निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती : मुख्य सचिव स्तर से आदेश, जमीनी अमल की मांग तेज..

छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों द्वारा फीस की मनमानी वसूली और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ चल रही मुहिम अब असर दिखाने लगी है। रंजेश सिंह के नेतृत्व में लगातार किए गए प्रयासों के बाद पहले विभागीय स्तर पर कार्रवाई हुई और अब शासन के उच्च स्तर से भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

राज्य के लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों के बाद अब छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रालय (महानदी भवन) से मुख्य सचिव स्तर पर आदेश जारी कर पूरे प्रदेश में नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम 2020 का सख्ती से पालन किया जाए। सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि हर निजी स्कूल में फीस विनियमन समिति का गठन अनिवार्य रूप से किया जाए। साथ ही, किसी भी स्कूल द्वारा 8 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि बिना जिला फीस समिति की अनुमति के नहीं की जा सकेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए रंजेश सिंह ने इसे प्रदेश के लाखों अभिभावकों और विद्यार्थियों के हित में बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर उन्होंने लगातार अधिकारियों और शासन स्तर पर शिकायतें और ज्ञापन दिए, जिसके परिणामस्वरूप अब सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि आदेश केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह चिंता भी जताई कि पहले भी कई बार आदेश जारी हुए, लेकिन कुछ निजी स्कूलों ने नियमों की अनदेखी जारी रखी, जिससे अभिभावकों को राहत नहीं मिल पाई।

रंजेश सिंह ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से नियमित निगरानी और जांच की मांग की, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तुरंत रोक लगाई जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निजी स्कूलों द्वारा अवैध फीस वसूली जारी रही, तो एनएसयूआई उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।

उन्होंने अंत में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है और अभिभावकों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।