

रायपुर। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब अपने कोर एजेंडे – ‘संगठन और सत्ता के सुदृढ़ीकरण’ पर पूरी तरह से शिफ्ट हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में योगी कैबिनेट के हालिया फेरबदल के बाद अब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का नंबर है। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों से जो सबसे बड़ी ‘इनसाइड स्टोरी’ निकलकर आ रही है, वह यह है कि दिल्ली दरबार ने प्रदेश के लिए एक बेहद आक्रामक और नया ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है।

आने वाले कुछ ही दिनों में प्रदेश में सत्ता और संगठन के स्तर पर ऐसे चौंकाने वाले बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जो सीधे तौर पर ‘मिशन 2028’ की दिशा तय करेंगे।
साय का बढ़ता कद : ‘साइलेंट परफॉर्मर’ पर दिल्ली का फुल कॉन्फिडेंस..
इस पूरे फेरबदल के केंद्र में एक बात सबसे स्पष्ट है – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर केंद्रीय नेतृत्व का अटूट भरोसा। बीते महीनों में सीएम साय ने जिस प्रशासनिक कुशलता के साथ सरकार चलाई है, उसने दिल्ली में उनकी छवि एक ‘साइलेंट परफॉर्मर’ और बेदाग राजनेता की बना दी है। आलाकमान अब यह साफ कर चुका है कि अगला विधानसभा चुनाव पूरी तरह से साय के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा। यही वजह है कि अब मुख्यमंत्री को उनके हिसाब से काम करने वाली ‘परफेक्ट टीम’ देने और नॉन-परफॉर्मर्स को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी हो रही है।
विजय, ओपी या अरुण.. नितिन नबीन की टीम में मिलेगी एंट्री !
सत्ता से इतर, सबसे बड़ा बदलाव संगठन के स्तर पर होने जा रहा है। सूत्रों की मानें तो प्रदेश के कद्दावर नेताओं – डिप्टी सीएम विजय शर्मा, कैबिनेट मंत्री ओपी चौधरी या अरुण साव में से किसी एक को नितिन नबीन के साथ राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
खासकर, गृहमंत्री विजय शर्मा का नाम इस रेस में सबसे आगे बताया जा रहा है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अपनी नई राष्ट्रीय टीम में युवा, तेजतर्रार और वैचारिक रूप से प्रखर चेहरों को शामिल कर रहा है। विजय शर्मा इस क्राइटेरिया में बिल्कुल फिट बैठते हैं। इसे उनके राजनीतिक कद के ‘प्रमोशन’ के तौर पर देखा जा रहा है।
कैबिनेट में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ : महिलाओं और नए चेहरों पर दांव..
सत्ता के गलियारों में सबसे ज्यादा हलचल साय कैबिनेट के बहुप्रतीक्षित विस्तार और फेरबदल को लेकर है। इस बार का फोकस ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर टिका है :
दिग्गजों की हो सकती है छुट्टी..
कद्दावर नेता रामविचार नेताम की जगह सरगुजा संभाग से ही किसी तेजतर्रार आदिवासी महिला विधायक को कैबिनेट में शामिल करने की गंभीर चर्चा है। इससे आदिवासी और महिला, दोनों बड़े वोटबैंक को एक साथ साधा जा सकेगा।
इनके विभागों पर लटकी तलवार..
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े के विभागों में या तो बड़ी कैंची चल सकती है, या फिर इन्हें ड्रॉप कर नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।
इन नामों की चर्चा सबसे तेज..
पंडरिया से विधायक भावना बोहरा और रायपुर से विधायक पुरंदर मिश्रा को मंत्री पद से नवाजे जाने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही सरकार में अनुभव का बैलेंस बनाए रखने के लिए कुछ पुराने और अनुभवी चेहरों की भी कैबिनेट में एंट्री हो सकती है।
क्या है भाजपा का नया गेमप्लान?
कुल मिलाकर, यह संभावित फेरबदल महज चेहरों की अदला-बदली नहीं है। यह भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का वह ‘मास्टरस्ट्रोक’ है, जिसके जरिए क्षेत्रीय संतुलन, महिला-आदिवासी समीकरण और सरकार की डिलीवरी कैपेसिटी को दुरुस्त किया जा रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि जब दिल्ली से फाइनल फरमान जारी होता है, तो किन मंत्रियों का पत्ता कटता है और किन नए चेहरों की किस्मत का ताला खुलता है।



