
शिकार, तस्करी और अवैध खनन पर शिकंजा कसने की अभिनव पहल को मिला ‘नेक्सस ऑफ गुड वार्षिक पुरस्कार 2026’..


तकनीक, खुफिया सूचना और अंतरराज्यीय समन्वय से वन अपराधों के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई.. वन संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय पहचान..
गरियाबंद-धमतरी/नई दिल्ली। जंगलों की सुरक्षा अब केवल शिकारियों और वन अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं रह गई है। वन्यजीवों के शिकार, लकड़ी तस्करी, अवैध खनन, अतिक्रमण और मादक पदार्थों के नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई करने की जरूरत को समझते हुए छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने एक नई कार्यप्रणाली विकसित की है। इसी अभिनव पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) को उसके एकीकृत ‘लैंडस्केप सिक्योरिटी मॉडल’ के लिए प्रतिष्ठित पांचवें ‘नेक्सस ऑफ गुड वार्षिक पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया गया है।
यह सम्मान वन एवं वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ संगठित पर्यावरणीय अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विकसित किए गए मॉडल को दिया गया है। इस उपलब्धि से छत्तीसगढ़ के वन संरक्षण प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। खास बात यह है कि इस मॉडल में जंगलों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक, मैदानी खुफिया सूचनाओं, स्थानीय सहभागिता और विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय को एक साथ जोड़ा गया है।
जंगलों की सुरक्षा के लिए बदली रणनीति..
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का लैंडस्केप सिक्योरिटी मॉडल पारंपरिक वन संरक्षण व्यवस्था से आगे बढ़कर काम करता है। इसमें किसी एक घटना या अपराधी पर कार्रवाई करने के बजाय उस पूरे तंत्र को निशाना बनाया जाता है, जिसके सहारे वन एवं वन्यजीवों के खिलाफ अपराध संचालित होते हैं।
वन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए अब केवल गश्त और शिकार विरोधी अभियान ही पर्याप्त नहीं हैं। दुर्गम जंगलों, अंतरराज्यीय सीमाओं और दूरस्थ वन क्षेत्रों में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क पर नजर रखने के लिए तकनीक और खुफिया जानकारी का उपयोग जरूरी हो गया है। USTR ने इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए एक समन्वित सुरक्षा व्यवस्था विकसित की है।
इस व्यवस्था के तहत वन्यजीवों के अवैध शिकार, वन भूमि पर अतिक्रमण, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियारों के नेटवर्क, विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल से शिकार, अंतरराज्यीय लकड़ी तस्करी और अवैध खनन जैसी गतिविधियों को एक व्यापक पर्यावरणीय सुरक्षा के दायरे में शामिल किया गया है।
सैटेलाइट से ड्रोन तक, तकनीक बनी वन सुरक्षा का आधार..
टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है। वन क्षेत्रों की निगरानी के लिए सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्विलांस और जीआईएस मैपिंग का उपयोग किया जा रहा है। डिजिटल साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर मैदानी स्तर पर कार्रवाई की जाती है।
इस पूरी व्यवस्था में विशेष फील्ड ऑपरेशन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। वन विभाग ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और राज्य पुलिस जैसी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने की रणनीति अपनाई है।
इसका उद्देश्य वन अपराधों को केवल स्थानीय स्तर पर देखने के बजाय उनके अंतरराज्यीय संबंधों और व्यापक नेटवर्क को समझना है। इससे दुर्गम वन क्षेत्रों तथा राज्य की सीमाओं के आसपास सक्रिय संगठित अपराधों के विरुद्ध समन्वित कार्रवाई का रास्ता मजबूत हुआ है।
वन्यजीव अपराध के साथ पूरे आपराधिक तंत्र पर नजर..
लैंडस्केप सिक्योरिटी मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसका व्यापक दृष्टिकोण है। जंगलों में होने वाले अपराध अक्सर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। वन्यजीवों का शिकार, अवैध हथियारों का इस्तेमाल, लकड़ी की तस्करी और वन भूमि पर अतिक्रमण जैसी गतिविधियों के पीछे कई बार संगठित नेटवर्क सक्रिय रहते हैं।
ऐसे में केवल एक अपराध की जांच करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाता। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की पहल में इन गतिविधियों के आपसी संबंधों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है।
इस मॉडल में तकनीक के साथ स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारी, सामुदायिक सहभागिता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तालमेल को जोड़ा गया है। इससे वन क्षेत्रों, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जैव विविधता की सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रतिष्ठित जूरी ने किया चयन..
‘नेक्सस ऑफ गुड वार्षिक पुरस्कार 2026’ के लिए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का चयन पूर्व संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) अध्यक्ष दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली प्रतिष्ठित जूरी ने किया। इस वर्ष देशभर से 26 व्यक्तियों और संस्थाओं को उनके नवाचारी, प्रभावशाली और अनुकरणीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है।
नेक्सस ऑफ गुड फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री अनिल स्वरूप ने जूरी के निर्णय की जानकारी व्यक्तिगत रूप से टाइगर रिजर्व के उप संचालक और पूरी टीम को दी। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए टीम को बधाई दी।
यह सम्मान केवल टाइगर रिजर्व के अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों और मैदानी टीमों के प्रयासों की भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है, जो कठिन परिस्थितियों में जंगलों की सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
संस्थागत नवाचार से मजबूत होगी वन सुरक्षा..
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व को मिला यह पुरस्कार वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में संस्थागत नवाचार के महत्व को रेखांकित करता है। यह दर्शाता है कि आधुनिक तकनीक और समन्वित मैदानी कार्रवाई के जरिए पारिस्थितिकीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के वन संरक्षण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। साथ ही, लैंडस्केप स्तर पर वन एवं वन्यजीव सुरक्षा के इस मॉडल को आगे और मजबूत करने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान करती है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की यह पहल बताती है कि जंगलों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि तकनीक, प्रशासनिक समन्वय, स्थानीय सहभागिता और प्रभावी कानून प्रवर्तन के साझा प्रयासों से ही वन संपदा को सुरक्षित रखा जा सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान इसी सामूहिक प्रयास और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।








