तोरवा मुक्तिधाम में वेदी पर रखकर मंत्रोच्चार के साथ कराया गया दाह संस्कार; स्थानीय लोगों ने जताई आपत्ति, पार्षद ने पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की..

बिलासपुर। तोरवा स्थित मुक्तिधाम में शुक्रवार सुबह एक पालतू कुत्ते के दाह संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया। एक परिवार द्वारा अपने पालतू कुत्ते का इंसानों की तरह धार्मिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ अंतिम संस्कार कराए जाने की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। मामला इतना बढ़ गया कि क्षेत्र के पार्षद मोती गंगवानी भी मौके पर पहुंचे और वार्डवासियों के साथ आपत्ति जताते हुए बाद में तोरवा थाने पहुंचकर पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह एक परिवार अपने पालतू कुत्ते के शव को लेकर तोरवा मुक्तिधाम पहुंचा। यहां कुत्ते को इंसानों के अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल होने वाली वेदी पर रखा गया और धार्मिक कर्मकांड तथा मंत्रोच्चार के बीच दाह संस्कार किया गया। मुक्तिधाम में इस तरह की गतिविधि की जानकारी आसपास के लोगों को मिली तो वे मौके पर पहुंचने लगे। देखते ही देखते वहां विरोध की स्थिति बन गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुक्तिधाम इंसानों के अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित स्थान है। ऐसे में वहां पालतू जानवर का दाह संस्कार कराए जाने से वे असहमत हैं। लोगों ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि यदि मुक्तिधाम में पशुओं के अंतिम संस्कार की अनुमति है तो इसके लिए क्या कोई निर्धारित नियम या व्यवस्था है।
पार्षद पहुंचे मौके पर, थाने में की शिकायत..
मामले की जानकारी मिलने के बाद वार्ड पार्षद मोती गंगवानी भी तोरवा मुक्तिधाम पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और मुक्तिधाम में जानवरों के दाह संस्कार पर आपत्ति जताई। इसके बाद वे वार्डवासियों के साथ तोरवा थाना पहुंचे और पुलिस से मामले में हस्तक्षेप करते हुए ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की।
पार्षद और स्थानीय लोगों का कहना है कि मुक्तिधाम की व्यवस्था और उसके उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम होने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह का विवाद दोबारा खड़ा न हो। उन्होंने संबंधित लोगों की भूमिका की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की है।
मामले ने खड़े किए व्यवस्था पर सवाल..
इस घटना के बाद शहर में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि पालतू पशुओं की मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए नगर में क्या निर्धारित व्यवस्था है। पालतू जानवरों से भावनात्मक लगाव रखने वाले परिवार उनके सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार की इच्छा रखते हैं, लेकिन इसके लिए अलग और व्यवस्थित स्थान होने की जरूरत भी सामने आ रही है।
फिलहाल तोरवा मुक्तिधाम में हुए इस घटनाक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। अब पुलिस और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि मुक्तिधाम में पालतू कुत्ते का दाह संस्कार किन परिस्थितियों में कराया गया और इसके लिए किसी नियम या अनुमति का पालन किया गया था या नहीं।







