तीन दशक बाद इंद्रावती टाइगर रिजर्व के जंगलों के खुले द्वार, अब पर्यटक कर सकेंगे बाघों और जैव विविधता का दीदार.. देखें वीडियो..

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पर्यटन की नई शुरुआत, 2 हजार रुपये में 6 पर्यटकों को मिलेगी 45 मिनट की जंगल सफारी; संरक्षण और स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा..

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के घने जंगलों में छिपी प्राकृतिक सुंदरता अब देश-दुनिया के पर्यटकों के सामने आने को तैयार है। करीब तीन दशक तक नक्सलवाद के प्रभाव के कारण आम लोगों की पहुंच से दूर रहे इंद्रावती टाइगर रिजर्व में रविवार को जंगल सफारी की शुरुआत हो गई। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर हुई यह पहल इंद्रावती के पर्यटन इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है। अब पर्यटक यहां के विस्तृत जंगलों, घास के मैदानों, वन्यजीवों और समृद्ध जैव विविधता को उनके प्राकृतिक आवास में करीब से देख सकेंगे।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी का शुभारंभ केवल पर्यटन सुविधा शुरू करने तक सीमित नहीं है। यह बस्तर के उस प्राकृतिक संसार को सामने लाने की पहल है, जो लंबे समय तक सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण आम लोगों से दूर रहा। जंगल सफारी शुरू होने से क्षेत्र में प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही वन्यजीव संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और रोजगार के नए अवसरों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में इस पहल को जमीन पर उतारा गया। वन मंत्री केदार कश्यप ने रायपुर से बटन दबाकर ऑनलाइन जंगल सफारी का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान इंद्रावती टाइगर रिजर्व की जंगल सफारी पर आधारित विशेष वीडियो भी प्रदर्शित किया गया। इसमें क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, जैव विविधता, वन्यप्राणियों और पर्यटन की संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से पर्यटन के नए केंद्र तक..

बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में शामिल है। यहां का विशाल वन क्षेत्र, प्राकृतिक घासभूमियां, विविध वनस्पतियां और वन्यजीव इसे विशिष्ट पहचान देते हैं। लेकिन लंबे समय तक नक्सलवाद के प्रभाव के कारण यह क्षेत्र सामान्य पर्यटन गतिविधियों से दूर रहा।

अब जंगल सफारी की शुरुआत के साथ इंद्रावती के जंगलों को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। यह पहल ऐसे समय में हुई है, जब बस्तर की प्राकृतिक धरोहर और पर्यटन संभावनाओं को सामने लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जंगल सफारी के माध्यम से पर्यटक न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे, बल्कि वन्यजीवों और उनके संरक्षण के महत्व को भी समझ सकेंगे।

इंद्रावती की खासियत यह है कि यहां पर्यटन का अनुभव सामान्य दर्शनीय स्थलों से अलग होगा। घने जंगलों के बीच से गुजरती सफारी पर्यटकों को प्रकृति के करीब ले जाएगी। हालांकि वन्यजीवों का दर्शन उनके प्राकृतिक व्यवहार और उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

बाघ, तेंदुआ और विविध वन्यजीवों को देखने का अवसर..

इंद्रावती टाइगर रिजर्व की जंगल सफारी में पर्यटकों को यहां के वन्यजीव संसार को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। वन क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ, चीतल, नीलगाय, बारहसिंगा, लोमड़ी और जंगली सूअर सहित विभिन्न वन्यप्राणियों की मौजूदगी बताई गई है। इसके अलावा पक्षियों की विविध प्रजातियां भी इस क्षेत्र की जैव विविधता को समृद्ध बनाती हैं।

सफारी के दौरान पर्यटक जंगल के अलग-अलग भू-दृश्यों, विस्तृत घासभूमियों, पेड़-पौधों और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव कर सकेंगे। प्रशिक्षित गाइड वन्यजीवों की पहचान, उनके प्राकृतिक आवास, जंगल के इतिहास और वन संरक्षण से जुड़ी जानकारी देंगे।

वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का यह अवसर प्रकृति प्रेमियों, पर्यटकों और वन्यजीवों में रुचि रखने वालों के लिए खास होगा। इंद्रावती की यह पहल पर्यटन के साथ प्रकृति शिक्षा को भी बढ़ावा दे सकती है।

दो हजार रुपये में छह पर्यटकों को सफारी..

