बिलासपुर। आरक्षण नीति समेत उच्च शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े विभिन्न कानूनों में वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप समीक्षा और आवश्यक सुधार की मांग को लेकर गुरुवार को समग्र सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के नाम जिलाधीश के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि संविधान की भावना के अनुरूप सभी नागरिकों को समान अवसर, न्याय और गरिमा मिलनी चाहिए तथा बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए नीतियों की समय-समय पर समीक्षा जरूरी है।


समाज की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था के वर्तमान स्वरूप की व्यापक समीक्षा करने और आरक्षण का आधार केवल जाति के बजाय आर्थिक एवं सामाजिक आवश्यकता को बनाने पर विचार करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। प्रतिनिधियों का कहना था कि आरक्षण व्यवस्था जिन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लागू की गई थी, उनमें समय के साथ काफी बदलाव आया है। ऐसे में सभी सामाजिक वर्गों से संवाद करते हुए वर्तमान व्यवस्था का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
कानूनों के दुरुपयोग पर रोक और निष्पक्ष जांच की मांग..
ज्ञापन में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के संबंध में भी सुधार की मांग की गई। समाज ने कहा कि कानून का उद्देश्य कमजोर और पीड़ित वर्गों को संरक्षण देना है, लेकिन इसके साथ ही निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष जांच की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रतिनिधियों ने कानून के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधानों पर विचार करने की मांग की।
उच्च शिक्षा में समान अवसर पर जोर..
समग्र सवर्ण समाज ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से संबंधित नियमों और उच्च शिक्षा संस्थानों की व्यवस्था में भी पारदर्शिता तथा समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग उठाई। प्रतिनिधियों ने कहा कि विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए निष्पक्ष प्रक्रिया होनी चाहिए और किसी भी छात्र के साथ भेदभाव की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
ज्ञापन में ‘रोहित वेमुला एक्ट’ के नाम से प्रस्तावित/संबंधित विधायी प्रावधानों के प्रभाव, संवैधानिक पहलुओं और व्यावहारिक कठिनाइयों की समीक्षा की मांग भी की गई। समाज ने कहा कि विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ शिक्षण संस्थानों में निष्पक्षता और संतुलित व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है।
विशेषज्ञ समिति और व्यापक संवाद की मांग..
समाज के प्रतिनिधियों ने केंद्र और राज्य सरकार से आरक्षण तथा इससे जुड़े कानूनों की व्यापक समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। उनका कहना था कि किसी भी बदलाव का फैसला जल्दबाजी में नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया, विशेषज्ञों की राय और सभी सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों से व्यापक संवाद के बाद किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी वर्ग के अधिकार छीनने के उद्देश्य से नहीं है। उनका कहना है कि वे समान अवसर, पारदर्शिता, निष्पक्षता और आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को वास्तविक सहायता मिलने की व्यवस्था चाहते हैं। समाज ने सरकार से सामाजिक समरसता और संवैधानिक न्याय की भावना को ध्यान में रखते हुए इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की अपेक्षा जताई।
कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद..
ज्ञापन सौंपने के दौरान समग्र सवर्ण समाज से जुड़े विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष अरविंद दीक्षित, सचिव राजेश शुक्ला, संयोजक मनोज तिवारी, अनिल तिवारी, संयोजक मनीष अग्रवाल, छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण विकास परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप शुक्ला, जगदीश त्रिवेदी, मनोज शुक्ला, गोपाल मिश्रा, संदीप बाजपेयी, दिव्य प्रकाश दुबे, विनय दीक्षित, रोशन अवस्थी, अनुग्रह मिश्रा, एसएन बाजपेयी और चुट्टू अवस्थी सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।

इसके अलावा सिंघी सेंटल पंचायत समाज के अध्यक्ष विनोद मेघानी, धनराज आहूजा, डी.डी. आहूजा, राजपूत क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष अजय सिंह परिहार, प्रियंक परिहार, खंडेलवाल समाज के अध्यक्ष आशीष खंडेलवाल, गुजराती समाज के अध्यक्ष केतन सुतारिया, अरविंद भानूशाली, हरि भाई पटेल, वितेंद्र पाठक, गोपाल जैन, पंजाबी समाज के अध्यक्ष परमजीत सिंह सलूजा, अमरजीत दुआ, नितिन छाबड़ा, राजेश आहूजा, चरणजीत गंभीर, राजेंद्र अग्रवाल राजू, कैलाश गुप्ता, वंदे मातरम मित्र मंडल के अध्यक्ष महेंद्र जैन, विंध्य ब्राह्मण समाज के आशुतोष मिश्रा, शुभम त्रिपाठी, मारवाड़ी ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष सुरेश शर्मा, ईश्वर तिवारी सहित बड़ी संख्या में समाज के सदस्य उपस्थित रहे।
समाज ने कहा कि आरक्षण, शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर सभी वर्गों की चिंताओं को सुनकर ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे सामाजिक भेदभाव कम हो और प्रत्येक नागरिक को समान अवसर एवं संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित हो सकें।







