बिलासपुर में 200 करोड़ रुपए की लागत से बना सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल इन दिनों राजनीतिक घमासान का केंद्र बन गया है। इस बड़े अस्पताल को PPP मॉडल (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) पर चलाने की तैयारी चल रही है, जिसने अब तूल पकड़ लिया है। इस मामले में कांग्रेस पार्टी ने सरकार की योजना पर कई सवाल खड़े किए हैं। आम जनता के मन में सबसे बड़ी शंका यह है कि क्या निजी हाथों में जाने के बाद गरीबों का मुफ्त इलाज बचेगा या फिर यह अस्पताल पूरी तरह से निजी संस्थान के हवाले हो जाएगा।

कांग्रेस ने रखे दस्तावेज, मांगे जवाब..


बुधवार को कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने शहर के एक निजी होटल में प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान पार्टी के जिला अध्यक्ष और शहर अध्यक्ष भी मौजूद थे। कांग्रेस नेताओं ने मीडिया के सामने PPP मॉडल से संबंधित कई दस्तावेज पेश किए। उन्होंने सरकार और स्थानीय बेलतरा विधायक से मांग की कि वे जनता के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट करें।

संसाधन सरकार के, तो प्राइवेट क्यों?

प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने पूछा कि यह सरकारी बिल्डिंग CSR मद, केंद्र और राज्य शासन के इन्फ्रास्ट्रक्चर व संसाधनों से तैयार की गई है। ऐसे में सरकार किस आधार पर इतने बड़े संसाधन को किसी निजी संस्थान को सौंप रही है? जब पैसा और जगह सब सरकारी है, तो इसे प्राइवेट हाथों में क्यों दिया जा रहा है?
आयुष्मान योजना और मुफ्त इलाज पर सवाल..
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल आम आदमी की सुविधाओं को लेकर है। सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि क्या गरीब परिवारों को यहां निशुल्क चिकित्सा की सुविधा दी जाएगी या नहीं? क्या इस अस्पताल में लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ मिलेगा या नहीं? अंचल की जनता ने सरकार से केवल 200 करोड़ रुपए के अस्पताल भवन की मांग नहीं की थी, बल्कि जटिल बीमारियों के लिए अच्छी चिकित्सा व्यवस्था मांगी थी।
पुराने वादों का क्या होगा?
सरकार ने खुद भी अंचलवासियों को निःशुल्क और समुचित चिकित्सा प्रदान करने का वायदा किया था। अब जब अस्पताल को पीपीपी मॉडल पर देने की बात आ रही है, तो उन वादों का क्या होगा? कांग्रेस का कहना है कि सरकार और बेलतरा विधायक को सामने आकर इन सभी बातों पर जवाब देना चाहिए। आम लोग यह जानना चाहते हैं कि उनके लिए बने इस अस्पताल में आखिर उनके इलाज की क्या रूपरेखा होगी।







