दुर्ग के एक घर से सुरक्षित रेस्क्यू, विशेषज्ञों ने की श्वेतवर्णी (ल्यूसिस्टिक) करैत की पुष्टि, जंगल में छोड़ा गया..

दुर्ग। छत्तीसगढ़ की जैव विविधता के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और दुर्लभ घटना सामने आई है। दुर्ग जिले के चरोदा क्षेत्र स्थित पंचशील नगर के एक घर से वन विभाग ने एक ऐसे करैत सर्प का सुरक्षित रेस्क्यू किया है, जो सामान्य काले-पीले रंग का नहीं बल्कि पूरी तरह सफेद दिखाई देता है। विशेषज्ञों ने जांच के बाद इसकी पहचान अत्यंत दुर्लभ श्वेतवर्णी (ल्यूसिस्टिक) करैत (Bungarus fasciatus) के रूप में की है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का सर्प दक्षिण एशिया में बेहद कम देखने को मिलता है और छत्तीसगढ़ में इसका मिलना राज्य की समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।

वन विभाग के अनुसार 21 जुलाई 2026 को पंचशील नगर के एक मकान में सफेद रंग के सांप होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही दुर्ग वनमण्डल की टीम और सर्प रेस्क्यूअर विजय शर्मा मौके पर पहुंचे। सावधानीपूर्वक रेस्क्यू के दौरान जब सर्प का परीक्षण किया गया तो उसके असामान्य सफेद रंग ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। बाद में सर्प विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि यह एक श्वेतवर्णी करैत है।
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विशेषज्ञों के अनुसार इस सर्प का सफेद रंग किसी बीमारी का नहीं, बल्कि ल्यूसिज्म (Leucism) नामक एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति का परिणाम है। इस अवस्था में शरीर में मेलानिन नामक रंगद्रव्य की मात्रा बहुत कम होती है, जिससे जीव का प्राकृतिक रंग बदलकर सफेद या हल्का हो जाता है। हालांकि इसकी आंखों का रंग सामान्य रहता है, जिससे यह एल्बिनो जीवों से अलग माना जाता है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि श्वेतवर्णी करैत के मिलने की घटनाएं पूरे दक्षिण एशिया में बेहद कम दर्ज हैं। अब तक इसके रिकॉर्ड नेपाल तथा भारत के महाराष्ट्र और ओडिशा के कुछ सीमित क्षेत्रों से ही सामने आए हैं। ऐसे में दुर्ग जिले में इस दुर्लभ सर्प का मिलना वैज्ञानिक अध्ययन और वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

विशेषज्ञों द्वारा पुष्टि के बाद दुर्ग वनमण्डलाधिकारी दिपेश कपिल के निर्देश पर 23 जुलाई 2026 को इस दुर्लभ सर्प को पूरी सुरक्षा के साथ उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। इस दौरान दुर्ग के आर.ए. प्रमोद यादव, सर्प मित्र विजय शर्मा तथा सर्प विशेषज्ञ अविनाश मौर्या की टीम ने राजनांदगांव वनमण्डल के कक्ष क्रमांक आर.एफ.-549 में उसे सुरक्षित रूप से मुक्त किया।
वन विभाग ने इस घटना को प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव विरासत का महत्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए लोगों से अपील की है कि घरों या आसपास किसी भी वन्यजीव या सर्प के दिखाई देने पर उसे नुकसान न पहुंचाएं। तत्काल वन विभाग या प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम को सूचना दें, ताकि जीव और लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

यह दुर्लभ खोज न केवल छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को नई पहचान देती है, बल्कि यह भी बताती है कि प्रदेश के वन क्षेत्र आज भी कई ऐसे अनोखे और दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित आश्रय बने हुए हैं, जिनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद आवश्यक है।







