बाघों की सुरक्षा के लिए वन अमले को आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग..

सूरजपुर में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला, ट्रैप कैमरा, एम-स्ट्राइप्स ऐप और एंटी-स्नेयर वॉक का कराया गया अभ्यास..

बिलासपुर/सूरजपुर, 13 सितंबर। बाघों की सुरक्षा और उनके मूवमेंट पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने मैदानी अमले को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक निगरानी का प्रशिक्षण दिया। सूरजपुर वनमंडल में 12 और 13 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय विशेष कार्यशाला में अधिकारियों और कर्मचारियों को बाघों की पहचान, उनके आवागमन की निगरानी, साक्ष्य जुटाने और वन्यजीव अपराधों की रोकथाम की तकनीकें सिखाई गईं।

छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग के निर्देश और मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं क्षेत्रीय निदेशक, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बाघों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना रहा। प्रशिक्षण में सूरजपुर, कोरिया और मनेन्द्रगढ़ वनमंडल सहित टाइगर रिजर्व और एलिफेंट रिजर्व क्षेत्र के मैदानी कर्मचारी शामिल हुए।

पहले दिन कक्षा में समझे बाघों के मूवमेंट और खतरे..

कार्यशाला के पहले दिन सूरजपुर वनमंडल कार्यालय के सभागार में कक्षा आधारित प्रशिक्षण हुआ। इसमें सरगुजा वन वृत्त में बाघों की वर्तमान और ऐतिहासिक मौजूदगी, उनके मूवमेंट, जंगलों के बीच कॉरिडोर और लैंडस्केप कनेक्टिविटी जैसे विषयों की जानकारी दी गई। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की टाइगर मैपिंग और बाघों की निगरानी से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी समझाया गया।

प्रशिक्षण के दौरान बाघों की मौत के संभावित कारणों पर भी चर्चा हुई। इसमें बीमारी, आपसी संघर्ष, प्राकृतिक कारणों के साथ शिकार और विद्युत करंट जैसे मानवजनित खतरों की पहचान और उनकी रोकथाम के उपाय बताए गए।

दूसरे दिन जंगल में उतरा वन अमला..

दूसरे दिन कोरिया वनमंडल के कटकोना कोलियरी और टेमरी बीट क्षेत्र में मैदानी प्रशिक्षण दिया गया। यहां प्रशिक्षणार्थियों को केवल जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि जंगल में वास्तविक परिस्थितियों के बीच निगरानी की तकनीकों का अभ्यास भी कराया गया।

वनकर्मियों को ट्रैप कैमरा लगाने और उससे प्राप्त तस्वीरों की मॉनिटरिंग, एम-स्ट्राइप्स पेट्रोल ऐप से गश्त और डेटा दर्ज करने, मवेशियों के शिकार की पहचान एवं रिकॉर्डिंग, पगमार्क और डंग एनालिसिस की जानकारी दी गई। इसके अलावा एंटी-स्नेयर वॉक के जरिए जंगल में लगाए जाने वाले अवैध फंदों और अन्य खतरों को तलाशने का अभ्यास कराया गया।

नियमित और व्यवस्थित फुट पेट्रोलिंग के दौरान किन बातों का ध्यान रखना है और किस तरह मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जाने हैं, इसकी भी जानकारी दी गई।

ग्रामीणों और बच्चों को भी संरक्षण से जोड़ने पर जोर..

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि बाघ संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए स्थानीय ग्रामीणों, चरवाहों और स्कूली बच्चों की भागीदारी भी जरूरी है। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित टाइगर ट्रैकर तैयार करने और ‘वाघ चौपाल’ जैसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने पर जोर दिया गया।

वन क्षेत्रों में बाघों की मौजूदगी के दौरान ग्रामीणों को समय पर जानकारी देने और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में सुरक्षित एवं त्वरित कार्रवाई की जरूरत पर भी चर्चा हुई।

मैदानी कर्मचारियों की सुरक्षा भी प्रशिक्षण का हिस्सा..

प्रशिक्षण में वन अमले की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण विषय बनाया गया। गश्त और निगरानी के दौरान ट्रैप कैमरा, वॉकी-टॉकी, टॉर्च, ग्लव्स और वेटरनरी किट जैसे जरूरी उपकरणों के उपयोग की जानकारी दी गई। टाइगर ट्रैकर्स के पहचान-पत्र और उनकी मैदानी भूमिका को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

गौरव निहलानी ने सिखाई आधुनिक मॉनिटरिंग तकनीक..

प्रशिक्षण के प्रमुख सत्रों का संचालन छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य एवं उप निदेशक, एलिफेंट रिजर्व सरगुजा गौरव निहलानी ने किया। उन्होंने बाघों की आधुनिक मॉनिटरिंग, फील्ड प्रोटेक्शन और पेट्रोलिंग के दौरान वैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल की जानकारी दी।

कार्यशाला को मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं फील्ड डायरेक्टर, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व, उप निदेशक एलिफेंट रिजर्व सरगुजा, वनमंडलाधिकारी सूरजपुर और उप निदेशक गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व सहित वरिष्ठ वन अधिकारियों का मार्गदर्शन मिला।

प्रशिक्षण में एसडीओ, रेंजर, डिप्टी रेंजर, फॉरेस्टर, बीट गार्ड और टाइगर ट्रैकर सहित मैदानी स्तर के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। विभाग का मानना है कि प्रशिक्षण के बाद बाघों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में गश्त, निगरानी, सूचना संकलन और वन्यजीव अपराधों की रोकथाम की व्यवस्था और मजबूत होगी। इससे बाघों के साथ उनके आवास की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।