धरमजयगढ़ के पुरुषोत्तम ठेठवार को मिला ‘छत्तीसगढ़ी छंद रतन सम्मान’, साहित्य जगत में बढ़ाया क्षेत्र का मान..

छंद, गीत और साहित्य साधना के लिए रायपुर में हुआ सम्मान, चौथी कृति ‘रोला रंग’ का भी हुआ विमोचन..

धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ वन मंडल में कार्यरत छत्तीसगढ़ी साहित्यकार, छंदकार एवं गीतकार पुरुषोत्तम ठेठवार को उनकी साहित्यिक साधना और छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए “छत्तीसगढ़ी छंद रतन सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान रविवार 10 मई 2026 को रायपुर स्थित वृंदावन हॉल में आयोजित “छंद के छ” स्थापना दिवस समारोह में प्रदान किया गया।

समारोह में प्रदेशभर से पहुंचे साहित्यकारों और छंद प्रेमियों की उपस्थिति में पुरुषोत्तम ठेठवार को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, सीवी रमन कॉलेज कोटा बिलासपुर के प्रोफेसर अशोक तिवारी, कल्याण कॉलेज रायपुर के डॉ. सुधीर शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार सरला शर्मा, “छंद के छ” के संस्थापक एवं छंदविद् अरुण कुमार निगम तथा साहित्यकार सपना निगम उपस्थित रहे।

इस अवसर पर पुरुषोत्तम ठेठवार की चौथी कृति “रोला रंग” छत्तीसगढ़ी रोला छंद संग्रह का भी भव्य विमोचन करतल ध्वनि और साहित्यिक उत्साह के बीच किया गया। उनकी यह नई पुस्तक छत्तीसगढ़ी छंद साहित्य को नई दिशा देने वाली कृति मानी जा रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी पुरुषोत्तम ठेठवार की तीन महत्वपूर्ण कृतियां साहित्य जगत में सराही जा चुकी हैं। इनमें “श्रीमद् भगवद् गीता” का छत्तीसगढ़ी भावानुवाद, “छप्यय छंद छानी” तथा “जंगल मंगल धाम” शामिल हैं। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोकभाषा और परंपरा की गहरी झलक दिखाई देती है।

पुरुषोत्तम ठेठवार को मिले इस सम्मान पर धरमजयगढ़ वन मंडल में भी हर्ष का वातावरण है।वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय, उप वन मंडलाधिकारी एस.डी. दीवान, संयुक्त वनमंडलाधिकारी एम.एल. सिदार सहित वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में पुरुषोत्तम ठेठवार की यह उपलब्धि न केवल धरमजयगढ़ बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।