अमाली में प्रस्तावित कोल वाशरी का ग्रामीणों ने किया विरोध, जनसुनवाई स्थगित करने की मांग..पांचवीं अनुसूची, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य का हवाला देकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन..

बिलासपुर। कोटा विकासखंड के ग्राम पंचायत अमाली में प्रस्तावित कोल वाशरी परियोजना को लेकर ग्रामीणों और क्षेत्र के नागरिकों में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर 19 जून को प्रस्तावित जनसुनवाई को तत्काल स्थगित करने की मांग की है। उनका कहना है कि परियोजना से पर्यावरण, कृषि, वन्यजीव, शिक्षा और जनस्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम अमाली में मेसर्स विराज अर्थ फ्यूजन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कोल वाशरी स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में आयोजित की जाने वाली जनसुनवाई को लेकर स्थानीय लोगों ने कई आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

उनका आरोप है कि जिस भूमि पर कोल वाशरी स्थापित की जानी है, उसे कृषि उपयोग के उद्देश्य से खरीदा गया था, जबकि अब उसका उपयोग औद्योगिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अमाली क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां पेसा अधिनियम लागू है। ऐसे क्षेत्रों में ग्राम सभा और ग्राम पंचायत को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। स्थानीय लोगों का तर्क है कि ग्राम पंचायत की सहमति और अधिकारों की अनदेखी कर जनसुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित नहीं है।

महाविद्यालय और वन्यजीव क्षेत्र पर असर की आशंका..

ग्रामीणों के अनुसार प्रस्तावित कोल वाशरी स्थल से लगभग 200 मीटर की दूरी पर शासकीय महाविद्यालय संचालित हो रहा है। उनका कहना है कि वाशरी शुरू होने के बाद धूल, शोर और प्रदूषण का सीधा असर विद्यार्थियों और शैक्षणिक वातावरण पर पड़ेगा।

इसके अलावा क्षेत्रवासियों ने यह भी चिंता जताई है कि प्रस्तावित परियोजना का स्थान अचानकमार टाइगर रिजर्व क्षेत्र से अपेक्षाकृत नजदीक है। ऐसे में कोल वाशरी से निकलने वाले प्रदूषण और बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों का असर वन्यजीवों और पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ सकता है।

कृषि और स्वास्थ्य पर खतरे का दावा..

विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि कोल वाशरी से निकलने वाला प्रदूषित पानी और धूल आसपास की कृषि भूमि को प्रभावित कर सकता है। इससे खेती की उत्पादकता घटने और भूमि की गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। साथ ही वायु प्रदूषण के कारण क्षेत्र में श्वसन संबंधी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।

ग्रामीणों ने आशंका जताई कि उद्योग स्थापित होने के बाद बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कानून-व्यवस्था और संभावित आपराधिक गतिविधियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।

जनभावनाओं का सम्मान करने की मांग..

ग्रामीणों और नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र की जनभावनाओं, पर्यावरणीय चिंताओं और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए 19 जून को प्रस्तावित जनसुनवाई को स्थगित किया जाए। उनका कहना है कि जब तक सभी आपत्तियों का निष्पक्ष परीक्षण नहीं हो जाता, तब तक परियोजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।

अमाली और आसपास के गांवों के लोगों ने स्पष्ट किया है कि वे अपने क्षेत्र की पर्यावरणीय सुरक्षा, कृषि हितों और जनस्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं करेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन भी करेंगे।