

बिलासपुर। जिले के पचपेड़ी वन क्षेत्र में पहली बार जंगली भालू के रिहायशी इलाके तक पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया। शुक्रवार सुबह नहर किनारे टहलने निकले लोगों ने अचानक भालू को देखा, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना फैलते ही आसपास के गांवों में भय का माहौल बन गया और लोग घरों से बाहर निकलने में भी सतर्कता बरतने लगे।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भालू कुछ देर तक नहर किनारे घूमता रहा। ग्रामीणों ने जब शोर मचाया तो वह केवंतरा और सुकुलकारी गांव की ओर भागते हुए भरारी जंगल की तरफ चला गया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया।

वन विभाग की लगातार निगरानी और सर्चिंग के बाद भरारी जंगल में मादा भालू को ट्रैक कर लिया गया। इसके बाद कानन पेंडारी के पशु चिकित्सक डॉ. चंदन के नेतृत्व में टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर भालू को सुरक्षित पकड़ लिया। अधिकारियों के मुताबिक मादा भालू की उम्र लगभग 6 से 7 वर्ष बताई जा रही है।
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रेस्क्यू के बाद भालू को सुरक्षित रूप से बिलासपुर वन मंडल के सीपत स्थित सोंठी जंगल में छोड़ दिया गया, ताकि वह प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रह सके और रिहायशी क्षेत्रों से दूर रहे। वन विभाग ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि पूरे अभियान को बिना किसी जनहानि के सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

डीएफओ बिलासपुर नीरज कुमार ने बताया कि भालू की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि भविष्य में कहीं जंगली जानवर दिखाई दे तो उसके करीब जाने या उसे छेड़ने की कोशिश न करें तथा तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
वन अमले ने क्षेत्र के ग्रामीणों को जंगल और सुनसान इलाकों में अकेले न जाने की सलाह भी दी है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मी और भोजन-पानी की तलाश में कई बार वन्य जीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ जाते हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
पचपेड़ी क्षेत्र में पहली बार भालू के इतनी बड़ी संख्या में आबादी के करीब पहुंचने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि वन विभाग की तत्परता से समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया, जिससे लोगों ने राहत महसूस की।



