

मस्तुरी की ओखर समिति में कंप्यूटर ऑपरेटर पर गबन का मामला, कार्रवाई के आदेश के बाद भी FIR नहीं..

बिलासपुर। जिले के मस्तुरी विकासखंड स्थित सेवा सहकारी समिति ओखर में धान खरीदी से जुड़ा एक बड़ा डिजिटल घोटाला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर ने किसानों के नाम पर फर्जी धान खरीदी दर्ज कर लाखों रुपए अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए। मामले में विभागीय जांच के बाद कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन एक महीने बाद भी FIR दर्ज नहीं होने से पूरे सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं।

मामला सामने आने के बाद सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों से जुड़े इस कथित गबन को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है।
देखें आदेश..

जानकारी के अनुसार उप आयुक्त सहकारिता बिलासपुर द्वारा जारी आदेश क्रमांक 505 दिनांक 09 अप्रैल 2026 में जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि धान खरीदी की अंतिम तिथि 5 फरवरी 2026 थी और उस समय तक कुल खरीदी 40,135 क्विंटल दर्ज थी। इसके बावजूद कंप्यूटर ऑपरेटर नरेन्द्र कुमार पटेल ने 7 मार्च 2026 को ऑनलाइन रिकॉर्ड में बदलाव कर खरीदी का आंकड़ा बढ़ाकर 40,454 क्विंटल कर दिया। यानी धान खरीदी बंद होने के बाद भी रिकॉर्ड में 319 क्विंटल अतिरिक्त धान खरीदी दिखा दी गई।
जांच में यह भी सामने आया कि कृषक हरिराम और लखेश्वर रजक के नाम पर फर्जी धान खरीदी की एंट्री की गई। रिकॉर्ड में धान खरीदी दर्शाई गई, जबकि वास्तविक रूप से किसानों द्वारा धान बेचे जाने की पुष्टि नहीं हुई। सबसे गंभीर बात यह रही कि फर्जी खरीदी का भुगतान सीधे कंप्यूटर ऑपरेटर के बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया और रकम निकाल भी ली गई।
विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर उप आयुक्त सहकारिता ने संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर को तत्काल पद से हटाने, गबन की राशि की वसूली करने तथा थाने में FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन आदेश जारी होने के एक महीने बाद भी न तो FIR दर्ज हुई और न ही वसूली की कार्रवाई पूरी हो सकी है।
इसी देरी को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि आखिर कार्रवाई में इतनी ढिलाई क्यों बरती जा रही है। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या आरोपी को किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण मामला दबाने की कोशिश हो रही है।
सूत्रों की मानें तो इस पूरे मामले में केवल एक व्यक्ति की भूमिका नहीं, बल्कि अन्य लोगों की संलिप्तता की भी आशंका जताई जा रही है। यदि निष्पक्ष और गहन जांच कराई गई तो कई और नाम सामने आ सकते हैं।


किसानों से जुड़े इस संवेदनशील मामले ने सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। जनता यह जानना चाहती है कि किसानों की मेहनत की कमाई का गबन करने वालों पर कब सख्त कार्रवाई होगी और FIR दर्ज कर दोषियों को कानून के दायरे में कब लाया जाएगा।



