बिलासपुर। धमतरी जिले के अंतर्गत आने वाले कुरुद विकासखंड में कार्यरत एलबी संवर्ग के शिक्षकों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से निराशा हाथ लगी है। क्रमोन्नत वेतनमान की मांग को लेकर लगाई गई याचिकाओं को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकल पीठ ने मामले में साफ किया कि इसी विषय पर न्यायालय पूर्व में ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है, इसलिए वर्तमान याचिकाओं में किसी भी तरह के हस्तक्षेप का औचित्य नहीं बनता।

क्या था शिक्षकों का पूरा मामला?
मामला कुरुद विकासखंड के विभिन्न शासकीय विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों तथा व्याख्याताओं का है। उच्चतर वेतनमान पाने की उम्मीद में सात शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी इन याचिकाकर्ताओं में यशोदा साहू, सरिता चंद्राकर, ओमकुमारी कंवर, झबलेश्वरी साहू, मनीष देव वर्मा, छोटेलाल टांडी तथा पूनम अग्रवाल शामिल हैं। इन सभी शिक्षकों ने अधिवक्ता अंकुश सोनी के माध्यम से अपनी बात अदालत के सामने रखी थी।
2017 के परिपत्र को दी गई चुनौती..
दायर याचिकाओं में राज्य शासन के 10 मार्च 2017 वाले परिपत्र का मुख्य रूप से हवाला दिया गया था। शिक्षकों का साफ कहना था कि निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने के पश्चात उन्हें उच्चतर वेतनमान का लाभ मिलना ही चाहिए। शासन के क्रमोन्नत लाभ नहीं दिए जाने के निर्णय को चुनौती देते हुए अदालत से यह मांग की गई थी। सभी मामलों में तथ्य तथा कानूनी प्रश्न बिल्कुल समान थे, इस कारण अदालत ने सभी याचिकाओं की सुनवाई साथ-साथ करने का फैसला लिया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से पैनल अधिवक्ता अपूर्वा निगम ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि एलबी संवर्ग के कर्मचारियों को क्रमोन्नत वेतनमान देने वाला मुद्दा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा पहले ही तय किया जा चुका है। राज्य पक्ष ने अपनी दलील को पुख्ता करते हुए ‘आभा नामदेव बनाम छत्तीसगढ़ राज्य’ तथा ‘पुष्पलता मानिकपुरी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य’ मामलों के फैसलों का विशेष उल्लेख किया। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 2017 के परिपत्र के तहत एलबी संवर्ग के इन शिक्षकों का दावा मान्य नहीं है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में माना कि यह वर्तमान याचिकाएं पूर्व में निपटाए गए मामलों के ही समान हैं। पूर्व में आए फैसलों के सिद्धांत इस मामले पर भी पूरी तरह लागू होते हैं। इसी आधार को मानते हुए हाईकोर्ट ने सातों शिक्षकों व व्याख्याताओं की क्रमोन्नत वेतनमान संबंधी रिट याचिकाएं खारिज कर दीं।







