अचानकमार क्षेत्र के प्रतिबंधित जंगल में पुटू-कारील लेने गए युवक की मौत, अब बढ़ाई गई निगरानी..

मानसून में जंगल प्रवेश बना जानलेवा, हिंसक वन्यप्राणी के हमले में 25 वर्षीय धरमजीत की गई जान ; परिजनों को 25 हजार रुपये की तत्काल सहायता, शेष 5.75 लाख पुलिस पीएम रिपोर्ट के बाद..

बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित वन क्षेत्र में पुटू और कारील जैसे वन उपज के संग्रहण के लिए गए ग्राम बांधा के एक युवक की हिंसक वन्यप्राणी के हमले में मौत हो गई। सोमवार सुबह करीब 7 बजे चार ग्रामीण युवक जंगल के अंदर पहुंचे थे। इसी दौरान रिजर्व के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 98 के पहाड़ी क्षेत्र में धरमजीत पिता राजेन्द्र धृतलहरे (25) पर हिंसक वन्यप्राणी ने हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवक को उसके साथ गए ग्रामीण जंगल से बाहर गांव की ओर लेकर आ रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के साथ ट्रैप कैमरे लगाने और गश्त तेज करने के निर्देश दिए हैं।

पुटू-कारील लेने पहुंचे थे चार ग्रामीण..

जानकारी के अनुसार ग्राम बांधा के चार नवयुवक मानसून के दौरान जंगल में मिलने वाले पुटू, कारील और अन्य वन उपज के संग्रहण के लिए अचानकमार टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित क्षेत्र में चले गए थे। पहाड़ी इलाके में पहुंचने के दौरान धरमजीत पर हिंसक वन्यप्राणी ने हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से साथ मौजूद ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। उन्होंने घायल धरमजीत को जंगल से बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।

घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम सक्रिय हुई। अचानकमार टाइगर रिजर्व के पैदल गार्ड को घटना की जानकारी मिलने पर लोरमी परिक्षेत्र के परिसर रक्षक के माध्यम से अधिकारियों को सूचना दी गई। प्रशिक्षण में मौजूद लोरमी के परिक्षेत्र अधिकारी तथा एसटीपीएफ के परिक्षेत्र अधिकारी को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। घटना की जानकारी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मुंगेली को भी दी गई।

मुआवजे की प्रक्रिया शुरू, 25 हजार की तत्काल सहायता..

घटना के बाद वन विभाग ने मृतक के परिवार को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग द्वारा 25 हजार रुपये की अग्रिम सहायता टीसीएफ से प्रदान की गई है। शेष 5.75 लाख रुपये की सहायता राशि पुलिस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। इस तरह परिवार को कुल 6 लाख रुपये की मुआवजा राशि दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

एसटीपीएफ, आरओ और एसडीओ की बैठक, निगरानी बढ़ाने के निर्देश..

घटना को गंभीरता से लेते हुए टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने क्षेत्र में वन्यप्राणी गतिविधियों की निगरानी बढ़ा दी है। एसटीपीएफ के सभी रेंज अधिकारियों (आरओ) और एसडीओ की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। संबंधित क्षेत्र में ट्रैप कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वन्यप्राणी की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और यह पता लगाया जा सके कि क्षेत्र में कौन-से वन्यप्राणी सक्रिय हैं।

इसके साथ ही संभावित बाघ गतिविधि को देखते हुए बाघ की मॉनिटरिंग के लिए गश्त बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। वन अमले को संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखने तथा ग्रामीणों की आवाजाही पर विशेष नजर रखने के लिए कहा गया है।

15 जून से 31 अक्टूबर तक प्रतिबंधित रहता है प्रवेश..

अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार मानसून अवधि में 15 जून से 31 अक्टूबर तक टाइगर रिजर्व के वन क्षेत्रों में प्रवेश प्रतिबंधित रहता है। इस दौरान जंगल में वन्यप्राणियों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं और पहाड़ी एवं घने वन क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करना बेहद जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसके बावजूद आसपास के कुछ ग्रामीण पुटू, कारील और अन्य वन उपज के संग्रहण के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र में चले जाते हैं।

वन विभाग का कहना है कि ग्रामीणों को लगातार समझाइश दी जा रही है कि प्रतिबंधित अवधि में जंगल में प्रवेश न करें। खासकर मानसून के दौरान वन क्षेत्र में वन्यप्राणियों की मौजूदगी को देखते हुए ग्रामीणों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

गांवों में मुनादी कर ग्रामीणों को किया जा रहा जागरूक..

घटना के बाद वन विभाग ने आसपास के गांवों में मुनादी कराई है। ग्रामीणों को स्पष्ट रूप से बताया जा रहा है कि मानसून अवधि में पुटू, कारील या अन्य वन उपज के संग्रहण के लिए अचानकमार टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश न करें। एसटीपीएफ और पैदल गार्ड की टीमें भी गांवों और जंगल से लगे इलाकों में लगातार गश्त करते हुए ग्रामीणों को समझाइश दे रही हैं।

वन विभाग ने कहा है कि अचानकमार टाइगर रिजर्व वन्यप्राणियों का सुरक्षित आवास होने के साथ ही संवेदनशील वन क्षेत्र भी है। प्रतिबंधित अवधि में बिना अनुमति जंगल में जाना जान के लिए खतरा बन सकता है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे वन क्षेत्र में प्रवेश से बचें और वन विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।

हादसे के बाद अब वन्यप्राणी की गतिविधियों पर नजर..

धरमजीत की मौत के बाद अब वन विभाग के सामने एक ओर जहां पीड़ित परिवार को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर उस क्षेत्र में सक्रिय हिंसक वन्यप्राणी की गतिविधियों पर नजर रखना भी चुनौती है। इसी को देखते हुए ट्रैप कैमरे लगाने, गश्त बढ़ाने और एसटीपीएफ की टीमों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का फोकस अब इस बात पर है कि जंगल के संवेदनशील क्षेत्रों में ग्रामीणों की आवाजाही रोकी जाए और वन्यप्राणियों की गतिविधियों की नियमित निगरानी की जाए।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी परिस्थिति में प्रतिबंधित वन क्षेत्र में प्रवेश न करें। मानसून के दौरान जंगल में वन उपज संग्रहण के लिए जाना जानलेवा साबित हो सकता है।