सुंदरकांड पाठ में भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक परंपराओं पर हुई चर्चाहिंदुत्व जीवन मूल्यों, सहअस्तित्व और मानवता का संदेश : ललित अग्रवाल

बिलासपुर। जेपी विहार स्थित एक धार्मिक आयोजन में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और हिंदुत्व के मूल स्वरूप पर विस्तृत चर्चा की गई। युगाब्द 5128, पुरुषोत्तम मास, ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी के पावन अवसर पर आयोजित सतत सुंदरकांड पाठ के 209वें आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम में सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ के बाद उपस्थित जनसमूह को भारतीय संस्कृति और उसके वैज्ञानिक एवं सामाजिक पक्षों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का आयोजन जेपी विहार निवासी सरिता मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, प्रीति मिश्रा एवं आरना मिश्रा के निवास पर किया गया। धार्मिक वातावरण में संपन्न हुए इस आयोजन में क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर वक्ता ललित अग्रवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति और हिंदुत्व को समझने के लिए उसके वास्तविक स्वरूप को जानना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व केवल पूजा-पद्धति या किसी एक धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक ऐसी पद्धति है जो मानवता, सहअस्तित्व, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देती है।

उन्होंने बताया कि भारतीय सभ्यता का विकास नदियों के किनारे हुआ है और प्राचीन ग्रंथों में नदियों को ‘सिंधु’ कहा गया है। इसी आधार पर इस भूभाग को सिंधुस्थान कहा गया, जो कालांतर में उच्चारण परिवर्तन के साथ हिंदुस्थान के रूप में प्रचलित हुआ। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता, सहिष्णुता और समावेशी संस्कृति से रही है।

धर्म का अर्थ केवल पूजा नहीं, बल्कि कर्तव्य भी..

अपने संबोधन में ललित अग्रवाल ने कहा कि धर्म का वास्तविक अर्थ केवल पूजा-अर्चना या धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। धर्म वह आचरण है जो समाज और मानवता के हित में हो। प्यासे को पानी पिलाना, जरूरतमंदों की सहायता करना, बुजुर्गों का सम्मान करना, रोगियों और असहाय लोगों की सेवा करना भी धर्म का ही स्वरूप है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जैसे आदर्शों को महत्व देती रही है। यही कारण है कि यहां विभिन्न मत, पंथ और पूजा-पद्धतियों के लोग सदियों से साथ रहते आए हैं।

भारतीय परंपराओं में छिपा है वैज्ञानिक दृष्टिकोण..

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि भारतीय परंपराओं के पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि अनेक वैज्ञानिक और सामाजिक कारण भी निहित हैं। परिवार, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए विकसित की गई अनेक परंपराएं आज भी प्रासंगिक हैं। भारतीय संस्कृति सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देती है।

श्रद्धा और भक्ति के माहौल में हुआ सुंदरकांड पाठ..

शुभम विहार मानस मंडली के तत्वावधान में आयोजित सतत सुंदरकांड पाठ के 209वें आयोजन में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

इस अवसर पर अखिलानंद पांडेय, ललित हीरालाल गर्ग, अखिलेश द्विवेदी, ए.के. स्वर्णकार, प्रमोद अवस्थी, सुरेंद्र दुबे, भूपेंद्र यादव, विजय मिश्रा, संतोष तिवारी, सोहन सिंह ठाकुर सहित जेपी विहार के अनेक धर्मनिष्ठ एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने समाज में सद्भाव, संस्कार और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।