कांग्रेस बोली – भाजपा राज में पांचवीं बार बढ़े बिजली के दाम, स्मार्ट मीटर बना जनता की परेशानी का कारण..

बिलासपुर। प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली उपभोक्ताओं को इस बार बिजली बिलों ने बड़ा झटका दिया है। जून माह में आए बिजली बिलों को लेकर प्रदेशभर में उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ रही हैं। कांग्रेस का दावा है कि छत्तीसगढ़ के करीब 45 लाख घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल सामान्य से दो से तीन गुना तक अधिक आए हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने बुधवार को प्रेसवार्ता आयोजित कर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद लगातार बिजली दरों में वृद्धि की जा रही है। इसके साथ ही पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की महत्वाकांक्षी ‘बिजली बिल हाफ योजना’ को बंद कर दिया गया, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। कांग्रेस का कहना है कि पहले 400 यूनिट तक बिजली उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं को बिल में बड़ी राहत मिलती थी, लेकिन योजना बंद होने के बाद लोगों को पूरा भुगतान करना पड़ रहा है।
स्मार्ट मीटर पर उठे सवाल..
प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि जिन घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां बिजली खपत वास्तविक उपयोग से अधिक दर्ज की जा रही है। उपभोक्ताओं की शिकायत है कि पुराने मीटरों की तुलना में स्मार्ट मीटर तेजी से रीडिंग दर्ज कर रहे हैं, जिसके कारण बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि दिखाई दे रही है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि कई उपभोक्ताओं को एक ही अवधि के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन अलग-अलग बिल जारी किए जा रहे हैं। वहीं बिना उपभोक्ताओं की जानकारी और सहमति के बिजली विभाग द्वारा स्वीकृत भार (सेंक्शंड लोड) बढ़ाने तथा अतिरिक्त लोड के नाम पर अर्थदंड जोड़कर बिल भेजने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
बढ़ी बिजली दरों का हवाला..
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि हाल ही में घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक वृद्धि की गई है। इसके अलावा गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे तथा कृषि पंपों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट तक दरें बढ़ाई गई हैं। साथ ही 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार लगाए जाने से उपभोक्ताओं का खर्च और बढ़ गया है।
कांग्रेस का दावा है कि उनकी सरकार के पांच वर्षों के कार्यकाल में केवल एक बार नाममात्र की वृद्धि की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार अल्प अवधि में कई बार बिजली दरों में संशोधन कर चुकी है।
अघोषित कटौती और बढ़ते बिल से नाराजगी..
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि एक ओर प्रदेश के कई क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती की शिकायतें मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को भारी-भरकम बिलों का सामना करना पड़ रहा है। इससे आम नागरिकों, मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे व्यवसायियों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
उत्तर प्रदेश का उदाहरण देकर स्मार्ट मीटर हटाने की मांग..
प्रेसवार्ता में कांग्रेस ने मांग की कि यदि स्मार्ट मीटरों को लेकर व्यापक स्तर पर शिकायतें सामने आ रही हैं तो सरकार को इसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। साथ ही उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों को लेकर हुए विवादों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जनहित को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को भी स्मार्ट मीटर व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए और आवश्यक होने पर इसे वापस लेना चाहिए।
धनेन्द्र साहू का बयान चर्चा में..
प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस नेता धनेन्द्र साहू का एक बयान भी चर्चा का विषय बना। उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी कुछ कमियां और गलतियां हुई थीं। उन्होंने कहा कि गौठान निर्माण और उससे जुड़े कार्यों में कई स्थानों पर 50 लाख रुपये से लेकर लगभग एक करोड़ रुपये तक की लागत आई तथा कुछ मामलों में अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान सरकार जनता के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास न करे।
जनता को राहत देने की मांग..
कांग्रेस ने राज्य सरकार से बिजली दरों में बढ़ोतरी वापस लेने, स्मार्ट मीटरों की तकनीकी जांच कराने, उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान करने तथा आम लोगों को राहत देने के लिए विशेष पैकेज की घोषणा करने की मांग की है। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।






