मतरिंगा में 3 महीने से पैर पसार रहा था मलेरिया, 44 मरीज मिलने के बाद टूटी स्वास्थ्य विभाग की नींद..

सरगुजा। जिले के अंतिम छोर और कोरबा सीमा से लगे सुदूर आदिवासी इलाके मतरिंगा (मुसरडांड पारा) में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही और कार्यप्रणाली की पोल खुल गई है। इलाके में 6 मई को मलेरिया का पहला मरीज मिला था, लेकिन विभाग 3 महीने तक हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। नतीजा यह हुआ कि मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 44 तक पहुंच गया। जब हालात बेकाबू होने लगे, तब रविवार को कलेक्टर अजीत वसंत को खुद ग्राउंड जीरो पर उतरकर मोर्चा संभालना पड़ा। कलेक्टर के कड़े निर्देशों के बाद अब स्वास्थ्य अमले को सघन सर्वे और घर-घर जांच की याद आई है, जो काम विभाग को महीनों पहले कर लेना चाहिए था।

कागजों पर राहत,जमीन पर आफत,आंकड़ों की बाजीगरी..

स्वास्थ्य विभाग भले ही मूसरडाड़, मोकना पहाड़ और मतरिंगा में कैंप लगाकर जांच का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। 6 मई को केदमा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में पहला केस आने से लेकर अब तक विभाग ने क्या ठोस कदम उठाए, इसका कोई विस्तृत ब्यौरा अधिकारियों के पास नहीं है। विभागीय कार्यप्रणाली की वास्तविक तस्वीर दिखाने वाले अहम आंकड़े पूरी तरह से गायब हैं।

स्वास्थ्य विभाग से 4 सीधे सवाल, जिनका जवाब नदारद है :

सर्वे कहां है? 3 महीने के अंतराल में इलाके में कितनी स्वास्थ्य टीमें भेजी गईं और कुल कितने घरों तक पहुंचकर जांच की गई?

सैंपलिंग क्यों नहीं? संक्रमण फैलने के दौरान कुल कितने संदिग्ध मरीजों के ब्लड सैंपल लिए गए?

बचाव के उपाय क्यों नहीं? इन तीन महीनों में मच्छर नियंत्रण के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए? फॉगिंग या दवा का छिड़काव क्यों नहीं हुआ?

मच्छरदानी का वितरण कहां अटका? मलेरिया प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद अब तक कितने प्रभावित परिवारों को मच्छरदानी बांटी गई, इसका डेटा विभाग के पास क्यों नहीं है?

अफसरों की दलील : सब कंट्रोल में है..

अपनी नाकामी छिपाते हुए स्वास्थ्य विभाग अब भी ‘ऑल इज वेल’ का राग अलाप रहा है।

सीएमएचओ का बेतुका तर्क : सरगुजा के सीएमएचओ डॉ. पीएस मार्को का कहना है कि मई से लेकर अब तक 44 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 41 मरीजों का इलाज पूरा हो चुका है और केवल तीन ही एक्टिव केस हैं। हालात पूरी तरह काबू में हैं।

बड़ा सवाल यह है कि यदि हालात काबू में थे और विभाग अपना काम मुस्तैदी से कर रहा था, तो जिले के मुखिया (कलेक्टर) को मौके पर जाकर मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और रोजगार सहायकों की मदद से घर-घर जांच की विशेष कार्ययोजना क्यों बनानी पड़ी?

कलेक्टर की फटकार के बाद अब एक्शन में आया अमला..

कलेक्टर अजीत वसंत ने गांव का मुआयना करने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संदिग्ध मरीजों के तुरंत ब्लड सैंपल लिए जाएं। जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर मच्छरों को पनपने से रोकने और सभी परिवारों को तत्काल मच्छरदानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ राशन, सोलर लाइट और बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं पर भी संज्ञान लिया है।