सरकारी डॉक्टर ने मरीज को भेजा प्राइवेट अस्पताल, ऑपरेशन के बाद मौत; अब कलेक्टर की जांच के बाद नर्सिंग होम पर गिरेगी गाज..

बिलासपुर। रतनपुर में लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां सरकारी अस्पताल में इलाज कराने गई एक 50 वर्षीय महिला को डॉक्टर ने प्राइवेट नर्सिंग होम भेज दिया। वहां ऑपरेशन के बाद महिला की मौत हो गई। इस मामले में परिजनों के भारी हंगामे के बाद बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आते ही दोषी डॉक्टर और निजी अस्पताल पर बड़ी गाज गिरेगी।

क्या है पूरा मामला ?

परिजनों के मुताबिक, 50 साल की कुमारी बाई को 3 जून को पेट दर्द की शिकायत हुई थी। इलाज के लिए उन्हें रतनपुर के सरकारी अस्पताल (सीएचसी) ले जाया गया। आरोप है कि वहां तैनात महिला डॉक्टर नेहल झा ने मरीज को सरकारी व्यवस्था में इलाज देने के बजाय ‘मातृका नर्सिंग होम’ बुला लिया। इसके बाद बिलासपुर के एक डायग्नोस्टिक सेंटर में सोनोग्राफी कराई गई। रिपोर्ट देखकर डॉक्टर ने बताया कि बच्चेदानी निकालने का ऑपरेशन करना पड़ेगा, जिसका खर्च 38 हजार रुपए आएगा। परिजनों से 15 हजार रुपए एडवांस भी जमा करा लिए गए।

प्राइवेट अस्पताल में बिगड़ी हालत..

6 जून को इस प्राइवेट नर्सिंग होम में महिला का ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। अस्पताल प्रबंधन ने बीपी गिरने का हवाला देकर मरीज को सिम्स (CIMS) रेफर कर दिया। हालांकि, परिजनों का साफ तौर पर आरोप है कि अस्पताल से रेफर करने से पहले ही महिला की मौत हो चुकी थी।

सिम्स में हंगामें के बाद प्रशासन का एक्शन..

रविवार को जब सिम्स में 6 डॉक्टरों की टीम शव का पोस्टमार्टम कर रही थी, तब परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर बवाल मचाया और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

मामले की गंभीरता और लोगों के गुस्से को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सीएमएचओ को तुरंत जांच के निर्देश दिए हैं। सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल ने बताया कि रविवार की छुट्टी होने की वजह से टीम नहीं बन पाई थी। सोमवार को एक विशेष टीम बनाकर मामले की जांच कराई जाएगी।