रायपुर। खैरागढ़ जनपद पंचायत में वर्ष 2007-08 में संपन्न हुई शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की भर्ती प्रक्रिया में बरती गई अनियमितताओं पर ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) ने राजनांदगांव के विशेष न्यायालय में अपना चालान प्रस्तुत कर दिया है। लगभग 18 साल पुराने इस प्रकरण में जांच एजेंसी ने 1500 पन्नों का विस्तृत आरोप पत्र तैयार किया है। इस आरोप पत्र में आवेदनों की जांच करने वाली तत्कालीन स्क्रीनिंग कमेटी के दो सदस्यों और 36 ऐसे अभ्यर्थियों को आरोपी बनाया गया है, जिनका चयन गलत दस्तावेजों के आधार पर हुआ था।

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007-08 में खैरागढ़ जनपद क्षेत्र के अंतर्गत शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के कुल 135 पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। प्राप्त आवेदनों के परीक्षण और पात्र-अपात्र उम्मीदवारों का निर्धारण करने के लिए एक चार सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया गया था। इस संपूर्ण प्रक्रिया के बाद कुल 123 अभ्यर्थियों को चयनित करते हुए उन्हें नियुक्ति प्रदान की गई थी।
नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद ईओडब्ल्यू को यह शिकायत मिली थी कि चयनित 123 अभ्यर्थियों में से 89 लोगों ने नौकरी प्राप्त करने के लिए खेलकूद, एनसीसी, शैक्षणिक योग्यता और पूर्व कार्य अनुभव के जाली व कूट रचित प्रमाणपत्र जमा किए थे। इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए जांच एजेंसी ने अपराध क्रमांक 55/2009 के तहत भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 (1) (डी) सहपठित 13 (2) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया था।
ब्यूरो द्वारा की गई विभागीय जांच में अब तक 89 में से 39 चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का परीक्षण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। जांच दल ने पाया कि इन 39 उम्मीदवारों में से 36 के दस्तावेज पूरी तरह से फर्जी और कूट रचित थे। अन्वेषण में यह तथ्य भी प्रमाणित हुआ कि स्क्रीनिंग कमेटी में पदस्थ तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ प्रकाश मेश्राम और तत्कालीन बीईओ टीकाराम साहू ने अपने अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग किया।
इन दोनों तत्कालीन अधिकारियों ने संबंधित अभ्यर्थियों के साथ मिलीभगत करके उनके फर्जी दस्तावेजों का विभागीय स्तर पर कोई सत्यापन नहीं कराया। जाली प्रमाणपत्रों को ही असली मानकर इन उम्मीदवारों को अंक प्रदान कर दिए गए, जिससे वे मेरिट सूची में स्थान बनाने में सफल रहे। ईओडब्ल्यू ने इन दोनों अधिकारियों को मुख्य रूप से जिम्मेदार मानते हुए 36 अभ्यर्थियों के साथ विशेष न्यायालय में पेश किए गए 1500 पन्नों के चालान में शामिल किया है।
इस प्रकरण में नामजद आरोपियों में से तीन व्यक्तियों का निधन हो चुका है। अतः जांच एजेंसी ने विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए इन तीन मृत आरोपियों के विरुद्ध आरोप समाप्त करने के लिए न्यायालय में एक अलग प्रतिवेदन सौंपा है। ईओडब्ल्यू के अनुसार, सूची में शामिल शेष चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण अभी भी किया जा रहा है। प्रकरण के अन्य पहलुओं पर जांच निरंतर जारी है, जिसके पूर्ण होने के पश्चात आगे की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।







