

मुखबिर की सूचना पर उड़न दस्तों ने घेराबंदी कर पकड़ा वाहन, लाखों की प्रतिबंधित लकड़ी बरामद..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ट्रक को पकड़कर भारी मात्रा में प्रतिबंधित लकड़ी जब्त की है। यह कार्रवाई मुख्य वन संरक्षक (CCF) और डीएफओ उड़न दस्ता की संयुक्त टीम ने देर रात की।

जानकारी के अनुसार, मुख्य वन संरक्षक मनोज पांडे को रात करीब 9 बजे मुखबिर से सूचना मिली कि अकलतरा क्षेत्र से एक ट्रक में प्रतिबंधित कहुआ (अर्जुन) लकड़ी लोड कर रायपुर की ओर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही डीएफओ बिलासपुर नीरज कुमार के मार्गदर्शन में तुरंत विशेष टीम गठित की गई।
घेराबंदी कर पकड़ा गया ट्रक..

वन विभाग की टीम ने दर्री घाट से लेकर पेंड्रीडीह तक सघन गश्त शुरू की। करीब 10 बजे पेंड्रीडीह के पास संदिग्ध ट्रक (क्रमांक CG 04 PD 1258) को रोका गया। पूछताछ और तलाशी लेने पर ट्रक में प्रतिबंधित कहुआ लकड़ी के बड़े-बड़े गोले भरे मिले।
भारी मात्रा में लकड़ी जब्त..

जांच में ट्रक से कुल लगभग 10.655 घन मीटर लकड़ी बरामद की गई, जिसमें कहुआ (अर्जुन) – 76 नग,नीम – 2 नग,गंधर्व – 2 नग है। बरामद लकड़ी की अनुमानित कीमत करीब 2 लाख रुपये बताई जा रही है, जबकि ट्रक की कीमत लगभग 5 लाख रुपये आंकी गई है।
कानूनी कार्रवाई शुरू..
वन विभाग ने अवैध वनोपज परिवहन के मामले में भारतीय वन अधिनियम 1927, छत्तीसगढ़ वन व्यापार अधिनियम की धारा 5 और 15 तथा छत्तीसगढ़ वन अधिवहन नियम 2001 के तहत मामला दर्ज कर ट्रक को जब्त कर लिया है। वाहन को वन मंडल कार्यालय लाकर आगे की कार्रवाई पूरी की गई।
राजसात की प्रक्रिया शुरू..
जब्त लकड़ी और वाहन को कोटा सेल डिपो भेज दिया गया है। वन विभाग ने अब इस पूरे मामले में लकड़ी और वाहन को राजसात (सरकारी कब्जे में लेने) की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
टीम की अहम भूमिका..

इस कार्रवाई में CCF उड़न दस्ता प्रभारी राम बनवास खैरवार, सहायक अब्दुल हाफिस खान, रवि शंकर दादोरिया, डीएफओ उड़न दस्ता प्रभारी शिव कुमार नाग, संगीता तिर्की और लोकमणि त्रिपाठी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं बेलतरा परिक्षेत्र के सहायक वेद प्रकाश शर्मा ने भी विशेष सहयोग दिया।
अवैध तस्करी पर सख्ती का संकेत..
वन विभाग की इस कार्रवाई को अवैध लकड़ी तस्करों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जंगलों की सुरक्षा और अवैध कटाई पर रोक लगाने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।



