छत्तीसगढ़ के वनरक्षक ने बढ़ाया प्रदेश का मान, बाघों की सुरक्षा के प्रहरी राकेश मार्कण्डेय को मिला राष्ट्रीय ‘एनटीसीए उत्कृष्टता पुरस्कार-2026’

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के वनरक्षक की बहादुरी और समर्पण को मिला राष्ट्रीय सम्मान, अवैध शिकार रोकने और 635 हेक्टेयर वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने में निभाई अहम भूमिका..

रायपुर, 29 जुलाई। वैश्विक बाघ दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पदस्थ वनरक्षक राकेश मार्कण्डेय को देश के सबसे प्रतिष्ठित वन्यजीव संरक्षण सम्मानों में शामिल ‘एनटीसीए उत्कृष्टता पुरस्कार-2026’ से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें वन्यजीव संरक्षण एवं अवैध शिकार रोकथाम के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार देशभर के उन चुनिंदा अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों को मिलता है, जिन्होंने कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बाघों तथा अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए असाधारण कार्य किया हो। यह सम्मान 29 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में प्रदान किया जाएगा।

राकेश मार्कण्डेय वर्तमान में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र के ओंढ बीट में वनरक्षक के रूप में कार्यरत हैं। पिछले कई वर्षों से उन्होंने जंगलों की सुरक्षा, वन्यजीवों के संरक्षण और वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार सक्रिय भूमिका निभाई है। विशेष रूप से छत्तीसगढ़-ओडिशा अंतर्राज्यीय सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों में उनकी कार्यशैली की सराहना की जाती रही है।

वन विभाग के अनुसार, उन्होंने 635 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही संरक्षित वन क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने के लिए कई अभियान चलाए गए, जिनमें उनका योगदान बेहद अहम रहा।

राकेश मार्कण्डेय विशेष एंटी-पोचिंग दल के सक्रिय सदस्य भी रहे हैं। उन्होंने ओडिशा सीमा से लगे जंगलों में वन्यजीव तस्करों और शिकारियों के खिलाफ कई सफल अभियानों में हिस्सा लिया। खुफिया जानकारी जुटाने, संयुक्त कार्रवाई करने और वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया।

उनकी कार्यशैली केवल पारंपरिक गश्त तक सीमित नहीं रही। आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए उन्होंने ड्रोन आधारित निगरानी और रिमोट सर्विलांस सिस्टम के जरिए जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में योगदान दिया। नियमित गश्त और सतत निगरानी के कारण बाघों सहित कई महत्वपूर्ण वन्यजीवों के आवास सुरक्षित बनाए रखने में सफलता मिली।

वन अधिकारियों का कहना है कि यह सम्मान केवल राकेश मार्कण्डेय की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उन सभी वनकर्मियों के समर्पण का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है, जो दिन-रात जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा में जुटे रहते हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और लगातार मौजूद खतरों के बीच वनकर्मियों की भूमिका देश की जैव विविधता बचाने में बेहद महत्वपूर्ण है।

छत्तीसगढ़ वन विभाग ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि राकेश मार्कण्डेय का सम्मान पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। विभाग ने विश्वास जताया कि उनकी यह उपलब्धि अन्य वनकर्मियों को भी वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति और अधिक समर्पण, साहस और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगी।

राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान एक बार फिर साबित करता है कि छत्तीसगढ़ के वनकर्मी केवल जंगलों की सुरक्षा ही नहीं कर रहे, बल्कि देश की जैव विविधता और बाघों के भविष्य को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व लगातार संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है और यह सम्मान उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।