लोकतंत्र की मजबूती के लिए आत्ममंथन करे विपक्ष, अराजकता से नहीं चलेगा देश : अमर अग्रवाल..

भाजपा की नागरिक संगोष्ठी में पूर्व मंत्री ने विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- जनता का फैसला सर्वोपरि, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नही..

बिलासपुर। लोकतंत्र में असहमति और आलोचना का अधिकार सभी को है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं पर लगातार सवाल खड़े कर जनता के बीच भ्रम फैलाना उचित नहीं है। विपक्ष को अपनी हार के कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए, न कि देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश करनी चाहिए। यह बात पूर्व मंत्री एवं बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल ने कही।

वे शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र की ओर से पंडित देवकीनंदन दीक्षित सभागृह, लाल बहादुर शास्त्री शाला में आयोजित प्रबुद्धजनों की नागरिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का विषय ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ था। इस दौरान उन्होंने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक संस्थाओं, विपक्ष की भूमिका और विकसित भारत के संकल्प जैसे विषयों पर अपनी बात रखी।

अमर अग्रवाल ने कहा कि देश में कुछ मुट्ठीभर ताकतें ऐसी हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा करने के बजाय लगातार उनके खिलाफ सवाल खड़े कर रही हैं। न्यायपालिका, संसद, संविधान और मीडिया तक को संदेह के घेरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों और फैसलों की आलोचना करने का पूरा अधिकार है। इसके लिए संसद, विधानसभा और न्यायालय जैसी संस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन आलोचना और अराजकता फैलाने के बीच अंतर समझना जरूरी है।

हार के कारणों पर विचार करे विपक्ष..

विधायक अग्रवाल ने कहा कि विपक्ष को यह समझने की जरूरत है कि जनता ने उसे क्यों नकारा। चुनाव में मिली हार के कारणों का विश्लेषण करने और अपनी कार्यशैली में सुधार करने के बजाय यदि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाता रहेगा, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा और संस्कृति में लोकतंत्र की भावना गहराई से जुड़ी हुई है। यहां जनता ही सर्वोपरि है और जनता अपने मताधिकार से जिसे चाहे सत्ता की जिम्मेदारी सौंप सकती है।

उन्होंने आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने वह दौर भी देखा है, जब लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन किया गया। लोगों की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और लोकतंत्र की मूल भावना को चोट पहुंची। लेकिन आपातकाल के बाद हुए चुनाव में जनता ने अपना फैसला सुनाया और सत्ता परिवर्तन हुआ। यही भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है कि यहां अंतिम निर्णय जनता करती है।

इतिहास से लेकर विकसित भारत तक की चर्चा..

अपने संबोधन में अमर अग्रवाल ने भारत के ऐतिहासिक वैभव और विदेशी आक्रमणों के दौर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत कभी दुनिया के समृद्ध और संपन्न देशों में गिना जाता था। देश की आर्थिक और सांस्कृतिक संपन्नता के कारण विदेशी आक्रमणकारी यहां आए और लंबे समय तक देश को पराधीनता का सामना करना पड़ा। इससे भारत की आर्थिक और सामाजिक शक्ति प्रभावित हुई।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह शेर का बच्चा सियारों के बीच रहकर अपनी पहचान भूल सकता है, लेकिन शेर का सानिध्य मिलने पर फिर अपनी असली ताकत पहचान लेता है, उसी तरह भारत ने भी अपनी क्षमता और सामर्थ्य को फिर से पहचाना है।

अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 1991 में देश को आर्थिक संकट के कारण सोना गिरवी रखने की स्थिति का सामना करना पड़ा था। वहीं, वर्ष 2014 के बाद देश को विकास के एक निश्चित लक्ष्य के साथ आगे बढ़ाने की दिशा में नई नीतियां बनाई गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत-2047 का संकल्प लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में 14वें स्थान से आगे बढ़कर चौथे स्थान पर पहुंचा है। यह देश के प्रतिभाशाली नागरिकों, मेहनतकश लोगों और नई नीतियों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक का संकल्प होना चाहिए। इसके लिए शिक्षा, तकनीक, उद्योग, कृषि, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सहित प्रत्येक क्षेत्र में सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

ऑपरेशन सिंदूर का किया उल्लेख..

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता और सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का संदेश दिया है। आज भारत आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ विपक्षी नेता सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के प्रमाण मांगते हैं, जबकि भारत की सैन्य क्षमता और कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखा गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में लगातार हार का सामना करने के बाद कुछ विपक्षी दल जनता के फैसले और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने केरल और तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन दलों के समर्थन से वहां सरकारें चल रही हैं, वे भी ईवीएम को स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में चुनावी हार के बाद ही व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

अग्रवाल ने संगोष्ठी में मौजूद प्रबुद्धजनों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम और भ्रामक प्रचार से सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि है। देश की एकता, संवैधानिक व्यवस्था और विकास के प्रति सभी की जिम्मेदारी है।

दीपक सिंह ठाकुर ने भी विपक्ष पर साधा निशाना..

कार्यक्रम के प्रारंभ में भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक सिंह ठाकुर ने संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विपक्षी दलों की ओर से विभिन्न मुद्दों पर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष देश के विकास में बाधा डालने के लिए लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहा है। उन्होंने नागरिकों से ऐसे प्रयासों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन भाजपा जिला उपाध्यक्ष अजीत सिंह भोगल ने किया, जबकि आभार मध्य मंडल अध्यक्ष देवेंद्र पाठक ने व्यक्त किया।

इस अवसर पर महापौर पूजा विधानी, सभापति विनोद सोनी, केके शर्मा, दुर्गेश पांडेय, लक्ष्मीनारायण कश्यप, शैलेंद्र यादव, राकेश लालवानी, मनोज सोनी, वैभव गुप्ता, प्रदीप शुक्ला, विजय ताम्रकार, राजेश मिश्रा, प्रबीर सेन गुप्ता, योगेश बोले, आशीष गुप्ता, अरुणा दीक्षित, रंगा नादम, शिवप्रताप साव, दिनेश देवांगन, अंचल दुबे, सोनम साहू सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।