राज्योत्सव पर छत्तीसगढ़ को वन पर्यटन की दोहरी सौगात, इंद्रावती में पहली बार जंगल सफारी तो अचानकमार के केंवची गेट से खुला नया रास्ता..

बस्तर के जंगलों में अब पर्यटकों को करीब से दिखेगी वन्यजीवों की दुनिया, अचानकमार में 50 किलोमीटर के सफारी रूट से बढ़ेगा रोमांच; पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे..

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर प्रदेश को वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्र में दो बड़ी सौगात मिली हैं। अब तक अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और समृद्ध वन्यजीवों के लिए पहचाने जाने वाले प्रदेश के दो प्रमुख वन क्षेत्रों में पर्यटन की नई संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने 1 नवंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली बार जंगल सफारी का शुभारंभ किया। वहीं, अचानकमार टाइगर रिजर्व में केंवची गेट से बफर जोन सफारी की शुरुआत हुई। इन दोनों पहलों से छत्तीसगढ़ के वन पर्यटन को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

राज्योत्सव के अवसर पर शुरू हुई ये दोनों सफारी प्रदेश के पर्यटन विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। खास बात यह है कि एक ओर बस्तर के इंद्रावती के जंगल पहली बार संगठित जंगल सफारी के माध्यम से पर्यटकों के लिए खुल रहे हैं, तो दूसरी ओर अचानकमार में नया प्रवेश द्वार मिलने से वन पर्यटन का दायरा बढ़ रहा है। इससे प्रदेश में वन्यजीवों को देखने, प्राकृतिक स्थलों तक पहुंचने और स्थानीय संस्कृति से रूबरू होने के अवसर बढ़ेंगे।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से वन पर्यटन के नए केंद्र तक इंद्रावती का सफर..

बस्तर का इंद्रावती टाइगर रिजर्व लंबे समय तक नक्सलवाद और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण पर्यटन की मुख्यधारा से दूर रहा। प्राकृतिक संपदा और वन्यजीवों की प्रचुरता के बावजूद यहां पर्यटन गतिविधियों का विस्तार नहीं हो सका था। अब जंगल सफारी की शुरुआत के साथ इस क्षेत्र को पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने की दिशा में पहल हुई है।

इंद्रावती का जंगल जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध है। यहां बाघों की मौजूदगी के साथ छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वन भैंसा, विभिन्न प्रजातियों के गिद्ध और अनेक वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। घने जंगल, पहाड़ी भूभाग और वन्यजीवों की विविधता इस क्षेत्र को प्रकृति प्रेमियों के लिए खास बनाती है। सफारी शुरू होने से पर्यटक अब इस प्राकृतिक विरासत को नजदीक से देखने का अवसर पा सकेंगे।

चार जिप्सियों से होगी सफारी, स्थानीय युवाओं को मिली जिम्मेदारी..

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी के संचालन के लिए शुरुआती तौर पर चार जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है। पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टूर गाइड के साथ चाय-नाश्ते की व्यवस्था भी की गई है। इस पूरी पहल में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

स्थानीय युवाओं को सफारी संचालन, पर्यटकों के आतिथ्य और जंगल की जैव विविधता की जानकारी देने के लिए कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षित युवा पर्यटकों को जंगल की विशेषताओं, वन्यजीवों और प्राकृतिक वातावरण से परिचित कराएंगे। इससे पर्यटन के साथ स्थानीय युवाओं के कौशल विकास और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

बीजापुर से 60 किलोमीटर दूर उलूर होगा सफारी का प्रवेश द्वार..

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में सफारी का शुरुआती केंद्र उलूर गांव को बनाया गया है। यह बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है। पर्यटक बीजापुर से भोपालपटनम होते हुए उलूर पहुंच सकेंगे। यहां से निर्धारित जिप्सियों के माध्यम से जंगल सफारी का रोमांचक सफर शुरू होगा।

इस पहल का उद्देश्य केवल पर्यटकों को जंगल घुमाना नहीं, बल्कि बस्तर की प्राकृतिक विरासत को जिम्मेदार पर्यटन के माध्यम से सामने लाना भी है। इसके साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को पर्यटन से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।

होम-स्टे से हस्तशिल्प तक, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा..

इंद्रावती में जंगल सफारी शुरू होने का लाभ केवल सफारी वाहनों के संचालन तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर होम-स्टे, खानपान, परिवहन और अन्य सुविधाओं की मांग भी बढ़ेगी। ग्रामीण परिवार पर्यटकों के ठहरने और आतिथ्य की व्यवस्था से आय अर्जित कर सकेंगे।

बस्तर की पारंपरिक खानपान संस्कृति, स्थानीय महिलाओं के हाथों से तैयार व्यंजन और यहां के कारीगरों के हस्तशिल्प उत्पादों को भी नया बाजार मिल सकता है। इस तरह वन पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता पर्यटकों की नियमित आवाजाही, सुरक्षा और स्थानीय समुदाय की निरंतर भागीदारी पर निर्भर करेगी।

अचानकमार में केंवची गेट से खुला जंगल सफारी का नया रास्ता..

