
टाइगर रिजर्व में नए पर्यटन सत्र का आगाज, केंवची बफर प्रवेश द्वार और नए सफारी मार्ग से पर्यटकों का सफर होगा आसान; स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद..


बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख वन पर्यटन केंद्र अचानकमार टाइगर रिजर्व में पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने की दिशा में एक नई पहल हुई है। अब अमरकंटक और मध्य प्रदेश की ओर से आने वाले पर्यटकों को अचानकमार पहुंचने के लिए कोटा और शिवतराई होकर लंबा रास्ता तय नहीं करना पड़ेगा। केंवची में नए बफर सफारी प्रवेश द्वार और नवीन सफारी मार्ग की शुरुआत से पर्यटकों को सीधे टाइगर रिजर्व में प्रवेश की सुविधा मिलेगी। इससे न केवल यात्रा की दूरी और समय कम होगा, बल्कि अमरकंटक, अचानकमार और रतनपुर को जोड़कर अंतरराज्यीय पर्यटन का नया सर्किट विकसित करने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर रविवार को अचानकमार टाइगर रिजर्व के पर्यटन सत्र 2026-27 का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर केंवची बफर सफारी प्रवेश द्वार और नए सफारी मार्ग का वर्चुअल लोकार्पण किया गया। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने संयुक्त रूप से इसका लोकार्पण किया। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इसे वन पर्यटन के विस्तार के साथ स्थानीय ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
अमरकंटक से अचानकमार तक आसान होगी पहुंच..
अचानकमार टाइगर रिजर्व की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों को देखने के लिए अमरकंटक और मध्य प्रदेश के पर्यटकों की अच्छी संभावनाएं हैं, लेकिन अब तक इस दिशा से आने वाले पर्यटकों को कोटा-शिवतराई होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता था। केंवची में नया प्रवेश द्वार शुरू होने से यह परेशानी काफी हद तक दूर होगी। पर्यटक अमरकंटक की ओर से सीधे केंवची पहुंचकर बफर क्षेत्र में जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे।

इस नई व्यवस्था से अचानकमार को अमरकंटक के पर्यटन केंद्रों के साथ जोड़ने का रास्ता भी खुलेगा। पर्यटक एक ही यात्रा में अमरकंटक की धार्मिक एवं प्राकृतिक छटा, अचानकमार के घने जंगल और रतनपुर के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर सकेंगे। इससे क्षेत्र में पर्यटकों के रुकने की अवधि बढ़ने और पर्यटन से जुड़े कारोबार को लाभ मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार पर भी जोर..
नए प्रवेश द्वार और सफारी मार्ग का उद्देश्य केवल पर्यटकों की आवाजाही आसान बनाना नहीं है, बल्कि जंगल से जुड़े गांवों में आजीविका के नए अवसर पैदा करना भी है। सफारी वाहनों के संचालन, स्थानीय गाइड, रिसॉर्ट में ठहरने, खानपान और अन्य आतिथ्य सेवाओं के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सकता है।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों ने कहा कि अचानकमार टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां पर्यटन का विकास वन और वन्यजीव संरक्षण के नियमों के अनुरूप होना चाहिए। नियंत्रित और जिम्मेदार ईको-टूरिज्म के माध्यम से पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाने के साथ स्थानीय वनवासी समुदायों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को भी मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सुविधाओं से अचानकमार को राष्ट्रीय ईको-टूरिज्म मानचित्र पर अलग पहचान मिलेगी।
धरमजीत सिंह ने सफारी वाहनों को दिखाई हरी झंडी..

