आधार कार्ड में नाम सुधरवाना हुआ मुश्किल, गजट नोटिफिकेशन अनिवार्य होने से बढ़ी परेशानी..

रायपुर। आधार कार्ड में अपने नाम या सरनेम में सुधार करवाना अब लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। केंद्र सरकार ने नाम परिवर्तन के नियमों को सख्त कर दिया है। छोटी सी त्रुटि या नाम में बदलाव के लिए अब सरकारी गजट (राजपत्र) में अधिसूचना जारी करवाना जरूरी हो गया है। इस नई व्यवस्था के कारण आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकारी तौर पर इस पूरी प्रक्रिया का शुल्क 1100 रुपए से शुरू होता है। लेकिन प्रक्रिया इतनी जटिल कर दी गई है कि आम आदमी बिना किसी वकील की सहायता के इसे आसानी से पूरा नहीं कर सकता। आवेदन तैयार करने, शपथ पत्र बनवाने और सार्वजनिक सूचना जारी करने जैसे कामों के लिए वकील लोगों से 10 हजार से लेकर 20 हजार रुपए तक की मांग कर रहे हैं। इतनी बड़ी रकम चुकाने के बाद भी लोगों का काम तुरंत नहीं हो रहा है। इस पूरी कागजी प्रक्रिया में कम से कम छह महीने का समय लग रहा है। इसके साथ ही एक बड़ी मुश्किल यह भी है कि राजपत्र में प्रकाशन का मुख्यालय राजनांदगांव में स्थित है, जिससे रायपुर और आसपास के लोगों की भागदौड़ और ज्यादा बढ़ गई है।

किन स्थितियों में राजपत्र में प्रकाशन अनिवार्य है?

केंद्र सरकार और यूआईडीएआई के नियमों के मुताबिक कुछ खास स्थितियों में राजपत्र में प्रकाशन आवश्यक कर दिया गया है :

मेजर नाम चेंज : यदि कोई व्यक्ति अपना पूरा नाम बदलना चाहता है, या शादी के बाद केवल सरनेम बदलने के बजाय पूरा नाम ही नया रखना चाहता है, तो गैजेट नोटिफिकेशन देना होगा।

लिमिट खत्म होने पर : नियम के अनुसार एक व्यक्ति अपने पूरे जीवन में केवल दो बार ही आधार में नाम सुधार करवा सकता है। यह लिमिट पार होने पर इसे अपवाद माना जाता है। इसके लिए गजट नोटिफिकेशन और क्षेत्रीय कार्यालय की अनुमति मांगी जाती है।

उपनाम (सरनेम) पूरी तरह बदलना : बिना किसी कानूनी आधार (जैसे शादी) के अपना सरनेम पूरी तरह बदलने पर राजपत्र में प्रकाशन मांगा जाता है।

धर्म परिवर्तन या कानूनी कारण : धर्म बदलने या कोर्ट के आदेश पर नाम बदलने की स्थिति में भी यह नियम लागू होता है।

परेशान लोगों के उदाहरण..

स्पेलिंग सुधार के लिए 12 हजार फीस : रजबंधा मैदान, एकात्म परिसर के पास रहने वाले मोहसिन खान को अपने बच्चे के आधार में केवल स्पेलिंग ठीक करवानी थी। आधार सेंटर जाने पर उन्हें वकील से संपर्क करने को कहा गया। वकील ने बताया कि राजपत्र में अधिसूचना के बाद ही सुधार होगा और इसके लिए 12 हजार रुपए फीस और छह महीने का समय लगेगा।

सरनेम बदलने के लिए 18 हजार की मांग : संजय नगर की रहने वाली शांति देवी ने तलाक के बाद दूसरी शादी की है। वे अपनी पहली शादी से हुए बच्चे का नाम और सरनेम बदलवाना चाहती थीं। सेंटर ने उनसे राजपत्र की कॉपी मांगी। वकील के पास जाने पर उन्हें 18 हजार रुपए तक का खर्च और छह महीने इंतजार करने की बात कही गई।

निर्धारित सरकारी शुल्क एक नजर में..

इस पूरी प्रक्रिया पर ई-डिस्ट्रिक्ट रायपुर की मैनेजर कीर्ति शर्मा का कहना है कि विशेष परिस्थितियों में या दस्तावेजों की कमी होने पर नाम बदलवाने के लिए राजपत्र में प्रकाशन अनिवार्य किया गया है। यह केंद्र सरकार का नियम है और राजपत्र में प्रकाशन कराए बिना नाम में परिवर्तन नहीं हो सकता है।