कॉलेज के पास 50 रुपए की गांजा पुड़िया! स्टिंग वीडियो ने उठाए नशे की उपलब्धता और निगरानी पर सवाल.. देखें वीडियो..

ग्राहक बनकर पहुंची टीम का दावा- दुकान से आसानी से मिली गांजे की पुड़िया, सकरी इलाके का भी वीडियो में जिक्र..

बिलासपुर। शहर में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बीच सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर सामने आए एक कथित स्टिंग वीडियो ने गांजे की अवैध बिक्री को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक टीम ग्राहक बनकर दुकानों तक पहुंचती दिखाई दे रही है और दावा किया गया है कि शहर के कुछ इलाकों में गांजा छोटी-छोटी दुकानों और गली-मोहल्लों में आसानी से उपलब्ध है। वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सामने आए दावों की पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

डीपी कॉलेज के पास दुकान में बिक्री का दावा..

वीडियो में पहला मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का बताया गया है। इसमें दावा किया गया है कि डीपी कॉलेज से करीब 100 मीटर की दूरी पर मुख्य सड़क किनारे संचालित एक दुकान में टीम ग्राहक बनकर पहुंची। वीडियो में दुकान के कर्मचारी से गांजा मांगे जाने के बाद कथित तौर पर 50 रुपए की पुड़िया उपलब्ध कराते हुए दिखाया गया है।

देखें वीडियो..

यदि वीडियो में किया गया दावा जांच में सही पाया जाता है, तो शिक्षण संस्थान के आसपास मादक पदार्थ की कथित उपलब्धता का मामला गंभीर माना जाएगा। कॉलेज और स्कूलों के आसपास नशे की पहुंच रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सकरी क्षेत्र का भी वीडियो में जिक्र.. देखें वीडियो..

कथित स्टिंग में इसके बाद सकरी थाना क्षेत्र का भी उल्लेख किया गया है। वीडियो में एक अन्य दुकान से गांजा आसानी से मिलने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दोनों स्थानों पर वास्तव में प्रतिबंधित मादक पदार्थ की बिक्री हो रही थी या नहीं, इसकी पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।

कार्रवाई के बावजूद फुटकर बिक्री का सवाल..

बिलासपुर पुलिस की ओर से समय-समय पर गांजा, नशीली गोलियों और दूसरे मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आती रही है। इसके बावजूद यदि शहर के अलग-अलग हिस्सों में गांजे की कथित फुटकर बिक्री का वीडियो सामने आता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि स्थानीय स्तर पर इसकी निगरानी किस तरह हो रही है।

खासकर शिक्षण संस्थानों के आसपास नशे की कथित उपलब्धता को लेकर अभिभावकों और विद्यार्थियों की चिंता बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में केवल वीडियो में दिख रहे कथित विक्रेता तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि मादक पदार्थ वहां तक कैसे पहुंच रहा है।

वीडियो की जांच से सामने आ सकती है पूरी तस्वीर..

वीडियो सामने आने के बाद अब पुलिस के सामने दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। पहला, वीडियो में दिखाई गई दुकानों और स्थानों की वास्तविकता की जांच और दूसरा, यदि वहां मादक पदार्थ की बिक्री की पुष्टि होती है तो उसके स्रोत और सप्लाई नेटवर्क का पता लगाना।

पुलिस यदि वीडियो के आधार पर जांच करती है तो संबंधित दुकानों की निगरानी, मौके पर सत्यापन और आसपास के क्षेत्र में मादक पदार्थों की उपलब्धता की पड़ताल से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। साथ ही यह भी सामने आ सकता है कि वीडियो में लगाए गए आरोप वास्तविक हैं या किसी अन्य संदर्भ में प्रस्तुत किए गए हैं।

फिलहाल यह वीडियो शहर में नशे की कथित फुटकर बिक्री को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब निगाह पुलिस की जांच और कार्रवाई पर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वीडियो में किए गए दावे कितने सही हैं और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इस कारोबार के पीछे कौन लोग और कौन-सा नेटवर्क सक्रिय है।