टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में अवैध कब्जों पर बड़ा एक्शन : 166 आरोपियों की अग्रिम जमानत खारिज, अब 50 हजार कंटूर ट्रेंच बनाकर फिर से बसाया जाएगा जंगल..

गरियाबंद। वन संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा को लेकर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रशासन को बड़ी कानूनी सफलता मिली है। टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में अवैध अतिक्रमण, पेड़ों की कटाई और जंगल को नुकसान पहुंचाने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय धमतरी ने सभी 166 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसके बाद अब आरोपियों की गिरफ्तारी और वैधानिक कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

जानकारी के मुताबिक, पहले 31 आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे 2 मई 2026 को न्यायालय ने निरस्त कर दिया था। इसके बाद शेष 135 आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी 8 मई 2026 को खारिज कर दी गईं। इस फैसले को वन विभाग की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

106 हेक्टेयर तक फैल गया था अतिक्रमण..

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने टाइगर रिजर्व के संरक्षित कोर क्षेत्र में वर्षों से अवैध कब्जा कर जंगल को भारी नुकसान पहुंचाया। उपग्रह चित्रों और वन विभाग की जांच के अनुसार वर्ष 2011 से शुरू हुआ अतिक्रमण धीरे-धीरे बढ़कर करीब 106 हेक्टेयर क्षेत्र तक फैल गया।

वन विभाग ने मौके से गंभीर वन क्षति के प्रमाण भी जुटाए हैं। जांच में पता चला कि लगभग 574 पेड़ों को चारों ओर से घेरकर सुखाया गया, 237 पेड़ों की कटाई की गई और कई स्थानों पर ठूंठ जलाने के साक्ष्य भी मिले हैं।

ISRO की सैटेलाइट रिपोर्ट से खुलासा..

मामले की जांच में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से प्राप्त CARTOSAT उपग्रह चित्रों का भी इस्तेमाल किया गया। विश्लेषण में स्पष्ट हुआ कि वर्ष 2008 से 2022 के बीच प्रभावित क्षेत्र में लगातार वन आच्छादन कम हुआ है। हाल ही में सुखाए गए पेड़, जले हुए ठूंठ और अन्य वन क्षति सामग्री को साक्ष्य के रूप में जब्त किया गया है।

वन कानूनों के तहत होगी कड़ी कार्रवाई..

वन विभाग ने सभी 166 आरोपियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35 सहित Wildlife Protection Act, 1972 और Indian Forest Act, 1927 के तहत नोटिस जारी किए हैं। कुछ आरोपियों ने अपने लिखित जवाब में यह स्वीकार भी किया है कि उनके पास कब्जे वाली वन भूमि का कोई वैध स्वामित्व दस्तावेज नहीं है। वहीं कई आरोपी जांच में सहयोग भी नहीं कर रहे हैं।

CG Bhuiyyan App के जरिए की गई जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश आरोपियों के पास टाइगर रिजर्व क्षेत्र के बाहर निजी जमीन पहले से मौजूद है।

श्रमदान से फिर हरा-भरा होगा जंगल..

वन विभाग अब क्षतिग्रस्त 106 हेक्टेयर क्षेत्र के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के लिए बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है। इसके तहत करीब 50 हजार जल संरक्षण संरचनाएं बनाई जाएंगी, जिनमें कंटूर ट्रेंच, कंटूर बंड और ब्रशवुड चेक डैम शामिल हैं। यह कार्य श्रमदान के माध्यम से किया जाएगा।

इसके साथ ही जंगल में बड़े पैमाने पर फलदार और स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे ताकि वन्यजीवों को भोजन उपलब्ध हो सके और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान केवल अवैध अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र को फिर से प्राकृतिक रूप से विकसित करने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जाएंगे।