बिलासपुर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। जस्टिस पीपी साहू की बेंच ने कहा है कि तहसीलदार के पास जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार नहीं है। इस कार्य के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) ही अधिकृत और सक्षम अधिकारी हैं। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को यह निर्देश दिया है कि वे नियमों और प्रावधानों का पालन करते हुए सक्षम अधिकारी के समक्ष अपने दस्तावेजों के साथ नया आवेदन पत्र प्रस्तुत करें।

बिलासपुर से दायर हुई थी याचिका..
यह पूरा मामला बिलासपुर जिले से संबंधित है। शहर के राजकिशोर नगर क्षेत्र में निवासरत महिला शैली सोनकर ने हाईकोर्ट में एक याचिका प्रस्तुत की थी।याचिकाकर्ता ने न्यायालय से यह मांग की थी कि उनका जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए संबंधित विभाग को निर्देशित किया जाए। इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से भी पक्ष रखा गया। शासन की ओर से न्यायालय को बताया गया कि राज्य के नियमों के अनुसार जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी एसडीएम हैं। शासन ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की तरफ से ऐसा कोई भी दस्तावेज अदालत में पेश नहीं किया गया है, जिससे यह साबित होता हो कि उन्होंने प्रमाण पत्र के लिए सक्षम प्राधिकारी के पास कभी आवेदन किया था।
तहसीलदार के पास किया था आवेदन, शुरू हुई थी प्रक्रिया..
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने न्यायालय को बताया कि उन्होंने अपना जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बिलासपुर के तहसीलदार को आवेदन दिया था। तहसीलदार द्वारा इस आवेदन पर बाकायदा मामला दर्ज किया गया और आगे की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि आवेदन किए जाने और प्रक्रिया शुरू होने के बाद काफी लंबा समय बीत गया, लेकिन विभाग की ओर से उन्हें जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया। इसी वजह से उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
2013 के अधिनियम का दिया गया हवाला..
हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना आदेश पारित किया। न्यायालय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक स्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम, 2013 लागू है। इसके अलावा राज्य सरकार ने 24 सितंबर 2013 को एक सर्कुलर भी जारी किया था। इन दोनों के प्रावधानों के तहत जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार केवल अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के पास ही है। तहसीलदार इस नियम के दायरे में प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकते।
30 दिन के भीतर नया आवेदन जमा करने की छूट..
याचिकाकर्ता की परेशानी को देखते हुए हाईकोर्ट ने मामले में उन्हें राहत भी दी है। न्यायालय ने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता को यह छूट दी जाती है कि वे अगले 30 दिनों के भीतर अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ सक्षम अधिकारी के पास एक नया आवेदन जमा करें। इसके साथ ही कोर्ट ने सक्षम अधिकारी को भी यह निर्देशित किया है कि जैसे ही उनके पास नया आवेदन प्रस्तुत किया जाता है, वे नियमों और कानूनों के तहत उस पर जल्द से जल्द विचार करें और अपना निर्णय लें।