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में शुरू की गई जंगल सफारी के लिए पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। निर्धारित शुल्क और समय के अनुसार पर्यटक सफारी का आनंद ले सकेंगे।

सफारी की प्रमुख व्यवस्थाएं इस प्रकार हैं-

सफारी शुल्क : प्रति जिप्सी 2,000 रुपये।

क्षमता : एक जिप्सी में अधिकतम छह पर्यटक बैठ सकेंगे।

अवधि : प्रत्येक सफारी लगभग 45 मिनट की होगी।

समय : सुबह 6 बजे और दोपहर बाद 3 बजे।

गाइड : प्रत्येक जिप्सी के साथ प्रशिक्षित गाइड रहेगा।

टिकट : निर्धारित टिकट काउंटर से टिकट प्राप्त किया जा सकेगा।

जलपान : पर्यटकों के लिए जलपान की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

पेयजल : परिसर में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की गई है।

विश्राम स्थल : पर्यटकों के बैठने और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने के लिए पैगोडा बनाया गया है।

इन सुविधाओं के साथ पर्यटक निर्धारित समय में जंगल सफारी का अनुभव कर सकेंगे। गाइड की मौजूदगी से उन्हें वन क्षेत्र की प्राकृतिक और जैविक विशेषताओं को समझने में भी मदद मिलेगी।

पर्यटन से स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे नए अवसर..

इंद्रावती में जंगल सफारी की शुरुआत स्थानीय समुदायों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से आने वाले समय में गाइड, वाहन संचालन, जलपान, स्थानीय उत्पादों और अन्य सेवाओं से जुड़े रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं।

हालांकि इन संभावनाओं को वास्तविक लाभ में बदलने के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। यदि पर्यटन व्यवस्था में स्थानीय समुदायों को प्राथमिकता मिलती है, तो इससे उनकी आय के नए साधन विकसित हो सकते हैं। साथ ही जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति उनकी भूमिका भी मजबूत हो सकती है।

प्रकृति आधारित पर्यटन का उद्देश्य केवल पर्यटकों को जंगल दिखाना नहीं, बल्कि वन क्षेत्र और स्थानीय समाज के बीच सकारात्मक संबंध स्थापित करना भी है। इंद्रावती में शुरू हुई यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बड़ी चुनौती..

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन की शुरुआत के साथ वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। बाघ और अन्य वन्यप्राणी संवेदनशील प्राकृतिक वातावरण में रहते हैं। ऐसे में सफारी के दौरान निर्धारित मार्गों का पालन, पर्यटकों की संख्या पर नियंत्रण, शोर से बचाव और वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप नहीं करना आवश्यक होगा।

पर्यटन का विस्तार तभी सार्थक होगा, जब इससे जंगल की जैव विविधता और वन्यजीवों के आवास को नुकसान न पहुंचे। इंद्रावती जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।

प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी रहे मौजूद..

जंगल सफारी के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) उत्तम कुमार गुप्ता, बीजापुर कलेक्टर विश्वदीप, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र कुमार यादव, डॉ. जाधव सागर रामचंद्र तथा वन मंडलाधिकारी बीजापुर (सामान्य) एवं इंद्रावती टाइगर रिजर्व के उप संचालक सुमेध संजय सुरवाड़े सहित वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में जनपद पंचायत भोपालपटनम की अध्यक्ष सरिता कुडेम, उपाध्यक्ष नीलम गणपत, ग्राम पंचायत गुल्लापेंटा की सरपंच पद्मा चिडेम, उल्लूर के ईडीसी अध्यक्ष मिच्छा बापू राव, वाडला के ईडीसी अध्यक्ष महेंद्र भगत, मंत्री रिंकी परस्ते, भोपालपटनम मंडल अध्यक्ष नरसिंह रेड्डी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पेरे पुल्लैया, अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष फारुख खान सहित अन्य जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

इंद्रावती की पहचान अब प्राकृतिक वैभव से भी..

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी की शुरुआत बस्तर के पर्यटन विकास की दिशा में एक नई पहल है। लंबे समय तक आम लोगों की पहुंच से दूर रहे इस वन क्षेत्र को अब प्रकृति प्रेमियों के लिए खोलने का प्रयास किया गया है।

देखें वीडियो..

घने जंगल, विस्तृत घासभूमियां, विविध वन्यजीव और प्राकृतिक सुंदरता इंद्रावती को एक विशिष्ट पर्यटन स्थल बनाने की क्षमता रखते हैं। आने वाले समय में इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किस तरह किया जाता है और वन्यजीव संरक्षण को कितनी प्राथमिकता दी जाती है।

देखें वीडियो..

इंद्रावती के जंगल अब केवल अपनी प्राकृतिक संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यटन की नई संभावनाओं के लिए भी पहचाने जाने की राह पर हैं। जंगल सफारी की शुरुआत ने इस अछूते प्राकृतिक संसार को लोगों से जोड़ने का एक नया रास्ता खोल दिया है।