बाहरी तत्वों द्वारा धमकी और गुंडागर्दी के आरोप, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी..

बिलासपुर। कोटा विकासखंड के ग्राम पंचायत अमाली में प्रस्तावित कोल वाशरी परियोजना को लेकर ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और विद्यार्थियों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए इसे क्षेत्र के पर्यावरण, कृषि, शिक्षा, वन्यजीव संरक्षण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया। विरोध के बीच जनसुनवाई स्थल पर तनावपूर्ण स्थिति भी निर्मित हुई, जहां ग्रामीणों ने बाहरी लोगों द्वारा दबाव बनाने और धमकी देने के आरोप लगाए।
जनसुनवाई से पूर्व ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित सुनवाई को स्थगित करने की मांग की थी। उनका कहना था कि जब तक परियोजना से जुड़े सभी कानूनी, पर्यावरणीय और सामाजिक पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
ग्राम पंचायत की सहमति के बिना आगे बढ़ रही प्रक्रिया : ग्रामीण..
ग्रामीणों का आरोप है कि मेसर्स विराज अर्थ फ्यूजन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जिस भूमि पर कोल वाशरी स्थापित करने की तैयारी की जा रही है, उसे मूल रूप से कृषि कार्य के लिए खरीदा गया था। अब उसी भूमि का औद्योगिक उपयोग किए जाने का प्रयास किया जा रहा है, जो नियमों और जनहित के विरुद्ध है।

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि अमाली क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है तथा यहां पेसा अधिनियम लागू है। ऐसे क्षेत्रों में ग्राम सभा और ग्राम पंचायत को विशेष संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय ग्राम पंचायत की सहमति और अधिकारों की अनदेखी करते हुए परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
महाविद्यालय और विद्यार्थियों पर पड़ सकता है असर..
ग्रामीणों ने बताया कि प्रस्तावित कोल वाशरी स्थल से लगभग 200 मीटर की दूरी पर शासकीय महाविद्यालय संचालित है। उनका कहना है कि उद्योग शुरू होने के बाद धूल, शोर और भारी वाहनों की आवाजाही से शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होगा। इससे विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अचानकमार टाइगर रिजर्व पर भी मंडरा सकता है खतरा..
क्षेत्रवासियों ने चिंता जताई कि प्रस्तावित परियोजना का क्षेत्र अचानकमार टाइगर रिजर्व के प्रभाव क्षेत्र के निकट स्थित है। ऐसे में कोल वाशरी से उत्पन्न प्रदूषण, औद्योगिक गतिविधियों और परिवहन दबाव का असर वन्यजीवों तथा पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि यह इलाका जैव विविधता की दृष्टि से संवेदनशील है और यहां किसी भी प्रदूषणकारी उद्योग की स्थापना गंभीर परिणाम ला सकती है।
खेती और जनस्वास्थ्य पर संकट की आशंका..
ग्रामीणों ने दावा किया कि कोल वाशरी से निकलने वाली धूल और अपशिष्ट जल आसपास की कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने के साथ-साथ फसलों की उत्पादकता में भी कमी आ सकती है। वहीं वायु प्रदूषण के कारण श्वसन संबंधी बीमारियों सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ने की आशंका भी व्यक्त की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की बड़ी आबादी कृषि और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। ऐसे में उद्योग स्थापित होने से आजीविका और पर्यावरण दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
जनसुनवाई में हंगामा, बाहरी लोगों पर दबाव बनाने के आरोप..

जनसुनवाई के दौरान विरोध प्रदर्शन के बीच माहौल उस समय गरमा गया जब ग्रामीणों ने कुछ बाहरी लोगों पर हंगामा करने और विरोध कर रहे लोगों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का दावा है कि परियोजना के समर्थन में कोरबा और अंबिकापुर से कुछ लोगों को बुलाया गया था, जिन्होंने विरोध को दबाने का प्रयास किया। हालांकि ग्रामीणों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया और अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
हाईकोर्ट तक लड़ाई ले जाने की चेतावनी..
ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे क्षेत्र के पर्यावरण, कृषि और जनस्वास्थ्य से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यदि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर परियोजना को आगे बढ़ाया गया तो वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और आवश्यकता पड़ने पर हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र की जनभावनाओं, संवैधानिक प्रावधानों और पर्यावरणीय चिंताओं को ध्यान में रखते हुए परियोजना की प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि विकास के नाम पर स्थानीय अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।







