

बिलासपुर के कोटा और मस्तूरी ब्लॉक में बड़ा फर्जीवाड़ा..ओबीसी और अन्य वर्ग के लोग कागजों में बन गए विशेष पिछड़ी जनजाति..

बिलासपुर।बिलासपुर जिले में सरकारी नौकरी पाने के लिए एक बेहद चौंकाने वाले फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जिले के कोटा और मस्तूरी ब्लॉक में ओबीसी और अन्य जातियों के लोग विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर मजे से सरकारी नौकरी कर रहे हैं। सबसे ज्यादा सेंधमारी शिक्षाकर्मी के पदों पर हुई है। जनपद पंचायत की कार्रवाई के बाद भी यह खेल पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है।
मस्तूरी में बैगा हैं ही नहीं, फिर भी बनी रिपोर्ट..
इस फर्जीवाड़े में सबसे हैरान करने वाला मामला मस्तूरी ब्लॉक का है। सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों के मुताबिक, साल 2015-16 में बैगा जनजाति का एक सर्वे हुआ था। इस सर्वे में मस्तूरी क्षेत्र में एक भी बैगा परिवार निवासरत नहीं पाया गया। खुद विभागीय मंत्री ने विधानसभा सत्र के दौरान यह साफ किया था कि मस्तूरी इलाके में बैगा विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग नहीं रहते। इसके बावजूद, इस ब्लॉक से दर्जनों लोगों ने बैगा होने के फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिए और सरकारी पदों पर नियुक्त भी हो गए।
कागजों में ढीमर-ओबीसी, नौकरी के लिए बने बैगा..
जांच में सामने आया है कि नौकरी हथियाने वालों ने सिस्टम को बुरी तरह चकमा दिया है। जिन लोगों के पास बैगा जनजाति का प्रमाण पत्र मिला है, उनके पूर्वजों की जाति पुराने राजस्व रिकॉर्ड, स्कूल दाखिला रजिस्टर और चुनाव दस्तावेजों में अलग दर्ज है। दस्तावेजों में ये लोग साफ तौर पर ढीमर या ओबीसी वर्ग के दर्ज हैं। फर्जीवाड़ा इस कदर है कि कुछ मामलों में पति और पत्नी की जाति ही अलग-अलग पाई गई है।
गोंड़, भूमिया और उरांव जाति के लोग भी फर्जी बैगा बनकर नौकरी ले रहे हैं। बताया जाता है कि 1949 से पहले ढीमर समुदाय के कुछ लोग खुद को बैगा बताने की प्रवृत्ति रखते थे, उसी का फायदा अब उठाया जा रहा है। 2011 की जनगणना के मुताबिक असली बैगा जनजाति की आबादी महज 89,744 है, जिनके अधिकारों पर फर्जी लोग डाका डाल रहे हैं।
रडार पर बेलगहना के ये गांव..
कोटा ब्लॉक में पहले भी शिकायत होने पर 13 लोगों को नौकरी से बर्खास्त किया गया था, लेकिन फर्जीवाड़ा अभी जारी है। कोटा ब्लॉक की तहसील बेलगहना के आसपास की दर्जनों पंचायतों में विशेष जांच की सख्त जरूरत है। इनमें बहेरामुड़ा, लुफा, दालसागर, बासाझाल, अखराडॉड, लठौरी, चॉटीड़ाड, करहीकछार, छुईहा, चूनाखोदरा, लमनाझार, खसरियापारा, गोंड़पारा (कंचनपुर), टांटीधार, चिखलाडबरी, खैरझिटी, बानाबेल, उपका, मीनी मोहल्ला और दवनपुर जैसे कई गांव शामिल हैं।
कमिश्नर ने दिए जांच के सख्त निर्देश..
मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। बिलासपुर संभाग के कमिश्नर सुनील कुमार जैन ने बताया कि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने की पुख्ता शिकायतें मिली हैं। सभी संबंधित विभागों को पत्र भेजकर जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। नियम अनुसार फर्जीवाड़ा करने वालों पर कड़ी सजा की तैयारी है।
दूसरी ओर, आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता वाली हाई-पावर स्क्रूटनी कमेटी (छानबीन समिति) भी एक्शन में है। कमेटी ने हाल ही में 19 मामलों की समीक्षा की। इनमें से सात मामलों में सुनवाई पूरी कर चार पर आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।



