रायगढ़। वन विभाग की इस कार्रवाई से जिले में सक्रिय रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वन क्षेत्र में अवैध खनन, रेत तस्करी और प्राकृतिक संसाधनों की चोरी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि अवैध खनन और तस्करी के खिलाफ यह विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा तथा वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जंगल के गुप्त मार्ग से चल रहा था अवैध कारोबार..


वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत बैहामुडा के पास स्थित कुरकुट नदी से बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन किया जा रहा था। रेत माफियाओं ने तस्करी के लिए घने जंगल के बीच से एक गुप्त मार्ग तैयार कर लिया था। इसका मुख्य उद्देश्य मुख्य सड़कों और जांच चौकियों से बचते हुए आसानी से रेत का परिवहन करना था। लंबे समय से इसी जंगल के रास्ते अवैध रूप से रेत की निकासी और यह कारोबार संचालित किया जा रहा था।
घेराबंदी कर योजनाबद्ध तरीके से दी गई दबिश..

लंबे समय से चल रहे इस खेल की सूचना मिलने पर वन विभाग ने तस्करों के मंसूबों पर पानी फेरने की योजना बनाई। वनमंडलाधिकारी अरविंद पी.एम.के निर्देशन, उप वनमंडलाधिकारी घरघोड़ा आशुतोष मांडवा के मार्गदर्शन तथा वनपरीक्षेत्र अधिकारी विक्रांत कुमार के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने एक विशेष अभियान चलाया। वन अमले ने जंगल के विभिन्न हिस्सों में घेराबंदी कर योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी। मौके पर बिना वैध अनुमति एवं बिना परिवहन पास के रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन करते हुए 12 ट्रैक्टरों को पकड़ा गया।
दस्तावेजों का सत्यापन और कानूनी कार्रवाई जारी..
कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम को देखकर कई तस्करों ने मौके से भागने की कोशिश की, लेकिन विभाग ने रेत से लदे सभी 12 ट्रैक्टरों को अपने कब्जे में ले लिया। जब्त किए गए इन सभी वाहनों को घरघोड़ा वन परिक्षेत्र कार्यालय लाया गया है, जहां उनकी जांच और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। वन विभाग ने इस मामले में भारतीय वन अधिनियम के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया है। अब इसमें शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।







