10 महीने से वेतन नहीं, स्कूल में शिक्षक के कथित नशे का वीडियो वायरल ; शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर सवाल.. देखें वॉयरल वीडियो..

बहेरामुड़ा के सरकारी स्कूल का मामला: वीडियो में शिक्षक से शराब पीकर स्कूल आने पर सवाल, वेतन नहीं मिलने की बात कहते दिखे; अब शिक्षक के आचरण के साथ भुगतान व्यवस्था की जांच भी जरूरी..

बिलासपुर/कोटा। शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक की भूमिका बच्चों के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में कोटा ब्लॉक के बहेरामुड़ा स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला से सामने आया एक वायरल वीडियो शिक्षा विभाग के सामने एक साथ कई सवाल खड़े कर रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति, जिसकी पहचान स्कूल के प्रधान पाठक के रूप में बताई जा रही है, कथित तौर पर नशे की हालत में नजर आ रहा है। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति उससे शराब पीकर स्कूल आने को लेकर सवाल करता दिखाई देता है। जवाब में संबंधित व्यक्ति बार-बार पिछले 10 महीने से वेतन नहीं मिलने की बात कहता नजर आता है।

वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान तथा घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी। यही वजह है कि पूरे मामले में केवल वायरल वीडियो के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय विभागीय जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

वीडियो में वेतन नहीं मिलने का दावा..

वायरल वीडियो में संबंधित व्यक्ति से यह पूछा जाता है कि शराब पीकर स्कूल आना क्या उचित है और ऐसी स्थिति में वह बच्चों को क्या संस्कार देंगे। वीडियो में वह इन सवालों के जवाब में अपने वेतन का मुद्दा उठाते हुए करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने की बात कहता दिखाई देता है।

देखें वॉयरल वीडियो..

वीडियो में सवाल-जवाब के दौरान संबंधित व्यक्ति द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि, इस हिस्से की भी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित होने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और संबंधित शिक्षक के आचरण को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

पहले यह स्पष्ट हो कि वीडियो में कौन है..

वीडियो में संबंधित व्यक्ति अपना नाम सीएस राज बताते हुए स्वयं को स्कूल का प्रधान पाठक बता रहा है। दूसरी ओर विभागीय स्तर पर मिली जानकारी में संबंधित शिक्षक का नाम प्रदीप कुमार पेंद्रो बताया जा रहा है। ऐसे में शिक्षा विभाग के सामने सबसे पहला सवाल यही है कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति वास्तव में कौन है, उसकी पदस्थापना क्या है और विद्यालय में उसकी जिम्मेदारी क्या है। जब तक विभाग इस पहचान और पदस्थापना की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता, तब तक वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

10 महीने से वेतन नहीं मिला तो जिम्मेदारी किसकी?

इस मामले का दूसरा और महत्वपूर्ण पहलू वेतन भुगतान से जुड़ा है। विभागीय जानकारी के अनुसार बहेरामुड़ा का स्कूल अनुदान प्राप्त संस्था है और यहां सीमित शिक्षकीय स्टाफ के बीच स्कूल संचालित हो रहा है। बताया जा रहा है कि शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से संबंधित है।

यदि संबंधित शिक्षक का वास्तव में 10 महीने से वेतन लंबित है तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय है। सवाल यह है कि वेतन भुगतान में इतनी लंबी देरी क्यों हुई? क्या शिक्षक ने पहले इसकी शिकायत की थी? यदि शिकायत की गई थी तो उसका निराकरण क्यों नहीं हुआ? और यदि विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी तो कर्मचारियों की निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

इन सवालों का जवाब केवल शिक्षक के कथित आचरण की जांच से नहीं मिलेगा, बल्कि वेतन से संबंधित रिकॉर्ड और विभागीय पत्राचार की जांच भी जरूरी होगी।

नशे में स्कूल आने का आरोप भी गंभीर..

वेतन नहीं मिलने का दावा अपनी जगह है, लेकिन यदि जांच में यह साबित होता है कि संबंधित शिक्षक शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे थे और बच्चों के सामने अनुशासनहीन व्यवहार किया, तो यह भी गंभीर विभागीय मामला होगा। किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत या आर्थिक परेशानी विद्यालय में उसके कर्तव्यों और आचरण को प्रभावित करने का आधार नहीं बन सकती।

वायरल वीडियो में संबंधित व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर यह कहते हुए भी सुना जा रहा है कि अधिक से अधिक उसे स्कूल से बाहर किया जा सकता है। यदि यह कथन वीडियो और जांच में प्रमाणित होता है तो विभागीय अनुशासन के प्रति संबंधित कर्मचारी के रवैये की भी जांच जरूरी होगी।

जांच का दायरा सिर्फ शिक्षक तक सीमित न रहे..

मामले में अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। यदि विभाग केवल वायरल वीडियो के आधार पर शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करता है और 10 महीने से वेतन नहीं मिलने के दावे की जांच नहीं करता, तो मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू अनदेखा रह जाएगा। वहीं, यदि वेतन वास्तव में लंबित है तो उसके कारण और जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।

घटनाक्रम की निष्पक्ष तस्वीर के लिए विद्यालय के अन्य शिक्षकों-कर्मचारियों से जानकारी लेने के साथ ही उपलब्ध उपस्थिति रजिस्टर, वेतन भुगतान रिकॉर्ड, बैंक संबंधी दस्तावेज और विभागीय पत्राचार की जांच की जा सकती है। नशे की स्थिति में स्कूल आने के आरोप की पुष्टि के लिए भी विभाग को उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर जांच करनी होगी।

अब विभाग के सामने दोहरी जवाबदेही..

बहेरामुड़ा का मामला फिलहाल एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ है, लेकिन इसके साथ दो अलग-अलग सवाल जुड़ गए हैं – पहला, क्या शिक्षक विद्यालय में अनुशासन और मर्यादा का पालन कर रहे थे? दूसरा, क्या एक शिक्षक को वास्तव में 10 महीने तक वेतन नहीं मिला?

दोनों सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। शिक्षक का आचरण गलत पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं वेतन भुगतान में विभागीय लापरवाही सामने आने पर संबंधित जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। बच्चों की शिक्षा और विद्यालय का अनुशासन दोनों ही किसी भी प्रशासनिक विवाद से ऊपर हैं। अब निगाह शिक्षा विभाग की जांच पर है कि वह वायरल वीडियो की सच्चाई के साथ-साथ वेतन भुगतान से जुड़े दावे की भी कितनी गंभीरता से पड़ताल करता है।