अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर अचानकमार टाइगर रिजर्व में जनजागरूकता का महाअभियान, स्निफर डॉग वाहन को मिली हरी झंडी, वनकर्मियों और ग्रामीण प्रतिभाओं का सम्मान..

बिलासपुर,29 जुलाई।अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) के शिवतराई स्थित बैगा रिसॉर्ट में बुधवार को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का बड़ा आयोजन हुआ। कार्यक्रम केवल औपचारिक समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें बाघ संरक्षण, आधुनिक तकनीक, जनभागीदारी, स्थानीय कला, शिक्षा और ग्रामीण विकास को एक साथ जोड़ते हुए संरक्षण का व्यापक संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि स्वस्थ जंगलों और संतुलित पर्यावरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यदि बाघ सुरक्षित रहेंगे तो जंगल जीवित रहेंगे, जंगल सुरक्षित रहेंगे तो जलस्रोत बचेंगे और पर्यावरण संतुलित रहेगा। अंततः यही मानव जीवन की सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है।

कार्यक्रम की शुरुआत एक महत्वपूर्ण पहल से हुई। उपमुख्यमंत्री ने विश्व प्रकृति निधि (WWF) द्वारा अचानकमार टाइगर रिजर्व को उपलब्ध कराए गए स्निफर डॉग रैपिड एक्शन फोर्स पेट्रोलिंग वाहन (बोलेरो कैंपर) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन वन्यजीव अपराधों की रोकथाम और त्वरित कार्रवाई में अहम भूमिका निभाएगा।

इस दौरान एटीआर की प्रशिक्षित स्निफर डॉग ‘नीतू’ भी आकर्षण का केंद्र रही। अधिकारियों ने बताया कि नीतू ने हरियाणा के पंचकूला स्थित नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर डॉग से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है और अगस्त 2025 से अचानकमार टाइगर रिजर्व में सेवाएं दे रही है। अब तक वह छत्तीसगढ़ के पांच वनमंडलों में छह गंभीर वन्यजीव अपराधों की जांच और आरोपियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण योगदान दे चुकी है।
मुख्य समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती और छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद अधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया।
अपने स्वागत उद्बोधन में एटीआर के उप संचालक ने बाघ संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पाण्डेय ने पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। मुंगेली कलेक्टर कुंदन कुमार ने कहा कि बाघ वन पारिस्थितिकी तंत्र के सबसे महत्वपूर्ण प्रहरी हैं और जिला प्रशासन संरक्षण के हर प्रयास में वन विभाग के साथ खड़ा रहेगा।

अचानकमार टाइगर रिजर्व की क्षेत्रीय निदेशक एवं मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) प्रियंका पाण्डेय ने बाघों की निगरानी, आधुनिक सुरक्षा तकनीकों, ट्रैप कैमरों और संरक्षण अभियानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने वनग्रामों में रहने वाले लोगों से भी संरक्षण अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत आज दुनिया में सबसे अधिक बाघों वाला देश है और देश के 58 टाइगर रिजर्व जैव विविधता की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा करने का आह्वान किया। साथ ही अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण, पर्यटन विकास और स्थानीय लोगों के रोजगार सृजन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए वन विभाग की पूरी टीम को बधाई दी।

कार्यक्रम में बांधवगढ़ से अचानकमार टाइगर रिजर्व तक बाघिन झुमरी की यात्रा और उसके सफल प्रजनन पर आधारित प्रेरक वीडियो भी प्रदर्शित किया गया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि सतत संरक्षण प्रयासों से विलुप्ति के खतरे से जूझ रहे वन्यजीवों को सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है।
इसके बाद सम्मान समारोह आयोजित किया गया। तकनीकी सहयोग और ट्रैप कैमरा संचालन में विशेष योगदान के लिए WWF के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी उपेन्द्र दूबे को सम्मानित किया गया। शिवतराई की रागिनी ध्रुव और तान्या मरावी को गोंड एवं गोदना कला के माध्यम से अचानकमार टाइगर रिजर्व की पहचान को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए।

वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अचानकमार टाइगर रिजर्व के 20 क्षेत्रीय कर्मचारियों को मेडल, प्रशस्ति पत्र और ₹1000 की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया। इसमें से ₹10,000 की वार्षिक प्रोत्साहन राशि वन्यजीव प्रेमी प्राण चड्डा द्वारा अपनी दिवंगत पुत्री स्वर्गीय प्रीति चड्डा की स्मृति में प्रदान की जाती है।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। अचानकमार वन औषधालय के उन्नयन के बाद सेवानिवृत्त चिकित्सक डॉ. एस.पी. त्रिपाठी को वनग्रामों के ग्रामीणों की स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई और उन्हें सांकेतिक रूप से आवश्यक सामग्री प्रदान की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर वनग्रामों के शासकीय विद्यालयों में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं को भी मंच से सम्मानित किया गया। पुरस्कार पाकर बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम में पूर्व आईएफएस अधिकारी एस.डी. बड़गैया, जनप्रतिनिधि, वन विभाग एवं जिला प्रशासन के अधिकारी, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, वनग्रामों के ग्रामीण और पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि बाघ संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज, प्रशासन और स्थानीय समुदाय की साझी भागीदारी से ही जंगल, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रखा जा सकता है।







