावित लोगों की समस्याओं का निराकरण करने में मदद मिलेगी। इससे मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के प्रयासों को भी मजबूती मिल सकती है।
कार्य आयोजना के अनुरूप होंगे वानिकी कार्य..
प्रशिक्षण का दूसरा प्रमुख हिस्सा वन क्षेत्रों में कराए जाने वाले वानिकी कार्यों से संबंधित रहा। सेवानिवृत्त मुख्य वन संरक्षक बी.पी. सिंह ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वन विभाग की कार्य आयोजना में दिए गए निर्देशों का अध्ययन कर नियमानुसार कार्य कराने की जानकारी दी।
इस दौरान सर्वेक्षण एवं सीमांकन, ग्रिड पॉइंट सर्वे, सीबीओ कार्य, एकलीकरण कार्य, वृक्षारोपण, सीड बॉल तथा एएनआर के अंतर्गत बीज बुआई जैसे कार्यों के बारे में विस्तार से बताया गया। कर्मचारियों को इन कार्यों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा करने और वन क्षेत्रों में पुनरोत्पादन को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई।
भू-जल संरक्षण और वन पुनरोत्पादन पर भी चर्चा..
वन क्षेत्रों में जल संरक्षण और प्राकृतिक पुनरोत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किए जाने वाले कार्यों को भी प्रशिक्षण में शामिल किया गया। इसके तहत ब्रशवुड निर्माण, बोल्डर चेकडेम, एससीटी और गैबियन निर्माण जैसे कार्यों की प्रक्रिया समझाई गई।

प्रशिक्षण में बताया गया कि इन कार्यों को निर्धारित तकनीकी मापदंडों और कार्य आयोजना के अनुरूप कराना जरूरी है। वन क्षेत्रों में मिट्टी एवं जल संरक्षण के उपायों के साथ पुनरोत्पादन से जुड़े कार्यों को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने पर भी जोर दिया गया।
सात परिक्षेत्रों के अधिकारी-कर्मचारी हुए शामिल..
प्रशिक्षण में कोरबा, बालको, लेमरू, कुदमुरा, करतला, पसरखेत और कुदमुरा उत्पादन परिक्षेत्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण को प्रश्नोत्तरी के रूप में भी आयोजित किया गया, जिससे उपस्थित अधिकारी-कर्मचारियों को विषयों से संबंधित जानकारी समझने और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान करने का अवसर मिला।

प्रशिक्षण के बाद उपवनमंडलाधिकारी उत्तर कोरबा रामसिंह राठिया एवं उपवनमंडलाधिकारी दक्षिण कोरबा मणीकांत वर्मा ने कर्मचारियों को कार्य आयोजना में दिए गए निर्देशों का अध्ययन करने और विभागीय व वानिकी कार्यों को नियमानुसार संपन्न कराने के निर्देश दिए।

वन विभाग के इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मैदानी अमले की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ वन संरक्षण, ग्रामीणों के साथ समन्वय और हाथी-मानव द्वंद्व की रोकथाम से जुड़े प्रयासों को अधिक व्यवस्थित बनाना रहा।






