बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन बंदी श्रवण सूर्यवंशी की मौत का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। करीब ढाई साल पुराने इस मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने मामले को अपने हाथ में लेते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। जांच एजेंसी ने बिलासपुर पहुंचकर मामले से जुड़े पुलिस दस्तावेज और केस डायरी खंगालना शुरू कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने CBI को 13 अक्टूबर से पहले जांच की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

जेल पहुंचने के कुछ दिन बाद बिगड़ी थी तबीयत..
सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम मोहरा निवासी श्रवण सूर्यवंशी को आबकारी एक्ट के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। परिजनों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद वह 19 जनवरी 2024 से केंद्रीय जेल में बंद था। जेल में उसकी तबीयत बिगड़ने पर 21 जनवरी को उसे इलाज के लिए सिम्स अस्पताल भेजा गया। उपचार के दौरान 22 जनवरी की सुबह उसकी मौत हो गई।

शुरुआत से ही श्रवण की मौत को लेकर परिजनों ने सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि पुलिस हिरासत में उसके साथ मारपीट की गई और बाद में उसकी हालत गंभीर होने पर अस्पताल भेजा गया। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता अब CBI की जांच में सामने आने की उम्मीद है।
पत्नी ने मजिस्ट्रेट के सामने बताई घटना की अलग कड़ी..
श्रवण की पत्नी लहरा बाई सूर्यवंशी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान में बताया था कि घटना वाले दिन सीपत थाने के पुलिसकर्मी उनके पति को ग्राम मोहरा से अपने साथ ले गए थे। इसके बाद परिवार को उनके अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिली और अगले दिन उनकी मौत की खबर मिली। पत्नी के अनुसार, परिवार को श्रवण से मिलने का अवसर भी नहीं मिल पाया। परिजनों के इन बयानों को बाद की न्यायिक जांच में दर्ज किया गया।
पिता ने लगाया 36 घंटे तक मारपीट का आरोप..
श्रवण के पिता अमृतलाल सूर्यवंशी ने भी पुलिस हिरासत को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उनके अनुसार, 18 जनवरी की शाम पुलिस श्रवण को शराब से जुड़े मामले में पकड़कर ले गई थी। इसके बाद करीब 21 जनवरी की रात परिवार को जानकारी दी गई कि श्रवण को जेल से सिम्स अस्पताल भेजा गया है। अगले दिन उसकी मौत हो गई।
पिता ने आरोप लगाया था कि हिरासत के दौरान श्रवण के साथ लंबे समय तक मारपीट की गई। हालांकि, ये आरोप भी जांच का विषय हैं और CBI अब उपलब्ध दस्तावेजों, मेडिकल रिकॉर्ड तथा गवाहों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करेगी।
न्यायिक जांच में सिर की गंभीर चोट सामने आई..
मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निकसन डेविड लकड़ा ने जांच की थी। 22 जुलाई 2024 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में पोस्टमार्टम, FSL, हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया गया।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, शरीर में किसी प्रकार के रासायनिक जहर की पुष्टि नहीं हुई। वहीं मेडिकल और फोरेंसिक दस्तावेजों के आधार पर सिर में गंभीर चोट पाए जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट में चोट किसी कठोर एवं भोथरी वस्तु से लगने की संभावना भी बताई गई। चोट की जटिलताओं के चलते कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट को मृत्यु का कारण बताया गया। यही निष्कर्ष बाद में मामले में हत्या की धाराओं में कार्रवाई का महत्वपूर्ण आधार बना।
पहले स्थानीय स्तर पर दर्ज हुआ हत्या का मामला..
न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने हत्या का अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इसके आधार पर बिलासपुर के सिविल लाइन थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। परिजनों ने इसके बाद दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग को लेकर न्यायालय का रुख किया। मामला आगे बढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया।
CBI टीम ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर संभाली जांच..
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद CBI की टीम बिलासपुर पहुंची और सिविल लाइन थाने में मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। टीम ने केस डायरी और न्यायिक जांच प्रतिवेदन सहित उपलब्ध रिकॉर्ड का अवलोकन किया। पुलिस की ओर से केस डायरी CBI को सौंप दी गई है।

अब जांच एजेंसी घटनाक्रम की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने के साथ पुलिस कार्रवाई, जेल में बंदी की स्थिति, अस्पताल के रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजों का परीक्षण करेगी। आवश्यकता के अनुसार मामले से जुड़े पुलिसकर्मियों, जेल कर्मचारियों, चिकित्सकों, परिजनों और अन्य गवाहों से पूछताछ भी की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी से बढ़ी गंभीरता..
हिरासत में मौत से जुड़े इस मामले में अब जांच का दायरा स्थानीय पुलिस से निकलकर CBI तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने CBI को 13 अक्टूबर से पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में मामले की जांच में तेजी आने की संभावना है।

एएसपी सिटी बिलासपुर पंकज पटेल के अनुसार, हिरासत में मौत के मामले की जांच के सिलसिले में CBI की टीम सिविल लाइन थाने पहुंची थी। पुलिस ने टीम को केस डायरी उपलब्ध करा दी है और अब आगे की जांच CBI द्वारा की जा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि श्रवण सूर्यवंशी के सिर में गंभीर चोट कैसे आई और उसकी मौत के लिए कौन जिम्मेदार था। न्यायिक जांच में सामने आए तथ्यों और परिजनों के आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद CBI की रिपोर्ट इस मामले की तस्वीर को और स्पष्ट कर सकती है।