इधर, मुंगेली जिले के लोरमी क्षेत्र में स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व में भी राज्योत्सव के दिन पर्यटन का नया अध्याय शुरू हुआ। केंवची गेट से बफर जोन सफारी शुरू होने के साथ पर्यटकों को अचानकमार के जंगलों तक पहुंचने का एक नया विकल्प मिल गया है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही से अमरकंटक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर स्थित यह प्रवेश द्वार पहली बार पर्यटन गतिविधियों के लिए खोला गया है। इससे पहले शिवतराई गेट से सफारी संचालित हो रही थी।

मानसून के कारण बंद पर्यटन और इको-टूरिज्म गतिविधियां भी अब दोबारा शुरू हो रही हैं। केंवची गेट के खुलने से अचानकमार के पर्यटन क्षेत्र का विस्तार होगा। साथ ही अमरकंटक, अचानकमार और मां महामाया की नगरी रतनपुर को जोड़कर पर्यटन सर्किट विकसित करने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक और वन्यजीव पर्यटन को भी एक साथ बढ़ावा मिल सकता है।

50 किलोमीटर के सफारी रूट में जंगल, पहाड़ और नदी का दीदार..

अचानकमार टाइगर रिजर्व में केंवची गेट से शुरू होने वाला सफारी रूट लगभग 50 किलोमीटर लंबा होगा। इस मार्ग में पर्यटकों को जंगल के अलग-अलग प्राकृतिक नजारे देखने का अवसर मिलेगा। सफारी के दौरान भैरोसांगफाटर, सेमर वॉच टावर (कचांदी तिराहा), कचांदी रोड, जलांगो तिराहा, दरियाबूट पेट्रोलिंग कैंप और आमाडोब बैरियर होते हुए वाहन वापस केंवची गेट पहुंचेंगे।

सफारी के लिए एक जिप्सी और तीन महारानी वाहनों की व्यवस्था की गई है। जिप्सी से एक राउंड का शुल्क 3,500 रुपये और महारानी वाहन का शुल्क 5,000 रुपये निर्धारित किया गया है। पर्यटकों के ठहरने के लिए केंवची गेट के आसपास पर्यटन विभाग का सोनभद्र रिसोर्ट और निजी रिसोर्ट भी उपलब्ध हैं।

बाघ, तेंदुआ, भालू और गौर के साथ ऊदबिलाव भी होंगे आकर्षण..

अचानकमार का जंगल वन्यजीवों की विविधता के लिए जाना जाता है। यहां सफारी के दौरान पर्यटकों को बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर (बाइसन), चीतल, सांभर, कोटरी, सोनकुत्ता और जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों को देखने का अवसर मिल सकता है। इसके अलावा मोर और मनियारी नदी में पाए जाने वाले ऊदबिलाव भी इस क्षेत्र के प्रमुख आकर्षण हैं।

सफारी के अलावा सिहावल सागर, माझी डोंगरी वॉच टावर और जल्दा ग्रासलैंड जैसे स्थल भी पर्यटकों के लिए खास होंगे। सिहावल सागर मनियारी नदी का उद्गम स्थल होने के साथ हाथी कैंप के लिए भी जाना जाता है। माझी डोंगरी वॉच टावर से अचानकमार के जंगलों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है, जबकि जल्दा ग्रासलैंड में गौर की मौजूदगी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकती है। हालांकि, जंगल में वन्यजीवों का दिखना उनके प्राकृतिक विचरण पर निर्भर करेगा।

पर्यटन बढ़ेगा तो स्थानीय लोगों को भी मिलेगा काम..

केंवची गेट से सफारी शुरू होने का असर आसपास के गांवों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से रिसोर्ट, होटल, होम-स्टे, रेस्टोरेंट और स्थानीय दुकानों के कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा प्रशिक्षित गाइड, जिप्सी चालक और पर्यटन से जुड़ी अन्य सेवाओं में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सकेगा।

स्थानीय उत्पादों और स्मृति चिह्नों की बिक्री के लिए सोवेनियर शॉप जैसी सुविधाएं भी ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं। इस तरह अचानकमार में पर्यटन का विस्तार आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर तैयार कर सकता है।

पर्यटन के साथ संरक्षण की चुनौती भी अहम..

इंद्रावती और अचानकमार में सफारी की शुरुआत प्रदेश के वन पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन इन पहलों की सफलता केवल पर्यटकों की संख्या से नहीं, बल्कि जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों के संतुलित संचालन से तय होगी। पर्यटकों की सुरक्षा, प्रशिक्षित गाइड, निर्धारित सफारी मार्ग, वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप रोकना और स्थानीय समुदाय को लाभ में भागीदार बनाना जरूरी होगा।

राज्योत्सव पर शुरू हुई ये दोनों पहल छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक विरासत को नई पहचान देने की क्षमता रखती हैं। इंद्रावती के जंगलों में पहली बार सफारी और अचानकमार के केंवची गेट से नए पर्यटन मार्ग की शुरुआत से प्रदेश के वन पर्यटन को विस्तार मिलने की उम्मीद है। अब चुनौती इन संभावनाओं को स्थायी पर्यटन व्यवस्था में बदलने की होगी, ताकि प्रकृति संरक्षण के साथ बस्तर और अचानकमार के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और रोजगार के नए रास्ते भी खुल सकें।