पूर्व संपदा अधिकारी और पूर्व महापौर आमने-सामने, नगर निगम ने गठित की जांच समिति; रिपोर्ट के बाद ही खुलेगा पूरे मामले का सच..

बिलासपुर। नगर निगम बिलासपुर से जुड़े एक पुराने टेंडर विवाद ने दो साल बाद फिर तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। वीडियो में तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन द्वारा पूर्व महापौर रामशरण यादव पर लगभग 1 करोड़ 15 लाख रुपये के कथित लेन-देन का आरोप लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। वीडियो के वायरल होते ही मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
बाइट – राजेश देवांगन पूर्व संपदा अधिकारी नगर निगम बिलासपुर छ. ग.
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब पूर्व संपदा अधिकारी राजेश देवांगन ने वायरल वीडियो और उससे जुड़े आरोपों से खुद को अलग बताते हुए गंभीर दावे किए। उन्होंने कहा कि उनके नाम से फर्जी शिकायत तैयार की गई है और वीडियो को एडिट कर भ्रामक तरीके से सोशल मीडिया में प्रसारित किया गया है। देवांगन का आरोप है कि कुछ लोगों ने इस मामले को आधार बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करने का प्रयास किया और 50 लाख रुपये की मांग की गई। उन्होंने कहा कि मामले को जानबूझकर गलत दिशा देने की कोशिश की जा रही है।
बाइट – रामशरण यादव पूर्व महापौर नगर निगम बिलासपुर छ.ग.
दूसरी ओर, पूर्व महापौर रामशरण यादव ने भी सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक उद्देश्य से उछाला जा रहा है। यादव ने कहा कि जिस टेंडर और कथित लेन-देन की बात की जा रही है, उसकी जांच पहले भी हो चुकी है और किसी प्रकार की अनियमितता या आरोप की पुष्टि नहीं हुई थी। उन्होंने आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई करने की बात भी कही है।
बाइट – खजांची कुमार अपर आयुक्त नगर निगम बिलासपुर छ.ग.
मामले के फिर से सुर्खियों में आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम प्रशासन ने पूर्व संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि जिस टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसे पहले ही निरस्त किया जा चुका था। अब वायरल वीडियो, लगाए गए आरोपों और संबंधित तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

नगर निगम का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री और आरोपों की सत्यता की जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। जांच समिति सभी दस्तावेजों, वीडियो सामग्री और संबंधित पक्षों के बयानों का परीक्षण करेगी।
देखें वॉयरल वीडियो..
फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस, प्रशासनिक जवाबदेही और सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की विश्वसनीयता को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन के आरोप हैं, तो दूसरी ओर फर्जी शिकायत, वीडियो से छेड़छाड़ और ब्लैकमेलिंग के दावे भी सामने आए हैं। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई अब जांच समिति की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।


जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक यह मामला बिलासपुर की राजनीति और नगर निगम प्रशासन में चर्चा का प्रमुख विषय बना रहेगा। शहर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और आखिर वायरल वीडियो के पीछे की वास्तविक कहानी क्या है।







