धर्मशाला में होने वाला था हाथीदांत का सौदा, वन विभाग की दबिश में तीन तस्कर गिरफ्तार..

संयुक्त टीम ने कमरे से तीन हाथीदांत बरामद किए, झारखंड और छत्तीसगढ़ के आरोपी न्यायिक हिरासत में; वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की जांच तेज..

बलरामपुर-रामानुजगंज।छत्तीसगढ़ में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। रामानुजगंज की एक धर्मशाला में हाथीदांत की तस्करी का सौदा होने की सूचना पर संयुक्त टीम ने छापेमार कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान कमरे से हाथी के जबड़े के तीन हाथीदांत बरामद किए गए। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशन में प्रदेशभर में संगठित वन अपराध और वन्यजीव तस्करी पर लगातार सख्ती बरती जा रही है। इसी अभियान के तहत वन मंडलाधिकारी आलोक वाजपेयी के मार्गदर्शन में 3 अगस्त को वन विभाग ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (मध्य क्षेत्र, भोपाल), राज्य उड़न दस्ता रायपुर और वनमंडल बलरामपुर की संयुक्त टीम के साथ कार्रवाई की।

मुखबिर से सूचना मिली थी कि रामानुजगंज स्थित आमंत्रण धर्मशाला में कुछ लोग हाथीदांत के अवैध सौदे की तैयारी कर रहे हैं। सूचना मिलते ही संयुक्त टीम ने धर्मशाला के कमरा नंबर 205 में दबिश दी। तलाशी के दौरान कमरे में रखे एक बैग से हाथी के जबड़े के तीन हाथीदांत बरामद हुए। मौके पर मौजूद तीन संदिग्धों को तत्काल हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संतोष कुमार विश्वकर्मा (42 वर्ष), निवासी पलामू, झारखंड, अजय कुमार गुप्ता (49 वर्ष) तथा सतेन्द्र कुमार (50 वर्ष), निवासी बलरामपुर-रामानुजगंज के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ के बाद तीनों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भारतीय जंगली हाथी अनुसूची-1 के तहत संरक्षित वन्यजीव है। ऐसे में हाथीदांत का अवैध व्यापार गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और इसमें कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

जब्त किए गए हाथीदांत को वन विभाग ने अपने कब्जे में लेकर तीनों आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामानुजगंज की अदालत में पेश किया। अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

वनमंडलाधिकारी ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। यह पता लगाया जा रहा है कि जब्त हाथीदांत कहां से लाए गए थे, इन्हें किसे बेचने की तैयारी थी और इस तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसके लिए आरोपियों से पूछताछ के साथ अन्य तकनीकी और खुफिया साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं।

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में वन्यजीवों की तस्करी, शिकार और अवैध व्यापार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। विभाग का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण के लिए ऐसे अपराधों के खिलाफ आगे भी लगातार अभियान चलाया जाएगा और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।