बेलतरा में अवैध खनन पर सख्ती की उम्मीद : सीएम के निर्देश के बाद संयुक्त टीम गठित, लेकिन जनता में अब भी संशय..

बिलासपुर। बेलतरा क्षेत्र में अवैध खनन का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में हुई दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर कब तक किसी बड़ी दुर्घटना या निर्दोष की मौत के बाद ही कार्रवाई होगी।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर पुलिस, राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम गठित करने की घोषणा की गई है। कागजों में यह कदम सख्त दिखाई दे रहा है, लेकिन आम लोगों के मन में अब भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह कार्रवाई जमीन पर असर दिखाएगी या सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी।

इस पूरे मामले को प्रमुखता से उठाने वाले कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि बेलतरा में लंबे समय से खनन माफियाओं का दबदबा बना हुआ है। पहले भी सरवन देवरी रेत घाट में नायब तहसीलदार राहुल साहू पर जानलेवा हमला करने की कोशिश हो चुकी है, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

गौरहा का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती बरती जाती, तो शायद नाबालिग अमित कश्यप की जान बचाई जा सकती थी। लगातार हो रही घटनाओं से साफ है कि जिम्मेदार विभाग अपने कर्तव्यों को लेकर गंभीर नहीं हैं, जिससे क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में अवैध खनन से जुड़े हादसों में 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकतर बच्चे और युवा शामिल हैं। जिले में केवल 4 रेत घाटों को अनुमति है, लेकिन हकीकत में 24 से अधिक स्थानों पर अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है।

कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यदि संयुक्त टीम ईमानदारी और निष्पक्षता से काम करती है, तो वे स्वयं सरकार और प्रशासन का आभार व्यक्त करेंगे। लेकिन यदि यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा साबित होती है, तो कांग्रेस इस मुद्दे को और मजबूती से जनता के बीच उठाएगी।

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन अब सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उनके जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। तेज रफ्तार डंपर, बिना सुरक्षा के खनन और प्रशासन की अनदेखी ने कई परिवारों को दुख दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बेलतरा में खनन माफियाओं पर वास्तव में लगाम लग पाएगी या यह पहल भी कुछ दिनों बाद ठंडी पड़ जाएगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।