

रायगढ़ के छोटे से गांव संबलपुरी के अजय गुप्ता ने हासिल की ऑल इंडिया 91वीं रैंक..

लालटेन की रोशनी में पढ़ाई, गरीबी से संघर्ष और मेहनत ने बनाया भारतीय वन सेवा अधिकारी..
रायपुर/रायगढ़। छत्तीसगढ़ की मिट्टी से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को गर्व से भर दिया है। रायगढ़ जिले के छोटे से गांव संबलपुरी के रहने वाले अजय गुप्ता ने भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में ऑल इंडिया 91वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है। कभी जंगलों में तेंदूपत्ता तोड़ने, महुआ बीनने और लकड़ी लाने वाला यह युवा अब उसी जंगल की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी संभालेगा।
अजय की सफलता सिर्फ एक परीक्षा में चयन की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, मेहनत और सपनों पर अडिग विश्वास की मिसाल बन गई है। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार में जन्मे अजय का बचपन अभावों के बीच बीता। परिवार का जीवन जंगलों पर निर्भर था। रोज सुबह परिवार के लोग जंगल जाते थे।कभी तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए, कभी महुआ बीनने और कभी लकड़ी लाने। इन्हीं कठिन परिस्थितियों के बीच अजय ने अपनी पढ़ाई जारी रखी।
गांव के लोगों के मुताबिक, कई बार दिनभर मेहनत करने के बाद अजय रात में लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करता था। घर में संसाधनों की कमी थी, लेकिन उसके सपनों की उड़ान कभी छोटी नहीं हुई। आर्थिक तंगी और लगातार चुनौतियों ने उसके रास्ते जरूर कठिन बनाए, लेकिन उसके हौसले को कमजोर नहीं कर सके।
करीबी लोगों का कहना है कि अजय हमेशा जंगल और गांव की जिंदगी से जुड़ा रहा। उसने जंगल को सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं माना, बल्कि उसे अपनी पहचान और अपने बचपन का हिस्सा समझा। शायद यही कारण रहा कि उसने भारतीय वन सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। जंगलों के बीच पला-बढ़ा यह युवा अब वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में देश की सेवा करेगा।
अजय गुप्ता की इस ऐतिहासिक सफलता पर पूरे छत्तीसगढ़ में खुशी का माहौल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी अजय को बधाई देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक युवक की सफलता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के वनाश्रित परिवारों के संघर्ष और विश्वास की जीत है। उन्होंने कहा कि अजय ने अपने परिवार के साथ-साथ पूरे राज्य का नाम रोशन किया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं ग्रामीण और वन क्षेत्रों के युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं। अजय गुप्ता की सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि इरादे मजबूत हों तो संसाधनों की कमी भी किसी को सफलता पाने से नहीं रोक सकती।
आज अजय गुप्ता हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि मेहनत, धैर्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो जंगल की पगडंडियों से निकलकर भी देश की सबसे बड़ी सेवाओं तक पहुंचा जा सकता है।