केंवची में आयोजित मुख्य समारोह में तखतपुर विधायक धरमजीत सिंह ने सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि नया प्रवेश द्वार शुरू होने से अमरकंटक और मध्य प्रदेश की ओर से आने वाले पर्यटकों को सीधा रास्ता मिलेगा। इससे यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं को गाइड, वाहन संचालन और आतिथ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिलेंगे।

समारोह में अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ओपी यादव वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।


कार्यक्रम स्थल पर मुख्य वन्यजीव संरक्षक प्रियंका पाण्डेय, जीपीएम कलेक्टर विजय दयाराम, पुलिस अधीक्षक मनोज खिलारी, मरवाही वन मंडलाधिकारी कुमार निशांत,अचानकमार टाइगर रिजर्व के प्रभारी उप संचालक तन्मय कौशिक,जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा, उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर, जिला पंचायत सदस्य भंवर सिंह गोवास, गौरेला नगर पंचायत अध्यक्ष मुकेश दुबे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
शिवतराई से शुरू हुई जंगल सफारी, पहले दिन 11 जिप्सी की बुकिंग..
नए पर्यटन सत्र की शुरुआत रविवार सुबह शिवतराई से भी हुई। सुबह 6:30 बजे मुख्य वन संरक्षक (बिलासपुर वृत्त) मनोज पांडेय ने टाइगर सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने पर्यटकों को अचानकमार टाइगर रिजर्व के लोगो वाली कैप भी वितरित की।

उन्होंने कहा कि अचानकमार प्रदेश का प्रमुख ईको-टूरिज्म स्थल है। नए पर्यटन सत्र और बेहतर सुविधाओं से यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, जिसका लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा।


पर्यटन सत्र के पहले ही दिन पर्यटकों में उत्साह दिखाई दिया। पहले दिन 11 जिप्सी सफारी की बुकिंग हुई, जबकि बैगा रिसॉर्ट के तीन कमरों की बुकिंग भी दर्ज की गई। शुरुआती दिन मिले इस प्रतिसाद को रिजर्व प्रबंधन नए पर्यटन सत्र के लिए सकारात्मक संकेत मान रहा है।
400 से अधिक पक्षी प्रजातियों का बसेरा है अचानकमार..
मैकल पर्वतमाला की सुरम्य वादियों में फैला अचानकमार टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता और घने जंगलों के लिए जाना जाता है। यहां बाघ, तेंदुआ, गौर (भारतीय बाइसन), भालू, सोनकुत्ता, चीतल, सांभर, कोटरी और उड़न गिलहरी जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं। इसके अलावा रिजर्व क्षेत्र में 400 से अधिक पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है।
यही वजह है कि अचानकमार केवल जंगल सफारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वन्यजीव फोटोग्राफी, पक्षी अवलोकन, प्रकृति भ्रमण और जैव विविधता के अध्ययन में रुचि रखने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण स्थल है। नए प्रवेश द्वार से इस प्राकृतिक विरासत तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
सफारी और रिसॉर्ट के लिए निर्धारित हुआ शुल्क..
अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने पर्यटन सत्र 2026-27 के लिए सफारी वाहनों और बैगा रिसॉर्ट में ठहरने का शुल्क निर्धारित किया है। पर्यटक आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अग्रिम ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। सुविधा निर्धारित शुल्क जिप्सी (6 सीटर) ₹3,500 प्रति राउंड, महारानी (8 सीटर) ₹5,000,योद्धा वाहन (9 सीटर) ₹5,500 प्रति राउंड और बैगा रिसॉर्ट ₹3,500 प्रति कमरा हैं।

ऑनलाइन बुकिंग के लिए आधिकारिक वेबसाइट: www.achanakmartigeriverve.com
संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती..
केंवची प्रवेश द्वार की शुरुआत से अचानकमार में पर्यटन का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इस विस्तार के साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जंगल की शांति बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा। पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच सफारी के नियमों का पालन, वाहनों की नियंत्रित आवाजाही, प्लास्टिक कचरे पर रोक और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना प्रबंधन के सामने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।


रिजर्व प्रबंधन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे जंगल भ्रमण के दौरान वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन करें और स्वच्छ एवं जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा दें।

कुल मिलाकर, केंवची बफर सफारी प्रवेश द्वार की शुरुआत अचानकमार के पर्यटन विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे अमरकंटक की ओर से आने वाले पर्यटकों के लिए रास्ता आसान होगा और स्थानीय स्तर पर पर्यटन आधारित रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। अब इस पहल की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पर्यटन विस्तार के साथ जंगल और वन्यजीवों का संरक्षण किस तरह सुनिश्चित किया जाता है।







