
वन्यप्राणी सप्ताह का शुभारंभ, तीन क्षेत्रों में निकली पैदल, साइकिल और बाइक रैली; ग्रामीणों, वन प्रबंधन समितियों और स्कूली बच्चों ने दिया संरक्षण का संदेश..

लोरमी/मुंगेली। अचानकमार टाइगर रिजर्व में वन्यप्राणियों के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों को जोड़ने के उद्देश्य से शुक्रवार से वन्यप्राणी सप्ताह की शुरुआत हुई। 2 से 8 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान के पहले दिन टाइगर रिजर्व के अलग-अलग क्षेत्रों में पैदल, साइकिल और बाइक जागरूकता रैलियां निकाली गईं। रैली के जरिए वन्यप्राणियों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण और जंगल के आसपास रहने वाले लोगों में संवेदनशीलता बढ़ाने का संदेश दिया गया।

इस वर्ष वन्यप्राणी सप्ताह की थीम ‘Connecting Habitats. Thriving Wildlife’ यानी ‘जुड़े आवास, समृद्ध वन्यजीवन’ रखी गई है। थीम के अनुरूप वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और जुड़े हुए आवास की जरूरत के साथ संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।
तीन क्षेत्रों में एक साथ निकली रैली..
वन्यप्राणी सप्ताह के पहले दिन अचानकमार टाइगर रिजर्व के कोटा बफर परिक्षेत्र के ग्राम शिवतराई, लोरमी बफर परिक्षेत्र के ग्राम सावंतपुर और लमनी परिक्षेत्र के ग्राम लमनी में जागरूकता रैली आयोजित की गई।


रैली में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ वन प्रबंधन समिति के सदस्य, स्थानीय ग्रामीण और स्कूली छात्र-छात्राएं शामिल हुए। पैदल, साइकिल और बाइक के माध्यम से निकली रैली के दौरान लोगों को वन्यजीवों से जुड़े संरक्षण संदेशों के प्रति जागरूक किया गया।
संरक्षण में ग्रामीणों की भागीदारी पर जोर..
अचानकमार जैसे महत्वपूर्ण वन क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण केवल जंगल की सीमा तक सीमित नहीं है। टाइगर रिजर्व से लगे गांवों के लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग की ओर से जागरूकता गतिविधियों में स्थानीय ग्रामीणों और वन प्रबंधन समितियों को जोड़ा जा रहा है।
रैली के माध्यम से लोगों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहने, उनके प्राकृतिक आवास को नुकसान से बचाने और जंगल से जुड़े संरक्षण प्रयासों में सहयोग करने का संदेश दिया गया।
बाघ के साथ दूसरे वन्यजीवों के संरक्षण का भी संदेश..
अचानकमार टाइगर रिजर्व बाघों के साथ कई तरह के शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। विभाग का कहना है कि वन्यजीवों के लिए बेहतर आवास और जनभागीदारी बढ़ने से संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

वन्यप्राणी सप्ताह के दौरान लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि जंगल और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने में स्थानीय समुदाय की भूमिका अहम है। जागरूकता बढ़ने से वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वन अमला और डॉग स्क्वायड भी रहा मौजूद..
जागरूकता रैली में वन परिक्षेत्र अधिकारी, परिक्षेत्र सहायक, परिसर रक्षक, पैदल गार्ड, एसटीपीएफ टीम और डॉग स्क्वायड टीम के सदस्य भी मौजूद रहे। इसके अलावा वन प्रबंधन समिति के सदस्यों, ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने भी भाग लिया।

वन्यप्राणी सप्ताह के आगामी दिनों में भी संरक्षण और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों का उद्देश्य वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर आम लोगों की भागीदारी बढ़ाना और जंगल से जुड़े समुदायों को संरक्षण की मुहिम से लगातार जोड़ना है।







