बिलासपुर में बड़ा भूमि घोटाला : फर्जी दस्तावेजों से शासकीय जमीन हड़पने और ₹2.56 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन का मामला..

बिलासपुर। जिले के ग्राम लगरा में शासकीय भूमि और सार्वजनिक रास्ते को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने का गंभीर मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण में करीब ₹2.56 करोड़ के संदिग्ध और बेनामी लेन-देन का भी आरोप लगाया गया है। मामले को लेकर जिला न्यायालय बिलासपुर के अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह ने प्रधानमंत्री सहित कई उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजकर तत्काल एफआईआर दर्ज करने और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

शिकायत के अनुसार, ग्राम लगरा स्थित खसरा नंबर 556/1 की जमीन की वर्ष 2006 में हुई रजिस्ट्री को आधार बनाकर एक कथित फर्जी “लिंक दस्तावेज” तैयार किया गया। आरोप है कि इसी कूट-रचित दस्तावेज के जरिए शासकीय भूमि और सार्वजनिक रास्ते को निजी भूमि दिखाकर कब्जा कर लिया गया।

इस प्रकरण में कई लोगों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि सभी ने मिलकर सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन का अवैध क्रय-विक्रय किया।

करोड़ों का लेन-देन, मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका..

शिकायत में कहा गया है कि इस फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर करीब ₹2.56 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका भी जताई गई है। मामले की शिकायत प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग को भी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सीमांकन पर भी उठे सवाल..

बताया जा रहा है कि संबंधित पक्षों द्वारा फर्जी दस्तावेजों को सही साबित करने के लिए जमीन का सीमांकन कराने की प्रक्रिया भी शुरू कराई जा रही है। अधिवक्ता ने इस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो शासकीय भूमि को स्थायी रूप से निजी संपत्ति में बदलने का खतरा है।

प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग?

शिकायतकर्ता ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि

मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

शासकीय भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए।

₹2.56 करोड़ के लेन-देन की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो।

प्रकरण में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।

शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल..

इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थानीय लोगों में भी चिंता और आक्रोश बढ़ रहा है। यह मामला सामने आने के बाद अब सबकी नजर प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हुई है।